बाबा महाकाल की सवारी 2026: 03 अगस्त से शुरू होगा नगर भ्रमण; यहाँ देखें सभी तारीखें, रूट और दर्शन के नए नियम
Ujjain mahakal sawari 2026
सावन और भादौ के महीने में उज्जैन की छटा देखने लायक होती है। अवंतिका नगरी के राजा भगवान श्री महाकालेश्वर अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इस साल (2026) भी बाबा महाकाल की सवारियों को भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति ने कमर कस ली है।
हाल ही में महाकाल मंदिर परिसर के प्रशासनिक कक्ष में कलेक्टर और मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक बड़ी बैठक हुई। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री अभिलाष मिश्रा समेत सभी आला अधिकारी मौजूद थे। बैठक में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन को लेकर कई अहम फैसले लिए गए हैं। अगर आप भी इस बार उज्जैन आने का प्लान बना रहे हैं, तो यह जानकारी आपके बहुत काम आएगी।
कब-कब निकलेगी बाबा की सवारी?
इस साल श्रावण और भादौ मास को मिलाकर कुल 6 सवारियां निकाली जाएंगी। इसमें 4 सवारियां सावन के महीने में और 2 सवारियां भादौ के महीने में होंगी। सबसे खास और भव्य आखिरी राजसी (शाही) सवारी 07 सितंबर को निकाली जाएगी।
सवारियों की तारीखें इस प्रकार हैं:
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पहली सवारी: 03 अगस्त 2026 (सोमवार)
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दूसरी सवारी: 10 अगस्त 2026 (सोमवार)
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तीसरी सवारी: 17 अगस्त 2026 (सोमवार) – इस दिन सावन सोमवार और नागचंद्रेश्वर दर्शन का विशेष संयोग बन रहा है।
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चौथी सवारी: 24 अगस्त 2026 (सोमवार)
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पांचवीं सवारी: 31 अगस्त 2026 (सोमवार)
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छठी एवं अंतिम राजसी (शाही) सवारी: 07 सितंबर 2026 (सोमवार)
सवारी का रूट: किन रास्तों से गुजरेंगे राजा महाकाल?
सवारी के दिन सबसे पहले मंदिर के सभामंडप में भगवान का पूरे विधि-विधान से पूजन होगा। इसके बाद बाबा नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
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सामान्य सवारी मार्ग:
सवारी महाकाल मंदिर से शुरू होकर महाकाल लोक, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए सीधे पवित्र रामघाट (शिप्रा तट) पहुंचेगी। यहाँ शिप्रा नदी के जल से बाबा का अभिषेक और पूजन किया जाएगा। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मन्दिर, सत्यनारायण मन्दिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मन्दिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए वापस मंदिर लौटेगी।
शाही सवारी का विशेष मार्ग (07 सितंबर):
अंतिम राजसी सवारी के दिन यह मार्ग थोड़ा बड़ा हो जाएगा। पारंपरिक रास्तों के अलावा यह सवारी टंकी चौराहा से मिर्जा नईमबेग, तेलीवाड़ा चौराहा, कण्ठाल, सतीगेट और सराफा होते हुए छत्री चौक पहुंचेगी और फिर वहां से गोपाल मंदिर के रास्ते वापस मंदिर आएगी।
भस्म आरती के समय में बदलाव: अब रात 3 बजे खुलेंगे पट
सावन-भादौ के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के समय में बदलाव किया गया है। यह नया नियम 30 जुलाई 2026 से 07 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा।
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सामान्य दिनों में: मंदिर के पट रोज सुबह 03:00 बजे खुलेंगे और आरती सुबह 3 से 5 बजे तक होगी।
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हर सोमवार को: चूंकि सोमवार को सबसे ज्यादा भीड़ होती है, इसलिए पट रात 02:30 बजे ही खोल दिए जाएंगे। यहाँ आरती सुबह 2:30 से 4:30 बजे तक संपन्न होगी।
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ध्यान दें: 08 सितंबर से पट खुलने का समय फिर से पुराने (सामान्य) शेड्यूल पर आ जाएगा।
दर्शन के लिए कैसी रहेगी एंट्री और एग्जिट व्यवस्था?
प्रशासन ने आम जनता और वीआईपी (शीघ्र दर्शन) के लिए अलग-अलग एंट्री गेट तय किए हैं ताकि किसी भी तरह की धक्का-मुक्की न हो।
आम श्रद्धालुओं के लिए (सामान्य दर्शन):
यदि आप सामान्य कतार में जा रहे हैं, तो आपको त्रिवेणी संग्रहालय (म्यूजियम) के पास से एंट्री मिलेगी। यहाँ से आप नन्दी द्वार, महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेन्टर-1, टनल मन्दिर परिसर, कार्तिक मण्डपम होते हुए गणेश मण्डपम से बाबा के दर्शन कर सकेंगे।
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जल अर्पण: जो लोग जल चढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए सभामंडप और कार्तिकेय मंडपम में खास जलपात्र (पाइपलाइन व्यवस्था) लगाए गए हैं।
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बाहर निकलने का रास्ता: दर्शन के बाद श्रद्धालु निर्माल्य द्वार या नए बनाए गए आपातकालीन गेट से सीधे बाहर निकल सकेंगे।
शीघ्र दर्शन (VIP / 250 की रसीद) वाले श्रद्धालु:
इनके लिए दो रास्ते तय किए गए हैं:
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पहला रास्ता: हरसिद्धि चौराहा से बैरिकेड्स के रास्ते गेट नंबर 05, फिर विश्रामधाम और गणेश मण्डपम।
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दूसरा रास्ता: सीधे गेट नंबर 01 से विश्रामधाम होते हुए गणेश मण्डपम।
कावड़ यात्रियों के लिए जरूरी नियम
सावन में लाखों कावड़िए बाबा को जल चढ़ाने आते हैं। उनके लिए प्रशासन ने इस बार कुछ सख्त लेकिन जरूरी नियम बनाए हैं:
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कावड़ यात्रियों को जल चढ़ाने की अनुमति हफ्ते में केवल 4 दिन (मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार) ही मिलेगी।
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शनिवार, रविवार और सोमवार को भीड़ बहुत ज्यादा होने की वजह से किसी भी कावड़ दल को एंट्री नहीं दी जाएगी।
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कावड़ यात्रियों को गेट नंबर 01 और हरसिद्धि चौराहा वाले विशेष मार्ग से प्रवेश मिलेगा।
गाड़ी पार्किंग और जूता स्टैंड कहाँ होंगे?
उज्जैन शहर में ट्रैफिक जाम न हो, इसके लिए प्रशासन ने पार्किंग और जूता स्टैंड की जगहें पहले से तय कर दी हैं:
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जूता स्टैंड: त्रिवेणी संग्रहालय के बाहर, महाकाल महालोक प्लाजा के पास, विक्रम टीला, गेट नंबर 01, हरसिद्धि चौराहा, मानसरोवर भवन और नीलकंठ गेट के सामने।
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पार्किंग स्थल: महाकाल अन्नक्षेत्र के पास खाली मैदान, मेघदूत वन पार्किंग, नीलकंठ पार्किंग, चारधाम पार्किंग, कर्कराज पार्किंग और कार्तिक मेला ग्राउंड।
प्रशासन के कुछ और बड़े फैसले (श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए)
बैठक में कलेक्टर श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और व्यवस्था में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी:
सावन सोमवार और नागपंचमी एक ही दिन: इस बार सावन सोमवार के दिन ही श्री नागचंद्रेश्वर दर्शन (नागपंचमी) का संयोग बन रहा है। इस दिन की भारी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन एक अलग विशेष बैठक कर अलग प्लान बनाएगा।
लाइव दर्शन के लिए LED रथ: सवारी में पीछे चल रहे लोगों को बाबा के दर्शन ठीक से हो सकें, इसके लिए सवारी के साथ 5 बड़ी एलईडी स्क्रीन वाले रथ चलेंगे।
चलित आरती दर्शन: आरती के समय भीड़ को एक जगह रोका नहीं जाएगा। कार्तिक मंडप की पहली तीन लाइनों से श्रद्धालु चलते-चलते बाबा की आरती के दर्शन कर सकेंगे।
मेडिकल और सुरक्षा: पूरे रूट पर 15 जगहों पर मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी और चौबीसों घंटे एम्बुलेंस की सुविधा मिलेगी। साथ ही सुरक्षा के लिए पूरे मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे और लाउडस्पीकर लगाए गए हैं।



