
Heart Attack vs Cardiac Arrest
अक्सर सोशल मीडिया पर एक सलाह बहुत तेजी से वायरल होती है—”जैसे ही किसी को सीने में दर्द हो या कोई बेहोश हो, तुरंत उसके सीने को दबाना (CPR देना) शुरू कर दें।” इस चक्कर में कई बार लोग बिना सोचे-समझे और बिना स्थिति को जाने मरीज को CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) देने लगते हैं।
लेकिन क्या वाकई हर हार्ट अटैक में CPR देना जरूरी है? या ऐसा करना मरीज के लिए और खतरनाक साबित हो सकता है? आइए वरिष्ठ डॉक्टरों और हालिया मेडिकल रिपोर्ट्स के हवाले से जानते हैं कि इस पर विज्ञान और डॉक्टर्स का क्या कहना है।
सबसे बड़ा भ्रम: हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक समझना
अक्सर लोग हार्ट अटैक (Heart Attack) और कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) को एक ही बीमारी मान लेते हैं, जबकि मेडिकल साइंस में ये दोनों एकदम अलग स्थितियां हैं:
हार्ट अटैक (प्लंबिंग की समस्या): इसमें दिल तक खून पहुंचाने वाली किसी नसों (धमनियों) में ब्लॉकेज आ जाता है। इस वजह से दिल की मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे डैमेज होने लगती हैं। इस स्थिति में मरीज होश में होता है, बात कर सकता है और उसका दिल धड़क रहा होता है।
कार्डियक अरेस्ट (इलेक्ट्रिकल समस्या): इसमें दिल के अंदर का इलेक्ट्रिकल सिस्टम अचानक फेल हो जाता है और दिल धड़कना बंद कर देता है। मरीज कुछ ही सेकंड में बेहोश हो जाता है, उसकी सांसें रुक जाती हैं और नाड़ी (Pulse) मिलनी बंद हो जाती है।
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डॉक्टरों की साफ सलाह: अगर मरीज होश में है, सांस ले रहा है और उसे सिर्फ हार्ट अटैक के लक्षण (सीने में तेज दर्द, पसीना आना) हैं, तो उसे CPR देने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। धड़कते हुए दिल पर बाहर से तेज दबाव डालने से पसलियों में फ्रैक्चर, भयंकर दर्द या अंदरूनी ब्लीडिंग जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में मरीज को बिना वक्त गंवाए तुरंत अस्पताल ले जाना ही इकलौता सही कदम है।
अगर गलती से CPR दे दिया जाए, तो क्या होगा? क्या कहती है रिसर्च?
कई लोग इस डर से भी किसी की जान बचाने के लिए आगे नहीं आते कि कहीं उनके CPR देने से मरीज को कोई चोट न लग जाए। मेडिकल जर्नल Resuscitation Plus में प्रकाशित दुनिया भर के 5 बड़े अध्ययनों की एक समीक्षा (सिस्टेमैटिक रिव्यू) में कुछ बेहद अहम बातें सामने आईं:
समीक्षा में शामिल 1031 मरीजों के डेटा के अनुसार, गलत तरीके से या हड़बड़ी में दिए गए CPR के कारण सिर्फ 1 प्रतिशत मामलों में ही पसलियां टूटने, हंसली (कॉलर बोन) टूटने या मामूली अंदरूनी ब्लीडिंग की शिकायत देखी गई।
स्टडी के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति सच में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा हो (सांसें रुक चुकी हों), तो पसलियों में फ्रैक्चर के जोखिम (जो 30 से 45% मामलों में मुमकिन है) से कहीं ज्यादा जरूरी मरीज की जान बचाना होता है।
कफ CPR (Cough CPR): क्या खांसने से बच सकती है जान?
इंटरनेट पर एक और थ्योरी तैरती रहती है कि हार्ट अटैक आने पर जोर-जोर से खांसने (Cough CPR) से ब्लॉक नसें खुल जाती हैं।
क्या यह सच है? डॉक्टरों के मुताबिक, यह तरीका आम हालातों में बिल्कुल काम नहीं करता। अस्पताल की कैथ लैब (Cath Lab) के अंदर जब मरीज लगातार मशीनों और डॉक्टरों की निगरानी में होता है और उसकी धड़कन अचानक अनियमित होती है, तब डॉक्टर कुछ सेकंड के लिए उसे खांसने को कह सकते हैं। लेकिन घर, ऑफिस या सड़क पर हार्ट अटैक आने पर लगातार खांसते रहने से कोई फायदा नहीं होता। यह सिर्फ डॉक्टर तक पहुंचने के कीमती समय को बर्बाद करता है।
कब देना चाहिए CPR? इन 3 संकेतों को पहचानें
डॉक्टरों के अनुसार, आपको किसी मरीज को CPR केवल और केवल तभी देना चाहिए जब:
व्यक्ति अचानक अचेत (बेहोश) हो गया हो।
उसकी सांस पूरी तरह बंद हो चुकी हो या वह सिर्फ हांफ (Gasping) रहा हो।
गर्दन या कलाई पर छूने पर उसकी नाड़ी (Pulse) या दिल की धड़कन महसूस न हो रही हो।
निष्कर्ष: क्या करें जब सामने आए ऐसा मामला?
अगर आपके सामने किसी व्यक्ति को सीने में भारीपन, दर्द जो कंधे, हाथ या जबड़े तक फैल रहा हो, ठंडा पसीना और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें, तो:
अगर मरीज होश में है: उसे शांत बिठाएं और तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या नजदीकी कार्डियक अस्पताल ले जाएं। (CPR न दें)
अगर मरीज बेहोश हो जाए और सांस रुक जाए: तुरंत एम्बुलेंस को फोन करें और उनके आने तक बिना रुके चेस्ट कंप्रेशन (CPR) देना शुरू करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या होश में रह रहे हार्ट अटैक के मरीज को CPR दिया जा सकता है? उत्तर: बिल्कुल नहीं। अगर मरीज होश में है और सांस ले रहा है, तो इसका मतलब है कि उसका दिल काम कर रहा है। ऐसे में CPR देने से उसकी पसलियां टूट सकती हैं और उसकी स्थिति और बिगड़ सकती है।
Q2. हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है? उत्तर: हार्ट अटैक दिल की नसों में ब्लॉकेज (खून की कमी) के कारण होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल का इलेक्ट्रिकल सिस्टम अचानक बंद हो जाने से धड़कन पूरी तरह रुक जाती है।
Q3. क्या कफ सीपीआर (Cough CPR) घर पर आजमाना सुरक्षित है? उत्तर: नहीं, मेडिकल साइंस में घर या सार्वजनिक स्थानों पर कफ सीपीआर को मान्यता नहीं दी गई है। यह सिर्फ अस्पताल के नियंत्रित माहौल में डॉक्टरों द्वारा कराया जाता है। घर पर ऐसा करके समय बर्बाद न करें।
Q4. सीपीआर (CPR) देते समय छाती को कितना दबाना चाहिए? उत्तर: एक वयस्क मरीज के लिए छाती को लगभग 2 से 2.4 इंच (5 से 6 सेमी) गहराई तक और 100 से 120 कंप्रेशन प्रति मिनट की रफ्तार से दबाना चाहिए।
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