‘सेफ क्लिक अभियान 2.0’ के तहत आर.डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज में साइबर पाठशाला, एसपी ने छात्रों को सिखाए डिजिटल सुरक्षा के मंत्र

Safe Click Campaign 2.0
उज्जैन। आज के डिजिटल युग में जैसे-जैसे तकनीक बढ़ रही है, वैसे-वैसे साइबर अपराधी भी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन सेफ क्लिक अभियान 2.0” के तहत जिला पुलिस उज्जैन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। बुधवार को उज्जैन के प्रतिष्ठित आर.डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज में एक विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मेडिकल के छात्र-छात्राओं को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने का पाठ पढ़ाया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उज्जैन पुलिस अधीक्षक (SP) शामिल हुए। इस अवसर पर माधव नगर सीएसपी दीपिका शिंदे, चिमनगंज मंडी थाना प्रभारी विवेक कनोडिया और प्रतीक यादव सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड से बचें: पुलिस अधीक्षक
कॉलेज के छात्र-छात्राओं, प्रोफेसरों और स्टाफ को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक ने वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आजकल ट्रेंड में चल रहे अपराधों जैसे—डिजिटल अरेस्ट, फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना, केवाईसी (KYC) अपडेट के नाम पर धोखाधड़ी, और सोशल मीडिया हैकिंग के तौर-तरीकों को विस्तार से समझाया।
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इन बातों का विशेष ध्यान रखने की दी गई सलाह:
गोपनीयता सर्वोपरि: कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), एटीएम पिन, सीवीवी (CVV) या नेट बैंकिंग का पासवर्ड शेयर न करें।
संदिग्ध लिंक्स से दूरी: बिना जांचे-परखे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही कोई रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करें।
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन: अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स (WhatsApp, Instagram, Facebook) की सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को हमेशा ऑन रखें।
साइबर ठगी होने पर क्या करें? जानें ‘गोल्डन आवर’ का महत्व
पुलिस अधीक्षक ने विद्यार्थियों को सबसे महत्वपूर्ण सीख देते हुए ‘गोल्डन आवर’ (Golden Hour) के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यदि दुर्भाग्यवश कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो घटना के तुरंत बाद का समय बेहद कीमती होता है।
पीड़ित को बिना वक्त गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन/साइबर हेल्प डेस्क को सूचित करना चाहिए। यदि समय रहते (गोल्डन आवर के भीतर) शिकायत दर्ज हो जाती है, तो पुलिस और बैंक के पास ठगी गई राशि को फ्रीज या होल्ड कराने के चांसेस बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं।
सवाल-जवाब का दौर और जागरूकता का संकल्प
कार्यक्रम के अंतिम चरण में मेडिकल छात्रों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कई प्रैक्टिकल सवाल पूछे, जिनका उपस्थित पुलिस अधिकारियों ने बेहद सरल भाषा में समाधान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों और कॉलेज स्टाफ ने खुद सतर्क रहने के साथ-साथ अपने परिवार, दोस्तों और समाज को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
उज्जैन पुलिस की आमजन से अपील:
सतर्कता और जागरूकता ही साइबर क्राइम से बचने का सबसे अचूक हथियार है। किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि या ठगी के प्रयास की स्थिति में घबराएं नहीं, तुरंत 1930 डायल करें।
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