51 Shakti Peeth: माता सती के अंग जहां-जहां गिरे, वहां बने शक्तिपीठ, जानिए पूरी सूची
क्या आपने कभी सोचा है कि भारत और उसके आसपास के देशों में फैले शक्तिपीठ आखिर इतने पवित्र क्यों माने जाते हैं?

51 Shakti Peeth List
हिंदू धार्मिक परंपरा में शक्तिपीठों का संबंध माता सती और भगवान शिव की उस कथा से जोड़ा जाता है, जिसमें देवी सती के शरीर के अलग-अलग अंग पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर गिरे थे।
मान्यता के अनुसार जहां-जहां माता सती के अंग या आभूषण गिरे, वे स्थान आगे चलकर शक्ति उपासना के प्रमुख केंद्र बन गए।
लेकिन यहां एक दिलचस्प बात है। अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में शक्तिपीठों की संख्या एक जैसी नहीं बताई गई है। आपके दिए स्रोत के अनुसार देवी भागवत पुराण में 108, देवी गीता में 72 और देवी पुराण में 51 प्रमुख शक्तिपीठों का उल्लेख मिलता है।
आज हम उन्हीं 51 शक्तिपीठों की परंपरागत सूची को समझेंगे और जानेंगे कि किस शक्तिपीठ का संबंध माता सती के किस अंग से माना जाता है।
शक्तिपीठ बनने की कहानी क्या है?
कथा के अनुसार माता सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था। लेकिन उनके पिता राजा दक्ष भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे।
एक बार राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने भगवान शिव और माता सती को आमंत्रित नहीं किया।
माता सती अपने पिता के यज्ञ में पहुंचीं। वहां भगवान शिव का अपमान देखकर वे बेहद दुखी हुईं और यज्ञ अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया।
जब भगवान शिव को यह पता चला तो वे माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर विचरण करने लगे। उनके इस रौद्र रूप से पूरी सृष्टि के संतुलन पर संकट आने लगा।
तब भगवान विष्णु ने सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए सुदर्शन चक्र का प्रयोग किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सती के शरीर के अलग-अलग हिस्से पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर गिरे और वे स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुए।
यह कथा हिंदू धार्मिक परंपरा में शक्ति उपासना की आधारभूत कथाओं में से एक मानी जाती है।
51 शक्तिपीठों की पूरी सूची
1. हिंगलाज शक्तिपीठ
हिंगलाज शक्तिपीठ वर्तमान पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में हिंगोल नदी के आसपास स्थित माना जाता है।
मान्यता है कि यहां माता सती के सिर का ऊपरी भाग गिरा था। यहां माता हिंगलाज भवानी के रूप में पूजी जाती हैं।
यह शक्तिपीठ भारत के बाहर स्थित प्रमुख शक्ति उपासना स्थलों में गिना जाता है।
2. शर्कर शक्तिपीठ
शर्कर शक्तिपीठ को पाकिस्तान के क्षेत्र से जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि यहां माता सती की एक आंख गिरी थी और देवी को महेशमर्दिनी के रूप में पूजा जाता है।
3. सुगंध शक्तिपीठ
यह शक्तिपीठ वर्तमान बांग्लादेश में शिकारपुर क्षेत्र के पास माना जाता है।
मान्यता के अनुसार यहां माता सती की नाक गिरी थी और देवी सुनंदा के रूप में पूजी जाती हैं।
4. अमरनाथ शक्तिपीठ
जम्मू-कश्मीर के अमरनाथ क्षेत्र से जुड़े इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का गाल गिरा था।
यह क्षेत्र भगवान शिव की प्रसिद्ध अमरनाथ गुफा के कारण भी बेहद महत्वपूर्ण है।
5. ज्वाला देवी शक्तिपीठ
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में स्थित ज्वाला देवी मंदिर अपनी प्राकृतिक ज्वालाओं के लिए प्रसिद्ध है।
मान्यता है कि यहां माता सती की जीभ गिरी थी। यहां देवी को शक्ति के विभिन्न स्वरूपों में पूजा जाता है।
6. जालंधर शक्तिपीठ
पंजाब के जालंधर से जुड़ा यह शक्तिपीठ भी शक्ति उपासना के महत्वपूर्ण स्थलों में माना जाता है।
मान्यता के अनुसार यहां माता सती का बायां वक्ष स्थल गिरा था और देवी त्रिपुरमालिनी के रूप में पूजी जाती हैं।
7. अंबाजी शक्तिपीठ
गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित अंबाजी मंदिर देश के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में शामिल है।
मान्यता है कि गब्बर पर्वत पर माता सती का हृदय गिरा था। यहां देवी की पूजा विशेष रूप से श्री यंत्र के रूप में की जाती है।
8. गुह्येश्वरी शक्तिपीठ
नेपाल की राजधानी काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर के आसपास स्थित गुह्येश्वरी मंदिर को शक्तिपीठ की परंपरा से जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि यहां माता सती के दोनों घुटने गिरे थे।
9. मानसरोवर शक्तिपीठ
कैलाश पर्वत और मानसरोवर क्षेत्र को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है।
परंपरा के अनुसार यहां माता सती का दायां हाथ गिरा था।
10. उत्कल शक्तिपीठ
उड़ीसा के पुरी क्षेत्र से जुड़े उत्कल शक्तिपीठ को विरजा या विमला परंपरा से जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि यहां माता सती की नाभि गिरी थी। पुरी के जगन्नाथ मंदिर में मां विमला का विशेष धार्मिक महत्व है।
11. कंडिका शक्तिपीठ
नेपाल के क्षेत्र में स्थित इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का मस्तिष्क गिरा था।
देवी को कंडिका चंडी के रूप में पूजा जाता है।
12. बहुला शक्तिपीठ
पश्चिम बंगाल के केतुग्राम क्षेत्र में स्थित बहुला शक्तिपीठ को माता सती के बाएं हाथ से जोड़ा जाता है।
यहां देवी बहुला के रूप में पूजी जाती हैं।
13. उज्जयिनी शक्तिपीठ
पश्चिम बंगाल के वर्धमान क्षेत्र से जुड़े इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती की दाईं कलाई गिरी थी।
यहां देवी को चंद्रिका के रूप में पूजा जाता है।
14. त्रिपुरा सुंदरी शक्तिपीठ
त्रिपुरा राज्य में स्थित त्रिपुरा सुंदरी मंदिर शक्ति उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र है।
मान्यता है कि यहां माता सती का दायां चरण गिरा था।
15. चट्टल शक्तिपीठ
बांग्लादेश के चटगांव क्षेत्र से जुड़े इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती की दाहिनी भुजा गिरी थी।
यहां देवी भवानी के रूप में पूजा की जाती है।
16. त्रिस्तोता शक्तिपीठ
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी क्षेत्र में तीस्ता नदी के आसपास स्थित माना जाने वाला यह शक्तिपीठ माता सती के बाएं चरण से जुड़ा है।
यहां देवी ब्रह्माणी के रूप में पूजी जाती हैं।
17. कामाख्या शक्तिपीठ
असम के गुवाहाटी में नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध शक्ति उपासना केंद्रों में से एक है।
मान्यता है कि यहां माता सती की योनि गिरी थी।
कामाख्या मंदिर अपने अंबुबाची मेले के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इस दौरान मंदिर के गर्भगृह के कपाट कुछ समय के लिए बंद रहते हैं।
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18. युगाद्या शक्तिपीठ
पश्चिम बंगाल के वर्धमान क्षेत्र से जुड़े युगाद्या शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था।
यहां देवी जोगाद्या के रूप में पूजी जाती हैं।
19. कालीघाट शक्तिपीठ
कोलकाता का कालीघाट मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध काली मंदिरों में से एक है।
मान्यता है कि यहां माता सती की उंगलियां गिरी थीं। यहां मां कालिका की पूजा होती है।
20. प्रयाग शक्तिपीठ
प्रयागराज का यह शक्तिपीठ पवित्र त्रिवेणी संगम के कारण विशेष महत्व रखता है।
मान्यता है कि यहां माता सती की हाथ की उंगलियां गिरी थीं और देवी ललिता के रूप में पूजा होती है।
21. जयंती शक्तिपीठ
मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों से जुड़े इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती की बाईं जांघ गिरी थी।
यहां देवी जयंती के रूप में पूजी जाती हैं।
22. किरीट शक्तिपीठ
पश्चिम बंगाल में स्थित किरीट शक्तिपीठ को माता सती के मुकुट से जोड़ा जाता है।
23. मणिकर्णिका शक्तिपीठ
वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट को भी शक्तिपीठ परंपरा से जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि यहां माता सती के आभूषण गिरे थे।
24. कन्याकुमारी शक्तिपीठ
तमिलनाडु के कन्याकुमारी क्षेत्र से जुड़े इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती की पीठ गिरी थी।
25. कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ
हरियाणा के कुरुक्षेत्र को भी शक्तिपीठ परंपरा में स्थान दिया गया है।
मान्यता के अनुसार यहां माता सती की कमर गिरी थी।
26. मणिवेदिका शक्तिपीठ
राजस्थान के पुष्कर से जुड़े मणिवेदिका शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती की दोनों कलाइयां गिरी थीं।
27. श्रीशैल शक्तिपीठ
आंध्र प्रदेश के श्रीशैल क्षेत्र को भी शक्ति उपासना की परंपरा में महत्वपूर्ण माना गया है।
मान्यता के अनुसार यहां माता सती की गर्दन गिरी थी।
28. कांची शक्तिपीठ
तमिलनाडु के कांची क्षेत्र से जुड़े इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का संपूर्ण कंकाल गिरा था।
29. काल माधव शक्तिपीठ
काल माधव शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का वाम नितंब गिरा था।
30. सौराष्ट्र शक्तिपीठ
मध्य प्रदेश से जुड़े सौराष्ट्र शक्तिपीठ के बारे में स्रोत में माता सती के एक अंग के गिरने की मान्यता बताई गई है।
31. रामगिरी शक्तिपीठ
रामगिरी शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का दायां स्तन गिरा था।
32. कात्यायनी शक्तिपीठ
वृंदावन में स्थित कात्यायनी मंदिर को शक्तिपीठ परंपरा से जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि यहां माता सती के केश गिरे थे।
33. सुचिंद्रम शक्तिपीठ
तमिलनाडु के सुचिंद्रम क्षेत्र से जुड़े इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का पृष्ठ भाग गिरा था।
34. पंचसागर शक्तिपीठ
पंचसागर शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती के दांत गिरे थे।
35. करतोया घाट शक्तिपीठ
बांग्लादेश से जुड़े करतोया घाट शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती के शरीर का एक विशेष भाग गिरा था।
36. श्रीशैल शक्तिपीठ
श्रीशैल से जुड़ी एक अन्य शक्तिपीठ परंपरा में माता सती के गाल गिरने की मान्यता बताई गई है।
37. विभाष शक्तिपीठ
पश्चिम बंगाल में स्थित माने जाने वाले विभाष शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती के टखने गिरे थे।
38. चंद्रभागा शक्तिपीठ
गुजरात के चंद्रभागा क्षेत्र से जुड़े इस शक्तिपीठ के बारे में माता सती के उदर से संबंधित मान्यता मिलती है।
39. भैरव पर्वत शक्तिपीठ
भैरव पर्वत शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का ऊपरी होंठ गिरा था।
40. जनस्थान शक्तिपीठ
महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में स्थित माने जाने वाले जनस्थान शक्तिपीठ को माता सती की ठोड़ी से जोड़ा जाता है।
41. गोदावरी तट शक्तिपीठ
गोदावरी नदी के तट से जुड़े इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का गाल गिरा था।
42. विराट अंबिका शक्तिपीठ
राजस्थान के जयपुर क्षेत्र से जुड़े विराट अंबिका शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती के दाहिने पैर की उंगलियां गिरी थीं।
43. मिथिला शक्तिपीठ
नेपाल के जनकपुर क्षेत्र से जुड़े मिथिला शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का बायां कंधा गिरा था।
44. रत्नावली शक्तिपीठ
तमिलनाडु के चेन्नई क्षेत्र से जुड़े रत्नावली शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का दायां कंधा गिरा था।
45. नलहाटी शक्तिपीठ
पश्चिम बंगाल के नलहाटी क्षेत्र से जुड़े इस शक्तिपीठ को माता सती की गर्भनाल से संबंधित माना जाता है।
46. वैद्यनाथ शक्तिपीठ
झारखंड के देवघर क्षेत्र में स्थित वैद्यनाथ धाम भगवान शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में भी प्रसिद्ध है।
शक्तिपीठ परंपरा में इसे माता सती की कथा से जोड़ा जाता है।
47. वक्रेश्वर शक्तिपीठ
पश्चिम बंगाल के वक्रेश्वर क्षेत्र को भी शक्तिपीठ परंपरा में स्थान दिया गया है।
मान्यता है कि यहां माता सती का मस्तिष्क गिरा था।
48. यशोरेश्वरी शक्तिपीठ
बांग्लादेश में स्थित यशोरेश्वरी शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती की बाईं हथेली गिरी थी।
49. कुलरा शक्तिपीठ
पश्चिम बंगाल से जुड़े कुलरा शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का निचला होंठ गिरा था।
50. नंदीपुर शक्तिपीठ
नंदीपुर शक्तिपीठ भी पश्चिम बंगाल से जुड़ा माना जाता है।
मान्यता के अनुसार यहां माता सती का कंठहार गिरा था।
51. इंद्राक्षी शक्तिपीठ
51वें शक्तिपीठ के रूप में श्रीलंका के लंका क्षेत्र से जुड़े इंद्राक्षी शक्तिपीठ का उल्लेख किया जाता है।
मान्यता है कि यहां माता सती की पायल गिरी थी।
शक्तिपीठों का धार्मिक महत्व क्या है?
शक्तिपीठ सिर्फ मंदिर या तीर्थस्थल नहीं माने जाते। इनके पीछे शक्ति और शिव के संबंध से जुड़ी एक गहरी धार्मिक परंपरा है।
माता सती की कथा में प्रेम, त्याग, अपमान, क्रोध और शक्ति—इन सभी भावों को एक साथ देखा जाता है।
इसी वजह से शक्ति उपासक इन स्थानों को बेहद पवित्र मानते हैं और अलग-अलग शक्तिपीठों में देवी के अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं।
क्या सभी शक्तिपीठों की सूची एक जैसी है?
नहीं। यही बात शक्तिपीठों को समझते समय ध्यान रखना जरूरी है। अलग-अलग ग्रंथों, क्षेत्रों और धार्मिक परंपराओं में शक्तिपीठों की संख्या, नाम, स्थान और माता सती के अंगों को लेकर अंतर मिलता है।
इसलिए इंटरनेट पर मिलने वाली हर “51 शक्तिपीठों की सूची” को अंतिम और एकमात्र प्रमाणित सूची मानना सही नहीं होगा।
आपके दिए स्रोत में 51 शक्तिपीठों की जिस परंपरा का उल्लेख है, ऊपर उसी को आधार बनाकर लेख तैयार किया गया है।
अंतिम विचार
शक्तिपीठों की कहानी सिर्फ 51 मंदिरों की सूची नहीं है। यह माता सती, भगवान शिव और देवी शक्ति से जुड़ी उस धार्मिक परंपरा की कहानी है, जिसने भारत और उसके आसपास के कई क्षेत्रों को तीर्थ परंपरा से जोड़ा।
इन स्थानों से जुड़ी कथाओं में कहीं इतिहास दिखाई देता है, कहीं पुराणों की मान्यता और कहीं स्थानीय लोकविश्वास।
इसलिए इन शक्तिपीठों को समझने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आस्था का सम्मान करते हुए इतिहास और धार्मिक मान्यता के बीच अंतर को भी समझा जाए।
अगर आपने इनमें से किसी शक्तिपीठ के दर्शन किए हैं, तो आपके लिए उस स्थान की सबसे खास बात क्या रही—मंदिर, वातावरण, देवी का स्वरूप या वहां की कोई पुरानी मान्यता?
जय माता दी।
FAQs
1. कुल कितने शक्तिपीठ हैं?
अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में संख्या अलग मिलती है। 51 शक्तिपीठों की सूची सबसे अधिक प्रचलित सूचियों में से एक है, जबकि कुछ ग्रंथों में 52, 64, 72 या 108 तक का उल्लेख मिलता है।
2. शक्तिपीठ क्यों बनाए गए?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अलग-अलग अंग पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर गिरे। इन्हीं स्थानों को बाद में शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाने लगा।
3. भारत में कितने शक्तिपीठ हैं?
यह संख्या चुनी गई परंपरा और सूची पर निर्भर करती है। अलग-अलग स्रोतों में स्थानों और संख्या को लेकर अंतर मिलता है, इसलिए किसी एक संख्या को सभी परंपराओं पर लागू करना उचित नहीं है।
4. सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ कौन से हैं?
कामाख्या, कालीघाट, ज्वाला देवी, हिंगलाज, अंबाजी और त्रिपुरा सुंदरी जैसे शक्तिपीठ सबसे अधिक प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में गिने जाते हैं।
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