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उज्जैन में कृषि क्रांति: प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और सूक्ष्म सिंचाई पर विशेष फोकस, ₹400 किलो बिक रही है खास सोयाबीन

Ujjain District Agriculture Development Plan

उज्जैन: जिले में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि की लागत कम करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ के तहत एक व्यापक रोडमैप तैयार किया गया है। उज्जैन कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में हाल ही में जिला कृषि विकास प्लान की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक प्रशासनिक संकुल भवन के सभाकक्ष में संपन्न हुई।

इस बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री श्रेयांस कूमट और उप संचालक कृषि श्री यू.एस. तोमर सहित कृषि विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर श्री सिंह ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी किसान हितैषी योजनाओं का लाभ धरातल पर हर पात्र किसान तक अनिवार्य रूप से पहुँचना चाहिए।

1. प्राकृतिक खेती और साप्ताहिक हाट बाजार की पहल

बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए आगामी तीन वर्षों (2026-29) की एक क्लस्टर आधारित कार्ययोजना तैयार की गई है।

  • वर्तमान स्थिति: अभी जिले के 125 किसान लगभग 155 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

  • बाजार लिंकेज: प्राकृतिक उत्पादों को सही बाजार मूल्य दिलाने के लिए साप्ताहिक हाट बाजारों की व्यवस्था की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को शुद्ध उत्पाद और किसानों को सीधा मुनाफा मिल सके।

  • विस्तार: आने वाले समय में क्लस्टर्स, बी.आर.एस. और कृषि सखियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की जाएगी।

2. फसल विविधीकरण: सोयाबीन की जगह अन्य फसलों पर जोर

मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) को सुधारने और खेती के जोखिम को कम करने के लिए खरीफ सीजन में पारंपरिक सोयाबीन के रकबे को समायोजित किया जा रहा है। इसके स्थान पर किसानों को इन फसलों की बुवाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है:

  • मक्का, मूंग और उड़द

  • अरहर, तिल और मूंगफली

रेज्ड बेड विधि का कमाल: जिले में सोयाबीन की बुवाई के लिए ‘रेज्ड बेड विधि’ (Raised Bed Method) को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इस उन्नत तकनीक से उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है और सूखा पड़ने की स्थिति में भी फसल सुरक्षित रहती है।

3. ₹400 प्रति किलो बिक रही है ‘वेजिटेबल सोयाबीन’

उज्जैन जिले के घट्टिया विकासखंड में एक बेहद सफल और अनूठा नवाचार देखने को मिला है। विश्व वेजिटेबल सोयाबीन संस्था के सहयोग से यहाँ के 4 गांवों में 68 हेक्टेयर क्षेत्र में NRCS 188 किस्म की वेजिटेबल सोयाबीन की खेती की गई है।

  • खासियत: इस सोयाबीन को फली की अवस्था में ही तोड़कर सब्जी के रूप में बेचा जा रहा है।

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  • स्वाद और कीमत: इसका स्वाद हरी मटर जैसा है और बाजार में इसे ₹400 प्रति किलोग्राम तक का बेहतरीन दाम मिल रहा है।

  • यह पायलट प्रोजेक्ट फिलहाल उज्जैन के अलावा इंदौर और जबलपुर में भी संचालित है, जिसकी कलेक्टर ने काफी सराहना की।

4. सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) का बड़ा लक्ष्य

पानी की बचत और उत्पादकता बढ़ाने के लिए ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के विस्तार हेतु एक तीन वर्षीय मेगा प्लान तैयार किया गया है:

समयावधि / वर्ष सूक्ष्म सिंचाई का लक्ष्य (हेक्टेयर में) मुख्य लाभ
वर्तमान स्थिति 1,211 हेक्टेयर
वर्ष 2026-27 5,000 हेक्टेयर पानी की 50 से 60% तक बचत
वर्ष 2027-28 8,000 हेक्टेयर फसल उत्पादकता में 25-30% की वृद्धि

5. किसानों के लिए अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं

  • कस्टम हायरिंग सेंटर्स: छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक और महंगे कृषि यंत्र आसानी से उपलब्ध कराने के लिए जिले में 10 नए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने का काम तेजी से चल रहा है। इससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।

  • बलराम तालाब योजना: जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए आगामी वर्ष में 24 अतिरिक्त बलराम तालाबों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इन तालाबों में सिंचाई के साथ-साथ किसान मछली पालन कर अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे।

  • कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और बंपर मुनाफा: प्याज और अन्य नकदी फसलों के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से मुक्ति मिले। रबी सीजन में मूंग और चना जैसी फसलों के प्रदर्शन से किसान कम लागत में ₹85,000 से ₹95,000 प्रति एकड़ तक का शुद्ध लाभ कमा रहे हैं।

निष्कर्ष: खरीफ 2026 की बुवाई की स्थिति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जिले की खेती को आधुनिक, कम लागत वाली और अत्यधिक लाभप्रद बनाना है, ताकि उज्जैन का किसान आर्थिक रूप से समृद्ध हो सके।

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