अवंतिकापुरी में गूंजा “भोले शंभु, भोलेनाथ”: श्रावण के प्रथम सोमवार ‘मनमहेश’ रूप में नगर भ्रमण पर निकले राजाधिराज भगवान महाकाल!

महाकाल प्रथम सोमवार सवारी 2026
पवित्र श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर बाबा महाकाल की नगरी अवंतिका (उज्जैन) में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अलौकिक समागम देखने को मिला। जगदाधार भगवान श्री महाकालेश्वर अपने दिव्य ‘मनमहेश’ स्वरूप में पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हालचाल जानने और लाखों भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले।
पूरे सवारी मार्ग पर “जय श्री महाकाल” और “भोले शंभु, भोलेनाथ” के गगनभेदी जयकारों से अवंतिकापुरी की धरती और अंबर गुंजायमान हो उठे। इस ऐतिहासिक प्रथम सवारी में 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान मनमहेश के प्रत्यक्ष व डिजिटल माध्यम से दर्शन लाभ लिए।
1. सभामंडप में षोड़षोपचार पूजन और सशस्त्र पुलिस बल का ‘गार्ड ऑफ ऑनर’
सवारी निकलने से पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित भव्य सभामंडप में भगवान श्री महाकालेश्वर जी का शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा द्वारा विधिवत षोड़षोपचार पूजन-अर्चन व महाआरती संपन्न कराई गई।
पूजन में शामिल प्रमुख गणमान्य:
लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री राकेश सिंह, महिला एवं बाल विकास कैबिनेट मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष श्री रवि सोलंकी, महानिर्वाणी अखाड़े के श्री महंत विनीतगिरी जी महाराज, संभागायुक्त श्री आशीष सिंह, मंदिर समिति अध्यक्ष व कलेक्टर श्री रोशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा और प्रशासक श्री प्रथम कौशिक ने भगवान मनमहेश का पूजन-अर्चन किया।
पूजन के उपरांत जैसे ही अवंतिकानाथ की पालकी श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुँची, वहाँ तैनात सशस्त्र पुलिस बल की टुकड़ी द्वारा पालकी में विराजित भगवान श्री मनमहेश को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (सलामी) दी गई।
2. रामघाट पर 1100 वैदिक बटुकों का ऐतिहासिक ‘वेद उद्घोष’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप इस वर्ष श्रावण की प्रत्येक सवारी को एक विशेष आकर्षण और सांस्कृतिक पहचान दी गई है। प्रथम सोमवार की सवारी की मुख्य थीम “वैदिक उद्बोधन” रही।
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रामघाट पर अलौकिक दृश्य: पालकी जैसे ही महाकाल चौराहे, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होती हुई पवित्र क्षिप्रा तट (रामघाट) पहुँची, माँ क्षिप्रा के जल से भगवान मनमहेश का अभिषेक और पूजन किया गया।
1100 बटुकों का स्वर: रामघाट और दत्त अखाड़ा क्षेत्र के दोनों तटों पर एक साथ 1100 से अधिक वैदिक बटुकों (Vedic Students) ने एक स्वर में मंत्रोच्चार व वेद उद्घोष किया। संपूर्ण क्षिप्रा तट वेदमंत्रों की अलौकिक ध्वनियों से गूंज उठा।
3. रामघाट से पुनः मंदिर वापसी का मार्ग और श्रद्धालुओं का उत्साह
क्षिप्रा तट पर पूजन के पश्चात भगवान मनमहेश की पालकी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर में पहुंची।
प्रथम सवारी के मुख्य आकर्षण और व्यवस्थाएं
| सवारी का पहलू | किए गए विशेष इंतजाम व आकर्षण | श्रद्धालुओं का अनुभव |
| चलित रथ (LED Screen) | लाइव प्रसारण के लिए दो तरफा एलईडी युक्त चलित रथ। | दूर खड़े भक्तों को भी स्पष्ट व सुगम दर्शन मिले। |
| आकर्षक रंगोली | मंदिर समिति की ओर से श्री के.बी. पांड्या समूह द्वारा भव्य रंगोली। | पूरे सवारी मार्ग का सुसज्जित और मनमोहक दृश्य। |
| लवाजमा और भजन मंडलियां | घुड़सवार, तोपची (कड़ाबीन), डमरू-मंजीरा दल और सैकड़ों महिला मंडलियां। | भक्ति संगीत और डमरू वादन से गुंजायमान माहौल। |
| पुष्प वर्षा | मार्ग के दोनों ओर छतों पर खड़े भक्तों द्वारा लगातार फूल बरसाए गए। | आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व नजारा। |
4. 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
सवारी मार्ग के दोनों ओर बने होल्डिंग एरिया और सड़कों के किनारे लगभग 8 लाख से अधिक भक्तों का जनसमूह उपस्थित रहा। भक्तों के हाथों में विशाल ध्वज, सिर पर चंदन का तिलक और नेत्रों में अपने ईष्टदेव के प्रति अपार श्रद्धा देखने को मिली। सुरक्षा के लिए पुलिस बल, होमगार्ड्स और मंदिर समिति के स्वयंसेवक चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहे।
अंतिम विचार
श्रावण मास का प्रथम सोमवार उज्जैन के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज हो गया। 1100 वैदिक बटुकों के वेद घोष और भगवान मनमहेश के दिव्य नगर भ्रमण ने अवंतिका की पावन भूमि को पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है। आगामी 10 अगस्त को निकलने वाली दूसरी सवारी “विभिन्न लोक नृत्य” की थीम पर आधारित होगी, जो कला और भक्ति का एक और अनूठा समागम प्रस्तुत करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. श्रावण के प्रथम सोमवार को भगवान महाकाल किस स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले?
श्रावण के प्रथम सोमवार को भगवान श्री महाकालेश्वर अपने ‘मनमहेश’ स्वरूप में पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले।
Q2. रामघाट पर भगवान महाकाल के स्वागत में क्या विशेष आयोजन किया गया?
रामघाट पर माँ क्षिप्रा के तट पर 1100 वैदिक बटुकों द्वारा एक साथ भव्य वेद मंत्रोच्चार (वैदिक उद्घोष) के साथ भगवान महाकाल की पालकी का स्वागत और पूजन किया गया।
Q3. श्रावण मास की प्रथम सवारी में लगभग कितने श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लिए?
सम्पूर्ण सवारी मार्ग पर लगभग 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष व एलईडी स्क्रीन के माध्यम से बाबा महाकाल के दर्शन किए।
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