
Sandipani Vidyalaya Lokarpan
भोपाल: मध्य प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार प्रदेश के बच्चों को आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रदेश में नवनिर्मित 70 सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण आगामी 15 जुलाई, 2026 तक कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह लोकार्पण महज एक सरकारी औपचारिकता या फीता काटने वाला कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि इसे शिक्षा, संस्कृति और जनभागीदारी के एक बड़े ‘सामाजिक उत्सव’ (आनंदोत्सव) के रूप में मनाया जाएगा।
स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग की संयुक्त पहल
शुक्रवार को मंत्रालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को इसके पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए। इस परियोजना में स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग दोनों मिलकर काम कर रहे हैं।
वर्तमान में तैयार हो चुके 70 स्कूलों का गणित कुछ इस प्रकार है:
स्कूल शिक्षा विभाग: 46 विद्यालय
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जनजातीय कार्य विभाग: 24 विद्यालय
ये सभी भवन पूरी तरह बनकर तैयार हैं और अब इनमें नए सत्र के बच्चों का स्वागत करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। जिन जगहों पर भवनों का लोकार्पण पहले ही हो चुका है, वहां वर्तमान में चल रहे ‘स्कूल चलें अभियान’ के तहत बड़े पैमाने पर प्रवेशोत्सव मनाया जा रहा है।
हर छात्र को मिलेगी गुरु सांदीपनि की ‘पॉकेट बुक’
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में एक बेहद महत्वपूर्ण निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के गुरु, महर्षि सांदीपनि के जीवन और उनके विचारों पर आधारित एक लघु पुस्तिका (पॉकेट बुक) तैयार की जाए। यह पुस्तिका हर विद्यार्थी को बांटी जाएगी।
“गुरु सांदीपनि प्राचीन काल में सामाजिक समरसता के सबसे बड़े प्रतीक थे। उन्होंने राजपरिवार के बच्चों (जैसे श्रीकृष्ण और बलराम) और एक गरीब ब्राह्मण के बेटे (सुदामा) को एक ही आश्रम में, बिना किसी भेदभाव के समान शिक्षा दी। आज के दौर में हमारे बच्चों को प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और गुरु-शिष्य के इस पवित्र रिश्ते को समझना बहुत जरूरी है।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री (म.प्र.)
उत्सव को यादगार बनाने के लिए विशेष रूपरेखा
लोकार्पण कार्यक्रमों को बच्चों के लिए यादगार बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निम्नलिखित गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए हैं:
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: स्कूल के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
मिष्ठान वितरण: कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी विद्यार्थियों को सरकार की ओर से स्वल्पाहार और मिठाई बांटी जाएगी।
जनभागीदारी: इस उत्सव में केवल अधिकारी नहीं, बल्कि बच्चों के माता-पिता (अभिभावक), स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाज के गणमान्य नागरिक भी शामिल होंगे।
29 जुलाई को ‘गुरु पूर्णिमा’ पर होंगे विशेष डिजिटल और AI प्रदर्शन
मुख्यमंत्री ने एक और बड़ा निर्णय लेते हुए कहा कि आने वाली 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर हर जिले के एक मुख्य सांदीपनि विद्यालय में भव्य जिला स्तरीय उत्सव मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उस जिले के प्रभारी मंत्री करेंगे।
इस गुरु पूर्णिमा उत्सव के मुख्य आकर्षण होंगे:
आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन: छात्र अपनी डिजिटल स्किल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन करेंगे।
विज्ञान प्रदर्शनी: बच्चों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए साइंस एग्जीबिशन लगाई जाएगी।
गुरुजन सम्मान: शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले शिक्षकों और नवाचार करने वाले प्राध्यापकों को सम्मानित किया जाएगा।
मेधावी छात्र सम्मान: स्कूल के टॉपर और प्रतिभावान बच्चों की हौसला अफजाई की जाएगी।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
इस महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह और स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह भी शामिल हुए। ग्राउंड रिपोर्ट और प्रशासनिक तैयारियों का ब्योरा स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल ने प्रस्तुत किया। इसके अलावा मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई और प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्री गुलशन बामरा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
निष्कर्ष: मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम साफ तौर पर यह दर्शाता है कि राज्य में अब सरकारी स्कूलों की छवि बदलने वाली है। सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को भी अब कॉन्वेंट स्तर की आधुनिक सुविधाएं, विज्ञान, डिजिटल तकनीक और सबसे महत्वपूर्ण—भारतीय संस्कृति के संस्कार एक साथ मिल सकेंगे।
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