
Himachal Pradesh Flood and Landslide
शिमला: हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक के साथ ही जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश, भूस्खलन (Landslides) और बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में इस मानसून सीजन में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, शुरुआती आकलन में प्रदेश को लगभग 16 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।
किन्नौर में तड़के आई बाढ़, बाल-बाल बचीं दो कारें
शुक्रवार तड़के करीब चार बजे किन्नौर जिले में अचानक हुई मूसलाधार बारिश ने चोलिंग क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर दी। बाढ़ के साथ आए मलबे के कारण शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पूरी तरह ठप हो गया। लगभग 30 मीटर सड़क के मलबे में तब्दील हो जाने के कारण यह हाईवे सुबह 10 बजे तक बंद रहा।
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इस घटना के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब वहां से गुजर रही दो कारें अचानक मलबे की चपेट में आने से ठीक पहले रुक गईं। इसके अलावा, रिब्बा इलाके में भी बाढ़ के कारण रिब्बा-कंडे संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है।
सामान्य से 423% अधिक बारिश, बुनियादी ढांचा ध्वस्त
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों के भीतर प्रदेश में औसतन 30.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक है। सबसे खतरनाक स्थिति किन्नौर जिले की है, जहां तीन दिन में 18.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से रिकॉर्ड 423 प्रतिशत ज्यादा है।
इस मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य का बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है:
सड़कें बंद: प्रदेश की 49 मुख्य सड़कें वर्तमान में यातायात के लिए बंद हैं।
बिजली संकट: कई इलाकों में ट्रांसफार्मर ठप होने से बिजली की सप्लाई रुक गई है।
पेयजल किल्लत: बाढ़ के कारण पानी की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
राहत और बचाव कार्य जारी: प्रशासन की टीमें युद्धस्तर पर प्रभावित जिलों से मलबा हटाने और आवश्यक सेवाओं (बिजली, पानी और सड़क कनेक्टिविटी) को बहाल करने में जुटी हुई हैं।
जून में सूखा, जुलाई में आफत: मौसम का बदला मिजाज
दिलचस्प और चिंताजनक बात यह है कि जहां जुलाई की शुरुआत आफत के साथ हुई है, वहीं इस बार का जून महीना इतिहास के सबसे सूखे महीनों में से एक रहा। मौसम विभाग के अनुसार, इस साल जून में केवल 64.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो 1901 से लेकर अब तक की 44वीं सबसे कम वर्षा है। यह सामान्य से 36 प्रतिशत कम थी। जून महीने में सबसे अधिक 115 मिलीमीटर बारिश मंडी में रिकॉर्ड की गई थी।
पिछले 24 घंटों का हाल (बारिश मिलीमीटर में):
शिमला (जुब्बड़हट्टी): 44 mm
मंडी (बलद्वाड़ा): 32 mm
सराहन: 27 mm
बिलासपुर: 26 mm
मौसम में आए इस अचानक बदलाव के कारण दिन के तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी देखी गई है। कुल्लू के भुंतर में अधिकतम तापमान में 6.2 डिग्री और मनाली में 5.5 डिग्री सेल्सियस का उछाल आया है।
12 जुलाई तक ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने चेतावनी जारी की है कि 5 जुलाई से मानसून की सक्रियता और अधिक बढ़ने वाली है। विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों के लिए 12 जुलाई तक भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।
प्रशासन की अपील: स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे नदी-नालों के पास जाने से बचें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों (Landslide Prone Areas) की यात्रा करने से परहेज करें। मौसम की ताजा जानकारी लेने के बाद ही अपनी यात्रा प्लान करें।
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