बाबा महाकाल की नगरी में ‘श्रावण महोत्सव 2026’ का दिव्य आगाज: सुर, लय और कथक नृत्य की त्रिवेणी में शिवमय हुई पहली संध्या!

Ujjain Mahakal Shravan Mahotsav 2026
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में आयोजित 21वें अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव 2026 (“शिव अर्धांग”) का शनिवार (1 अगस्त 2026) को भव्य एवं गरिमामय शुभारंभ हुआ। महोत्सव की पहली ही संध्या शास्त्रीय गायन, तबला-पखावज की सुमधुर जुगलबंदी और पद्म श्री डॉ. पुरु दाधीच के अलौकिक समूह कथक नृत्य-नाटिका से पूरी तरह ‘शिवमयी’ हो गई।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर आचार्य शेखर जी महाराज, कालिदास संस्कृत अकादमी के महानिदेशक श्री गोविंद गंधे जी और संस्कार भारती के अखिल भारतीय सह कोष प्रमुख श्रीपाद जोशी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं वैदिक बटुकों के स्वस्ति वाचन से हुई।
1. पहली प्रस्तुति: गाजियाबाद के कलाकारों का भावपूर्ण शास्त्रीय गायन
श्रावण महोत्सव की प्रथम संध्या का संगीतमय प्रारंभ गाजियाबाद से पधारे श्रीमती रिंधाना रहस्या एवं श्री अविनाश कुमार के युगल शास्त्रीय गायन से हुआ।
प्रस्तुतियों का क्रम:
शुरुआत: रूपक ताल में ‘है भोलेनाथ कृपाल दयाल शंभू त्रिपुरारी’ की दिव्य वंदना से भजन प्रस्तुत किया गया।
मध्य भाग: द्रुत एक ताल में राग कलावती पर आधारित ‘तन मन धन तोपे वारू’ की रसमयी प्रस्तुति दी गई।
समापन: कहारवा ताल में प्रसिद्ध पद ‘हरि म्हणा तुम्ही गोविंद म्हणा गोपाल म्हणा हरिनारायणा’ गाकर श्रोताओं को भक्ति-रस से सराबोर कर दिया।
सहयोगी कलाकार: तबले पर श्री अनुप पंवार व श्री उजित उदय कुमार, हारमोनियम पर श्री विवेक जैन, तानपुरा पर श्री विशाल काले व सुश्री हाइन्दवी, तथा मंजीरा पर श्री आशीष सेन ने उत्कृष्ट संगत दी।
2. दूसरी प्रस्तुति: ‘नादयुग्मि’ तबला और पखावज की अद्भुत जुगलबंदी
महोत्सव की दूसरी प्रस्तुति वेस्ट बंगाल के श्री निशांत सिंह एवं श्री देबव्रत गुप्ता का युगल तबला-पखावज वादन रही। इस विशेष प्रस्तुति को ‘नादयुग्मि’ नाम दिया गया।
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इस अनूठी जुगलबंदी में एक तरफ तबले पर ‘पूरब बाज’ घराने की बारीकियां देखने को मिलीं, वहीं दूसरी तरफ पखावज पर ‘लाला केवल किशन’ घराने की भव्यता अभिव्यक्त हुई। दोनों ताल-वाद्यों की जुगलबंदी और ध्वनियों के अद्भुत संतुलन ने प्रेक्षागृह में मौजूद सभी संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इनके साथ हारमोनियम पर श्री कुलदीप दुबे ने संगत की।
3. अंतिम प्रस्तुति: इंदौर के पद्म श्री डॉ. पुरु दाधीच की भव्य कथक नृत्य-नाटिका
प्रथम संध्या का सबसे बड़ा आकर्षण और समापन इंदौर के प्रसिद्ध नृत्य गुरु पद्म श्री डॉ. पुरु दाधीच के निर्देशन में प्रस्तुत ‘समूह कथक नृत्य-नाटिका’ रही।
‘वंदे महाकाल महासुरेशम्’ की मुख्य विशेषताएं
पुरु दाधीच शैली की इस मनोहारी प्रस्तुति ने मंच पर जैसे साक्षात भगवान शिव और शक्ति के अर्धनारीश्वर रूप को जीवंत कर दिया।
4. अतिथियों का सम्मान और मंच संचालन
दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के उप प्रशासक श्री एस.एन. सोनी एवं जनसंपर्क अधिकारी/सहायक प्रशासक श्री आशीष फलवाडिया ने मुख्य अतिथियों को दुपट्टा, प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद प्रस्तुति देने आए सभी देशव्यापी कलाकारों और उनके सहयोगी सहयोगियों को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। पूरे कार्यक्रम का कुशल और सुव्यवस्थित मंच संचालन श्रीमती पदमजा रघुवंशी ने किया।
5. 08 अगस्त 2026 (अगली संध्या) की मुख्य प्रस्तुतियां
मंदिर समिति के अनुसार, श्रावण महोत्सव की आगामी दूसरी संध्या शनिवार, 08 अगस्त 2026 को आयोजित की जाएगी। इसमें निम्नलिखित कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे:
कानपुर: पं. विनोद कुमार द्विवेदी का एकल शास्त्रीय गायन।
इन्दौर: सुश्री चित्रांगना आंगले का समूह पखावज वादन।
बड़ौदा: सुश्री अरनी भक्त का समूह भरतनाट्यम नृत्य।
मंदसौर: श्रीमती दिव्या शर्मा का एकल शास्त्रीय गायन।
अंतिम विचार
उज्जैन का अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह बाबा महाकाल के चरणों में भारत की महान शास्त्रीय संगीत और नृत्य परंपरा का दिव्य समर्पण है। प्रथम संध्या में जिस तरह शास्त्रीय गायन, तबला-पखावज के नाद और कथक के भावों ने समां बाधा, उसने पूरे अवंतिका क्षेत्र को शिवभक्ति के आनंद में सराबोर कर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. 21वें अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव 2026 का विषय क्या है?
21वें अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव 2026 का मुख्य विषय “शिव अर्धांग” है।
Q2. महोत्सव की पहली संध्या में मुख्य आकर्षण क्या रहा?
प्रथम संध्या का मुख्य आकर्षण गाजियाबाद के कलाकारों का शास्त्रीय गायन, तबला-पखावज की ‘नादयुग्मि’ जुगलबंदी और पद्म श्री डॉ. पुरु दाधीच द्वारा निर्देशित भव्य कथक नृत्य-नाटिका ‘वंदे महाकाल महासुरेशम्’ रही।
Q3. श्रावण महोत्सव की अगली सांस्कृतिक संध्या कब आयोजित होगी?
श्रावण महोत्सव की अगली सांस्कृतिक संध्या 08 अगस्त 2026 को आयोजित होगी, जिसमें कानपुर, इंदौर, बड़ौदा और मंदसौर के कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।
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