
शाजापुर। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के दावों के बीच शाजापुर के एक सरकारी स्कूल से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के प्रतिष्ठित सीएम राइज सांदीपनि स्कूल में एक मासूम बच्चे के साथ गंभीर हादसा होने के बाद भी स्कूल प्रबंधन का अमानवीय चेहरा देखने को मिला। हाथ में गंभीर फ्रैक्चर होने के बावजूद बच्चे को घंटों तक प्राथमिक उपचार तक नसीब नहीं हुआ। आखिरकार जिला प्रशासन और स्थानीय मीडिया के हस्तक्षेप के बाद बच्चे को अस्पताल पहुंचाया जा सका।
गेट पर रोता रहा बच्चा, स्टाफ बोला- ‘प्रिंसिपल की अनुमति जरूरी’
घटनाक्रम के अनुसार, कबूलपुर के सरपंच चेतन ठाकुर अपनी बेटी के किसी काम से स्कूल परिसर पहुंचे थे। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही वे मुख्य गेट के अंदर दाखिल हुए, उन्हें एक छोटा बच्चा दर्द से बुरी तरह कराहते और रोते हुए मिला। बताया जा रहा है कि स्कूल की एक महिला भृत्य (चपरासी) उस घायल बच्चे को तड़पता हुआ गेट पर ही छोड़कर चली गई थी।
बच्चे का हाथ देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता था कि उसका हाथ पूरी तरह टूट चुका है। वह रोते हुए लगातार गुहार लगा रहा था, “प्लीज, मेरे मम्मी-पापा को फोन लगा दो।”
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वहां मौजूद लोगों ने जब बच्चे की हालत देखकर उसे तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की, तो स्कूल स्टाफ के रवैये ने सबको हैरान कर दिया। स्टाफ के सदस्यों ने यह कहकर उन्हें रोक दिया कि जब तक प्रिंसिपल मैडम अनुमति नहीं देंगी, बच्चे को स्कूल से बाहर नहीं ले जाया जा सकता।
15 मिनट तक गायब रहीं प्रिंसिपल, तमाशबीन बना रहा स्टाफ
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि इस आपातकालीन स्थिति में भी लगभग 15 मिनट तक प्रिंसिपल की तलाश की जाती रही, लेकिन वे अपने केबिन या मौके पर मौजूद नहीं थीं। हैरान करने वाली बात यह रही कि स्कूल का कोई भी दूसरा शिक्षक या स्टाफ सदस्य उस तड़पते हुए बच्चे को संभालने या उसे ढांढस बंधाने तक नहीं आया। नियमों की दुहाई देकर एक गंभीर रूप से घायल बच्चे को इलाज के लिए रोकने पर वहां मौजूद लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।
प्रशासन और मीडिया के पहुंचते ही जागा स्कूल प्रबंधन
मामला बिगड़ता देख और स्कूल स्टाफ की संवेदनहीनता को भांपते हुए मौके पर मौजूद नागरिकों ने सीधे जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को फोन पर मामले की जानकारी दी।
सूचना मिलते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और स्थानीय मीडियाकर्मी तुरंत सीएम राइज स्कूल पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों और मीडिया के कैमरे सामने देखकर स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। इसके बाद आनन-फानन में प्रिंसिपल सामने आईं और मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्चे को तुरंत जिला अस्पताल भिजवाने की व्यवस्था की गई।
सुरक्षा और जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल
इस पूरी घटना ने सीएम राइज जैसे दावों वाले स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है।
क्या किसी बच्चे की जान से ज्यादा जरूरी कागजी औपचारिकताएं और अनुमति हैं?
अगर समय पर इलाज न मिलने से बच्चे की स्थिति और गंभीर हो जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता?
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने इस घोर लापरवाही पर कड़ा विरोध जताया है। लोगों ने जिला कलेक्टर और शिक्षा विभाग से मांग की है कि ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने वाले दोषी स्टाफ और संबंधित प्रिंसिपल के खिलाफ तत्काल निष्पक्ष जांच कर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मासूम के जीवन के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो सके।
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