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महाकाल की नगरी में दुर्लभ महासंयोग: 17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार, नागपंचमी और महाकाल की सवारी एक साथ

Nagpanchami Ujjain

अवंतिका नगरी उज्जैन इस बार सावन के पावन महीने में एक ऐतिहासिक, दिव्य और दुर्लभ धार्मिक महासंयोग की साक्षी बनने जा रही है। 17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार, नागपंचमी पर्व और भगवान महाकाल की भव्य तीसरी शाही सवारी—ये तीनों बड़े धार्मिक अवसर एक ही दिन पड़ रहे हैं।

इसी दिन वर्ष में केवल एक बार (24 घंटे के लिए) खुलने वाले प्रसिद्ध श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट भी श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोले जाएंगे। इस त्रिगणित महासंयोग के कारण उज्जैन में देश-विदेश से 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ने की संभावना है, जिसे देखते हुए मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने अभी से तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।

1. सात साल बाद बना ऐसा दुर्लभ धार्मिक योग

काल गणना और पंचांग के अनुसार, सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी का यह विशेष संयोग लगभग 7 साल बाद दोहराया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2019 (5 अगस्त) को सावन के तीसरे सोमवार के दिन ही नागपंचमी पड़ी थी। हालाँकि, वर्ष 2023 (21 अगस्त) को अधिकमास (सावन के दो महीने) के कारण नागपंचमी सावन के सातवें सोमवार को पड़ी थी।

सावन-नागपंचमी महासंयोग का इतिहास:

वर्ष तारीख विशेष धार्मिक संयोग
2026 17 अगस्त सावन का तीसरा सोमवार, नागपंचमी और भगवान महाकाल की तीसरी शाही सवारी एक ही दिन।
2023 21 अगस्त अधिकमास के कारण सावन के 7वें सोमवार के साथ नागपंचमी का संयोग।
2019 05 अगस्त सावन का तीसरा सोमवार और नागपंचमी का एक साथ आगमन।

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2. साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट

श्री महाकालेश्वर मंदिर के सबसे ऊपरी यानी तीसरे शिखर पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट वर्ष भर बंद रहते हैं। यह केवल नागपंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाते हैं।

प्रतिमा का ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व:

नागचंद्रेश्वर मंदिर में स्थापित अद्भुत प्रतिमा 11वीं शताब्दी (नेपाल निर्मित) की मानी जाती है। इस दुर्लभ प्रतिमा में दस फन फैलाए शेषनाग के आसन पर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी विराजमान हैं। पूरे भारतवर्ष में भगवान शिव का यह रूप अत्यंत दुर्लभ है, जहाँ शिव जी गरुड़ की बजाय सर्प शय्या पर विराजमान हैं। यही कारण है कि इस मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालु पूरे वर्ष बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं।

3. सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष खाका तैयार

महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि एक ही दिन सवारी, नागपंचमी और नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन होने से क्राउड मैनेजमेंट (भीड़ प्रबंधन) सबसे बड़ी चुनौती होगी।

  • संयुक्त बैठक: पुलिस, जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति के अधिकारियों की जल्द ही एक उच्चस्तरीय बैठक होगी।

  • अस्थाई रूट व बैरिकेडिंग: श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रवेश और निकास मार्ग, वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था, होल्डिंग एरिया और बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जाएगी।

  • आपातकालीन प्रबंध: एम्बुलेंस, चिकित्सा शिविर, पेयजल वितरण और सीसीटीवी सर्विलांस से पूरे सवारी मार्ग और मंदिर परिसर की निगरानी रखी जाएगी।

निष्कर्ष

17 अगस्त को अवंतिकापुरी में भक्ति, आस्था और उत्सव का अभूतपूर्व संगम देखने को मिलेगा। एक तरफ जहाँ गर्भगृह और नागचंद्रेश्वर मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहेगा, वहीं दूसरी तरफ शाम को प्रजा का हाल जानने के लिए बाबा महाकाल नगर भ्रमण पर अपनी भव्य सवारी के साथ निकलेंगे। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित दर्शन उपलब्ध कराना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. उज्जैन में 17 अगस्त 2026 को कौन सा दुर्लभ संयोग बन रहा है?

उत्तर: 17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार, नागपंचमी का त्योहार और भगवान महाकाल की तीसरी शाही सवारी एक ही दिन पड़ रही है।

Q2. नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट कब खुलते हैं?

उत्तर: नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट वर्ष में केवल एक बार, नागपंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोले जाते हैं।

Q3. नागचंद्रेश्वर मंदिर की प्रतिमा की क्या खासियत है?

उत्तर: यह 11वीं शताब्दी की अत्यंत दुर्लभ प्रतिमा है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती दस फन फैलाए नाग पर विराजमान हैं। ऐसी प्रतिमा पूरे विश्व में अन्यत्र देखने को नहीं मिलती।

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