श्री महाकाल का खजाना: पहली बार सामने आई बाबा महाकाल की 472 करोड़ की FD और अरबों की संपत्ति, जानें पूरी डिटेल
UJJAIN MAHAKAL TEMPLE BANK FD DETAILS
अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाने वाले और उज्जैन की पावन धरा पर विराजमान बाबा श्री महाकालेश्वर की महिमा सचमुच निराली है। हर दिन लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने उज्जैन पहुंचते हैं। हाल ही में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बाबा महाकाल की कुल संपत्ति का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक किया गया है।
यह पहली बार है जब मंदिर समिति ने केवल चालू आय ही नहीं, बल्कि अपनी कुल वित्तीय और स्थायी संपत्तियों (Total Assets) का पूरा ब्यौरा देश के सामने रखा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, महाकाल लोक के निर्माण के बाद से मंदिर की आय और संपत्तियों में अभूतपूर्व उछाल आया है।
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बैंकों में 472 करोड़ रुपये की FD और करोड़ों की नकदी
जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत है। वर्तमान में बाबा महाकाल के नाम पर 472 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जमा है। यह बड़ी राशि बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (पूर्व में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया) में सुरक्षित रखी गई है।
इसके अलावा, मंदिर प्रबंधन के विभिन्न बैंक खातों में लगभग 16 करोड़ रुपये की नकद राशि (कैश बैलेंस) हर समय उपलब्ध रहती है, जिससे मंदिर की दैनिक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित होती हैं।
90 एकड़ बेशकीमती जमीन के मालिक हैं बाबा महाकाल
वित्तीय संपत्तियों के साथ-साथ बाबा महाकाल के नाम पर अचल संपत्ति का भी बड़ा भंडार है। मंदिर समिति के पास वर्तमान में लगभग 90 एकड़ बेशकीमती जमीन का स्वामित्व है। उज्जैन और उसके आस-पास स्थित इस जमीन की बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। हालांकि, प्रबंधन के अनुसार इनमें से कुछ जमीनों से जुड़े कानूनी मामले अभी विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं।
महाकाल लोक (Mahakal Lok) के बाद बदली मंदिर की अर्थव्यवस्था
11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘श्री महाकाल लोक’ के भव्य लोकार्पण के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन का पूरा परिदृश्य ही बदल गया है।
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श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: महाकाल लोक बनने से पहले जहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार भक्त दर्शन के लिए आते थे, वहीं अब सामान्य दिनों में भी यह आंकड़ा बढ़कर डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु प्रतिदिन तक पहुंच गया है। त्योहारों और सावन के महीने में यह संख्या कई गुना और बढ़ जाती है।
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परिसर का विस्तार: पहले महाकाल मंदिर परिसर का क्षेत्रफल महज 2.82 हेक्टेयर हुआ करता था, जो भव्य विस्तार के बाद अब 47 हेक्टेयर हो चुका है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुई 142 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय
श्रद्धालुओं की भारी आमद का सीधा असर मंदिर की सालाना कमाई पर पड़ा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) में मंदिर समिति को 142 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय हुई है।
यदि इसकी तुलना पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) से करें, तो तब यह आंकड़ा 107 करोड़ रुपये था। यानी महज एक साल में मंदिर की आय में लगभग 27 करोड़ रुपये की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस कुल आय में से अकेले 78 करोड़ रुपये केवल दान मद से प्राप्त हुए हैं, जो पिछले 6 सालों में सबसे अधिक है।
एक वर्ष में मिले दान का गणित (वर्ष 2025):
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कुल प्राप्त दान: 107 करोड़ रुपये
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दान पेटियों से आय: 43 करोड़ रुपये
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शीघ्र दर्शन टिकट और रसीदें: 64 करोड़ रुपये
लड्डू प्रसादी की बिक्री से 65 करोड़ की कमाई
बाबा महाकाल के भक्तों के बीच यहाँ की शुद्ध घी से बनी लड्डू प्रसादी बेहद लोकप्रिय है। उज्जैन आने वाला हर श्रद्धालु अपने साथ महाकाल का यह प्रसाद जरूर ले जाता है। यही वजह है कि मंदिर समिति की आय बढ़ाने में लड्डू प्रसादी भी मुख्य जरिया बनकर उभरी है। पिछले वर्ष केवल लड्डू प्रसादी की बिक्री से मंदिर को 65 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है।
सोने और चांदी के भंडार में भी भारी इजाफा
नकदी और जमीन के अलावा भक्तों ने बाबा के चरणों में दिल खोलकर सोना और चांदी भी अर्पित किया है। वर्ष 2025 के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा:
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592.36 किलोग्राम चांदी दान की गई (जो 2024 की तुलना में 193 किलो अधिक है)।
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1.48 किलोग्राम सोना दान स्वरूप अर्पित किया गया।
नोट: मंदिर समिति के पास पहले से जो भारी मात्रा में सोना और चांदी सुरक्षित रखा है, उसकी कुल मात्रा और वर्तमान बाजार मूल्य का सटीक मूल्यांकन अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
आय बढ़ी तो व्यवस्थाओं और खर्चों का भी बढ़ा दायरा
जैसे-जैसे मंदिर का क्षेत्रफल और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है, वैसे ही मंदिर को चलाने का मासिक और सालाना खर्च भी कई गुना बढ़ गया है।
वर्तमान में मंदिर समिति के अंतर्गत 306 नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारियों के वेतन, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, चौबीस घंटे रखरखाव, नए निर्माण कार्य, विशाल अन्नक्षेत्र (मुफ्त भोजन व्यवस्था), गोशाला संचालन, महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान और वर्षभर होने वाले सांस्कृतिक व धार्मिक पर्वों के प्रबंधन पर सालाना करीब 135 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
पहले जहां मंदिर का मासिक खर्च महज ढाई करोड़ रुपये हुआ करता था, वह अब बढ़कर 11 करोड़ रुपये प्रति माह से अधिक हो चुका है।


