
MP Government Decision
भोपाल: मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने राज्य में प्रशासनिक कसावट लाने और जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से लागू करने के लिए कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार की प्राथमिकता वाले कामों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभागों को तय समय-सीमा के भीतर अपने लक्ष्य पूरे करने होंगे।
इस बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने सीधे ग्राउंड लेवल पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
1. युवाओं और सुरक्षा बलों के लिए बड़े फैसले: अग्निवीरों को आरक्षण
देश की सेवा कर लौटने वाले अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
अग्निवीरों को 20% कोटा: राज्य के अग्निवीरों को मध्य प्रदेश पुलिस के विशेष सशस्त्र बल (आरक्षक पद) की भर्ती में 20 प्रतिशत का सीधा आरक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को इस पर तुरंत अमल करने के निर्देश दिए हैं।
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मंदिरों में होमगार्ड्स की भर्ती: उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर प्रदेश के अन्य बड़े और प्रसिद्ध मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए होमगार्ड्स के नए पदों का सृजन किया जाएगा। इन जवानों की नियुक्ति का खर्च संबंधित मंदिर समितियां वहन करेंगी।
2. शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव: ‘सांदीपनि विद्यालय’ की होगी ग्लोबल ब्रांडिंग
प्रदेश में चल रहे ‘स्कूल चलो अभियान’ (15 जुलाई तक) की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को बड़े निर्देश दिए:
भवनों का लोकार्पण: इस अभियान के दौरान ही राज्य के महत्वाकांक्षी ‘सांदीपनि विद्यालय’ के नवनिर्मित भवनों का लोकार्पण तेजी से कराया जाए। मुख्यमंत्री ने इस पहल को राज्य का सबसे बड़ा शैक्षणिक नवाचार बताते हुए इसकी राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग करने की कार्ययोजना बनाने को कहा है।
समरसता छात्रावास: अलग-अलग विभागों द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों और विभिन्न वर्गों के छात्रावासों का युक्तियुक्तकरण (Rationalization) किया जाएगा। अब अलग-अलग हॉस्टलों को मिलाकर ‘संयुक्त छात्रावास’ बनाया जाएगा, जिन्हें ‘समरसता छात्रावास’ का नाम दिया जाएगा ताकि छात्रों में सामाजिक समरसता की भावना बढ़े।
3. भोपाल के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट: भेल की जमीन की वापसी और भोपाल गैस त्रासदी स्मारक
राजधानी भोपाल के विकास और इतिहास को सहेजने के लिए दो बेहद महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं:
यूनियन कार्बाइड की जमीन पर स्मारक: भोपाल गैस त्रासदी का दंश झेलने वाली यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (UCIL) की रासायनिक कचरे से मुक्त हो चुकी भूमि पर एक भव्य और ऐतिहासिक स्मारक बनाया जाएगा। इसके लिए एप्को (EPCO) को गुजरात के भुज में बने भूकंप मेमोरियल म्यूजियम का अध्ययन कर वैसा ही शानदार प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
BHEL से वापस ली जाएगी जमीन: भोपाल में भेल (BHEL) को दी गई जमीन में से जो हिस्सा वर्तमान में अनुपयोगी पड़ा है, उसे सरकार वापस लेगी। इसके लिए केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय से तालमेल बिठाकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
4. ग्रामीण और धार्मिक विकास: 53 हजार गांवों में मुफ्त रजिस्ट्री, तीर्थस्थलों का कायाकल्प
गांवों में मुफ्त रजिस्ट्री अभियान: ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनकी आबादी भूमि का मालिकाना हक देने के लिए प्रदेश के 53 हजार गांवों में मुफ्त रजिस्ट्री का महाअभियान चलाया जाएगा। इसके लिए हर गांव में विशेष शिविर लगाए जाएंगे और आबादी घोषित करने की प्रक्रिया को बेहद सरल किया जाएगा।
तीर्थ स्थलों पर सुविधाएं: अमरकंटक, चित्रकूट, ओंकारेश्वर, महेश्वर, दतिया, ओरछा और मैहर जैसे धार्मिक केंद्रों पर धर्मशाला, सराय, अस्पताल और अन्न क्षेत्र (लंगर) बनाने के लिए सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं को आगे लाया जाएगा। सरकार इन संस्थाओं को जमीन की रजिस्ट्री शुल्क में छूट और विशेष अनुदान देगी।
चित्रकूट और उज्जैन का विकास: चित्रकूट के विकास के लिए वन भूमि का उपयोग किया जाएगा और मंदाकिनी नदी जोड़ो परियोजना को उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा। वहीं, उज्जैन की दताना-मताना हवाई पट्टी की जगह बनने वाले नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण (धारा 11 की कार्रवाई) पूरा हो चुका है, जिसका भूमि-पूजन जल्द होगा।
5. सरकारी दफ्तरों में लेटलतीफी पर लगाम: लगेगी बायोमेट्रिक मशीनें
सरकारी कामकाज में समय की पाबंदी और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया है।
सभी शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों को सुबह 10 से शाम 6 बजे तक अनिवार्य रूप से दफ्तर में रहना होगा।
कर्मचारियों की सही समय पर उपस्थिति और रवानगी को ट्रैक करने के लिए राज्य मंत्रालय (वल्लभ भवन), सतपुड़ा भवन और विंध्याचल भवन में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जा रहा है।
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