25 जुलाई से क्यों बंद हो जाएंगे सभी मांगलिक कार्य? ज्योतिषी से जानें इसकी असली वजह
देवशयनी एकादशी से 4 महीने की योग निद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु, महादेव संभालेंगे सृष्टि का संचालन; जानें क्या है चातुर्मास का रहस्य
Chaturmas 2026
अक्सर आपने अपने घरों के बड़े-बुजुर्गों को यह कहते सुना होगा कि “अब तो देव सो गए हैं, इसलिए कुछ महीनों तक कोई शुभ काम नहीं होगा।” सनातन धर्म में इस समय को ‘चातुर्मास’ कहा जाता है।
हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी (जिसे देवशयनी एकादशी भी कहते हैं) आते ही विवाह, सगाई और मुंडन जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों के लिए भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं और इस दौरान पूरी सृष्टि को चलाने की जिम्मेदारी भगवान शिव के कंधों पर आ जाती है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान के सोने का हमारे शुभ कार्यों से क्या लेना-देना है? आखिर इन चार महीनों में शुभ काम क्यों वर्जित होते हैं? आइए, एस्ट्रोपत्री के जाने-माने ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा जी से इसके पीछे की असली वजह समझते हैं।
चातुर्मास में क्यों नहीं होते शुभ काम?
ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा बताते हैं कि इसके पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि बड़े ज्योतिषीय कारण भी छिपे हुए हैं। इन चार महीनों में सृष्टि की ‘मांगलिक ऊर्जा’ पूरी तरह शांत रहती है। इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
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आध्यात्मिक कारण: भगवान श्री हरि विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं। जब वे ही योग निद्रा में हों, तो कोई भी बड़ा उत्सव या मांगलिक कार्य उनके आशीर्वाद के बिना कैसे हो सकता है? यह समय बाहरी दिखावे या भौतिक सुख-सुविधाओं का नहीं होता। इसके बजाय, इन चार महीनों को आत्म-मंथन, ईश्वर की भक्ति, अपनी सेहत सुधारने और आध्यात्मिक ऊर्जा जुटाने के लिए सबसे अच्छा माना गया है।
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ज्योतिषीय कारण: शादी-विवाह या घर में सुख-शांति के लिए ज्योतिष शास्त्र में शुक्र और देवगुरु बृहस्पति को सबसे अहम माना गया है। लेकिन चातुर्मास के दौरान ये दोनों ही शुभ ग्रह अस्त रहते हैं। जब शुभ फल देने वाले ग्रह ही कमजोर अवस्था में हों, तो भला कोई भी मांगलिक कार्य सफल कैसे हो सकता है? इसीलिए शास्त्रों में इन चार महीनों के दौरान शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी गई है।
साल 2026 में कब से कब तक है चातुर्मास?
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, चातुर्मास हमेशा आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी से शुरू होकर कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी तक चलता है।
इस बार चातुर्मास 25 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। इसके बाद सीधे 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन जब भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से जागेंगे, तब जाकर यह समाप्त होगा और शहनाइयां बजनी शुरू होंगी।
चातुर्मास में भूलकर भी न करें ये 5 काम
चूंकि इस समय भगवान विष्णु विश्राम कर रहे होते हैं और ग्रहों की चाल भी अनुकूल नहीं होती, इसलिए कुछ खास कामों से बिल्कुल बचना चाहिए:
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विवाह संस्कार: चातुर्मास में शादियां बिल्कुल नहीं की जाती हैं, क्योंकि भगवान विष्णु के आशीर्वाद के बिना दांपत्य जीवन की शुरुआत शुभ नहीं मानी जाती।
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सगाई या रोका: शादी की ही तरह रिश्ते पक्के करना, रोका करना या सगाई (Ring Ceremony) जैसे कार्यक्रम भी इस दौरान टाल देने चाहिए।
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गृह प्रवेश: सपनों के नए घर में प्रवेश करना हो या नए मकान की नींव रखनी हो, चातुर्मास में इसे पूरी तरह से वर्जित माना गया है।
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मुंडन और जनेऊ: बच्चों के जीवन से जुड़े अहम संस्कार जैसे मुंडन या उपनयन (जनेऊ) संस्कार भी इन चार महीनों में नहीं किए जाते हैं।
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नया व्यापार: चातुर्मास के दौरान किसी भी नए बिजनेस, नई दुकान या किसी बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय सफलता मिलने में रुकावटें आ सकती हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी और मान्यताओं पर आधारित है। अवंतिका टाइम्स और अवंतिका टाइम्स न्यू मीडिया इसमें लिखी गई बातों, उपायों या ज्योतिषी की सलाह का प्रत्यक्ष रूप से समर्थन या दावा नहीं करता है। यह जानकारी विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रंथों, ज्योतिषियों और दंतकथाओं से जुटाई गई है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे अंतिम सत्य न मानें और अपने विवेक का इस्तेमाल करें। अवंतिका टाइम्स किसी भी प्रकार के अंधविश्वास के सख्त खिलाफ है।
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