थांदला में ज़मीनी सादगी: मिट्टी के आँगन में गोदड़ी पर बैठकर सीएम मोहन यादव ने पत्तल में खाया ‘उड़द दाल-पानिया’, बहनों ने बांधी राखी!

थांदला में ज़मीनी सादगी
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी सादगी, आत्मीयता और ज़मीनी जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को झाबुआ जिले के थांदला प्रवास के दौरान एक ऐसा ही भावुक और अद्भुत दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव थांदला में जनजातीय समुदाय के साधारण नागरिक श्री बसंत सिंह बामनिया के घर पहुँचे और उनके परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताया।
थांदला में आयोजित प्रदेश स्तरीय स्व-सहायता समूह कार्यक्रम में शामिल होने आए मुख्यमंत्री ने वीआईपी प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए एक आम नागरिक की तरह इस जनजातीय परिवार के साथ मिट्टी और गारे से बने सादे घर के आँगन में बैठकर भोजन किया और संवाद किया।
1. गोदड़ी पर बैठकर पत्तल में लिया पारंपरिक ‘उड़द दाल-पानिया’ का स्वाद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत बामनिया परिवार ने अपनी पारंपरिक जनजातीय शैली में किया। घर के आँगन में जमीन पर बिछाई गई हाथ से बनी गोदड़ी (गूदड़ी) पर बैठकर मुख्यमंत्री ने पत्तल और दोने में परोसा गया भोजन ग्रहण किया।
पारंपरिक जनजातीय व्यंजन: परिवार की महिलाओं ने अपने हाथों से बड़े प्रेम से झाबुआ के प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन तैयार किए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से ‘उड़द की दाल और पानिया’ का स्वाद लिया। उन्होंने भोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि मिट्टी के चूल्हे पर बने इस भोजन का स्वाद और परिवार का प्रेम उनके दिल को छू गया।
इस दौरान प्रदेश के प्रभारी मंत्री श्री विजय शाह, कैबिनेट मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया और सांसद श्रीमती अनिता नागर सिंह चौहान ने भी परिवार के साथ बैठकर भोजन का आनंद लिया।
2. श्रावण मास में जनजातीय बहनों ने बांधी राखी, मुख्यमंत्री ने दिया स्नेह
आगामी रक्षाबंधन पर्व और पवित्र सावन मास के अवसर पर घर की जनजातीय और लाड़ली बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कलाई पर राखी बाँधी। बहनों ने अपने ‘भैया’ के दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना की।
बामनिया परिवार से संवाद के मुख्य बिंदु
| विषय / पहलू | मुख्यमंत्री का संवाद एवं घोषणा | परिवार की प्रतिक्रिया |
| बहनों को उपहार | मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ दीं और बहनों के सम्मान व सुरक्षा का भरोसा दिया। | बहनों ने आत्मीयता से स्वागत किया और राखी बांधी। |
| लाड़ली लक्ष्मी बेटियां | नन्हे बच्चों और लाड़ली लक्ष्मी बेटियों से प्यार से हालचाल पूछा और दुलारा। | नन्हे शिवांश और बच्चों को मुख्यमंत्री ने उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। |
| जनजातीय संस्कृति | “जनजातीय समाज की परंपराएँ और जीवन-मूल्य मध्य प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं”। | परिवार ने सरकारी योजनाओं के लाभ पर आभार जताया। |
3. पक्का मकान मिला, फिर भी मिट्टी के घर से क्यों जुड़ा है परिवार?
संवाद के दौरान गृहस्वामी श्री बसंत सिंह बामनिया ने एक बहुत ही दिलचस्प और दिल छू लेने वाली बात बताई। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के तहत सभी सुविधाओं से युक्त पक्का मकान मिल चुका है।
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पुरानी स्मृतियों से लगाव: पक्का मकान मिलने के बाद भी परिवार अपने पुराने मिट्टी-गारे वाले घर में भी समय बिताता है। बसंत जी ने कहा कि यह मिट्टी का घर केवल दीवारों का ढांचा नहीं, बल्कि उनके बुजुर्गों की पीढ़ियों पुरानी यादों और परंपराओं का प्रतीक है। मिट्टी के घर में रहने से जो प्राकृतिक ठंडक, शुद्ध वातावरण और आत्मीय सुकून मिलता है, वह उन्हें अपनों से जोड़े रखता है। उल्लेखनीय है कि बसंत जी मध्य प्रदेश सरकार की संबल योजना के भी हितग्राही हैं।
4. जनजातीय संस्कृति मध्य प्रदेश की अमूल्य धरोहर
भोजन के बाद मुख्यमंत्री ने परिवार के सदस्यों के साथ आराम से बैठकर उनकी आजीविका, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभों पर लंबी चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार राज्य के हर जनजातीय परिवार के सर्वांगीण विकास, सम्मान, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार की प्राथमिकता केवल कागज़ी योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक खुशहाली पहुँचाना है।
अंतिम विचार
जब प्रदेश का मुखिया किसी गरीब और जनजातीय परिवार के कच्चे आँगन में बैठकर गोदड़ी पर पत्तल में भोजन करता है, तो यह केवल एक औपचारिक दौरा नहीं रह जाता, बल्कि यह शासन और जनता के बीच के फासले को मिटा देता है। थांदला में बसंत सिंह बामनिया के घर पर हुई यह मुलाकात हमारी भारतीय संस्कृति, अपनों के प्रति स्नेह और जनजातीय धरोहर के प्रति सम्मान की एक अद्भुत मिसाल है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने थांदला में किसके घर भोजन किया?
मुख्यमंत्री ने झाबुआ जिले के थांदला में जनजातीय समुदाय के नागरिक श्री बसंत सिंह बामनिया के मिट्टी के घर पहुँचकर उनके परिवार के साथ भोजन किया।
Q2. मुख्यमंत्री को भोजन में कौन सा पारंपरिक जनजातीय व्यंजन परोसा गया?
उन्हें परिवार द्वारा बड़े प्रेम से बनाया गया झाबुआ का प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन ‘उड़द की दाल और पानिया’ परोसा गया, जिसकी मुख्यमंत्री ने काफी तारीफ की।
Q3. बसंत सिंह बामनिया को सरकार की किन योजनाओं का लाभ मिला है?
उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के तहत पक्का घर मिला है और वे मध्य प्रदेश शासन की ‘संबल योजना’ के भी पंजीकृत हितग्राही हैं।
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