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खेत से कारखाने और कारखाने से बाजार तक: मध्य प्रदेश में कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देंगे सीएम डॉ. मोहन यादव

Balram Krishi Mahotsav Madhya Pradesh

मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2026 को पूरी तरह से ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में समर्पित कर दिया है। इंदौर में राज्य स्तरीय ‘बलराम कृषि महोत्सव’ का भव्य शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सूबे के किसानों की तकदीर और तस्वीर बदलने के लिए एक व्यापक रोडमैप पेश किया है।

यह महोत्सव महज एक सरकारी आयोजन नहीं है, बल्कि आगामी 13 नवंबर 2026 तक प्रदेश के सभी 55 जिलों में चलने वाला एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन है। इस महाअभियान में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और एमएसएमई (MSME) समेत कुल 16 विभागों को एक मंच पर लाया गया है ताकि किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को धरातल पर उतारा जा सके।

“हमारा संकल्प खेती को सिर्फ अनाज उगाने तक सीमित रखना नहीं है। हम मध्य प्रदेश में ‘खेत से कारखाने और कारखाने से बाजार’ तक की एक मजबूत और आत्मनिर्भर कृषि अर्थव्यवस्था (Agri-Economy) का निर्माण कर रहे हैं।”

डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बड़ी और ऐतिहासिक घोषणाएं

इंदौर के इस राज्य स्तरीय मंच से मुख्यमंत्री ने किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण युवाओं के हित में कई क्रांतिकारी घोषणाएं कीं:

  • दिन में मिलेगी कृषि बिजली: किसानों को रात के अंधेरे में खेतों में पानी देने के संकट से मुक्ति मिलेगी। अब सरकार उन्हें दिन के समय कृषि बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू कर रही है, जिससे हादसों में कमी आएगी।

  • डेयरी उद्योग पर ₹10 लाख का अनुदान: दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹40 लाख तक की डेयरी इकाई स्थापित करने पर सरकार की तरफ से ₹10 लाख की भारी सब्सिडी (अनुदान) दी जाएगी।

  • नीलगाय और वन्य पशुओं पर ‘हेलिकॉप्टर’ से नजर: फसलों को बर्बाद करने वाली नीलगायों और अन्य जंगली जानवरों के प्रबंधन के लिए एक अनोखी योजना बनेगी, जिसमें जरूरत पड़ने पर हेलिकॉप्टर तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

  • लोन रिन्यूअल में बड़ी राहत: शून्य प्रतिशत ब्याज पर मिलने वाले कृषि ऋण को अब हर 6 महीने में रिन्यू कराने की झंझट खत्म होगी। जून में लिया गया कर्ज अगले साल जून में ही चुकाना होगा।

  • इंदौर को मिलेगी आधुनिक मंडी: इंदौर की मौजूदा कृषि उपज मंडी को स्थानांतरित कर वहां एक विश्वस्तरीय और विशाल आधुनिक मंडी बनाई जाएगी। साथ ही इस परिसर में देवी अहिल्याबाई होलकर की भव्य प्रतिमा स्थापित होगी और प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास दिया जाएगा।

  • गौशालाओं को मदद: निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए गौशाला संचालकों को प्रति गाय ₹40 प्रतिदिन का अनुदान जारी रहेगा।

कृषि आधारित उद्योगों का महाजाल: ‘फार्म टू फॉरेन मार्केट’

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश अब केवल कच्चा माल बेचने वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि यहाँ बड़े पैमाने पर फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) इकाइयां लगाई जा रही हैं।

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प्रमुख औद्योगिक पहल:

  1. उज्जैन का पोटैटो प्रोसेसिंग प्लांट: उज्जैन में ₹1250 करोड़ की लागत से स्थापित आलू प्रसंस्करण इकाई प्रदेश के 32 जिलों से सीधे आलू खरीदेगी, जिससे आलू उत्पादक किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से मुक्ति मिलेगी।

  2. धार का पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क: कपास उत्पादक किसानों को सीधा लाभ देने के लिए धार जिले में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क बनाया जा रहा है। यहाँ कपास से लेकर धागा, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट तक की पूरी चेन एक ही जगह विकसित होगी।

नदी जोड़ो परियोजनाएं: बदल जाएगा 13 जिलों का जल इतिहास

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर बात करते हुए सीएम ने बताया कि वर्ष 1956 से 2003 तक राज्य में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा दिया है।

अब लगभग ₹1 लाख करोड़ की लागत से दो बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाएं शुरू हो रही हैं:

  • केन-बेतवा लिंक परियोजना

  • पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजना

इन योजनाओं से मालवा और पश्चिमी मध्य प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, नीमच और मंदसौर सहित कुल 13 जिलों को सिंचाई और शुद्ध पेयजल का सीधा लाभ मिलेगा।

आंकड़ों में मध्य प्रदेश की कृषि शक्ति

मध्य प्रदेश आज देश के कृषि मानचित्र पर एक अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। राज्य की कुल जीडीपी (GDP) में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 43 प्रतिशत है।

कृषि उत्पाद देश में मध्य प्रदेश का स्थान
कुल खाद्यान्न उत्पादन देश में दूसरा (2nd) स्थान
फूलों की खेती (Floriculture) देश में दूसरा (2nd) स्थान
कुल दुग्ध उत्पादन देश में 12% योगदान (लक्ष्य 20% का है)
अग्रणी उत्पादन सोयाबीन, गेहूं, मोटे अनाज (मिलेट्स), लहसुन, धनिया और संतरा

एक ही मंच पर समाधान: क्या है बलराम कृषि महोत्सव?

इस महोत्सव के तहत राज्य के सभी 55 जिलों में प्रदर्शनियां लगाई जा रही हैं। यहाँ किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और स्मार्ट फार्मिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • ड्रोन तकनीक का उपयोग कर कीटनाशकों का छिड़काव।

  • प्राकृतिक और जैविक खेती (Organic Farming) के गुर।

  • कस्टम हायरिंग सेंटर्स के जरिए आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता।

  • मत्स्य पालन, बागवानी और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए जोखिम मुक्त कमाई।

निष्कर्ष: कार्यक्रम में नगरीय विकास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने भी सरकार की जीरो परसेंट ब्याज योजना और किसान सम्मान निधि (जिसके तहत किसानों को कुल ₹12,000 सालाना मिल रहे हैं) की सराहना की। ‘बलराम कृषि महोत्सव’ के जरिए मध्य प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि वह देश के विकास के केंद्र में ‘किसान’ को रखकर एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत कर चुकी है।

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