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Shri Chitragupt Nagar Bhraman
उज्जैन। वैशाख शुक्ल गंगा सप्तमी के अवसर पर कायस्थ समाज के कुल आराध्य भगवान श्री चित्रगुप्त का प्राकट्य दिवस शहर में अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह शहर के विभिन्न चित्रगुप्त मंदिरों में हवन, पूजन और विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके पश्चात शाम को भगवान श्री चित्रगुप्त रथ में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले। जनदर्शन यात्रा में भगवान के दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गए और शहरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया।
उज्जैन कायस्थ समाज के अध्यक्ष दिनेश श्रीवास्तव ने बताया कि यह भगवान श्री चित्रगुप्त जनदर्शन यात्रा का लगातार नौवां वर्ष था। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा मध्यभारत एवं उज्जैन कायस्थ समाज की सभी संस्थाओं के सहयोग से यह यात्रा ग्रांड होटल फ्रीगंज से प्रारंभ हुई। शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए यात्रा शिप्रा तट स्थित श्री चित्रगुप्त घाट (छोटे पुल) पर पहुंची, जहां महाआरती के साथ इसका समापन हुआ। प्राणी मात्र के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले और कर्मों के अनुरूप फल देने वाले धर्मराज भगवान चित्रगुप्त के रथ के साथ शहर के सभी चित्रगुप्त मंदिरों की तस्वीरें भी यात्रा में शामिल की गईं, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।
राष्ट्रध्वज और केसरिया पताकाओं के साथ निकली यात्रा
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जनदर्शन यात्रा की शुरुआत सर्वप्रथम राष्ट्रगान गाकर की गई। इसके बाद वंदे मातरम और भारत माता की जय के जयकारों के साथ यात्रा आगे बढ़ी। यात्रा में सबसे आगे महिलाएं केसरिया पताकाएं और राष्ट्रध्वज लेकर चल रही थीं। केसरिया साड़ी पहने मातृशक्ति ने राष्ट्र सर्वोपरि का सार्थक संदेश दिया। मार्ग में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा मंच लगाकर इस भव्य यात्रा का आत्मीय स्वागत किया गया।
ईंधन और पर्यावरण बचाने का लिया संकल्प
यात्रा के दौरान मातृशक्ति ने देश को आत्मनिर्भर बनाने तथा पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। अनुपमा श्रीवास्तव ने ईंधन संरक्षण पर जोर देते हुए लोगों से ऊर्जा बचाने के लिए अधिक से अधिक इलेक्ट्रॉनिक (इलेक्ट्रिक) वाहनों का उपयोग करने की अपील की। इस दौरान मातृशक्ति ने देश में ऊर्जा, जल और पर्यावरण की रक्षा का विशेष संकल्प लिया।
संयुक्त परिवार का संदेश: कुटुंब रसोई में एक साथ किया भोजन
संयुक्त परिवारों की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए कायस्थ समाज द्वारा प्राकट्य दिवस पर एक अनूठी पहल की गई। इस दिन समाज के घरों में चूल्हा नहीं जला। घर-घर से अनाज एकत्रित कर श्री चित्रगुप्त घाट पर विशाल कुटुंब रसोई बनाई गई। यात्रा के समापन पर महाआरती के पश्चात सभी समाजजनों ने एक जाजम पर बैठकर सहभोज किया और सामाजिक एकता का परिचय दिया।
इस पूरे आयोजन में समाज के वरिष्ठजनों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में मोतीलाल श्रीवास्तव, उर्मिला श्रीवास्तव, अनुपमा श्रीवास्तव, डॉ. सोनल सिंह, डॉ. अजय खरे, डॉ. जितेंद्र भटनागर, डॉ. रविन्द्र श्रीवास्तव, युधिष्ठिर कुलश्रेष्ठ, सुभाष श्रीवास्तव, रूपकिशोर कुलश्रेष्ठ, राजभूषण श्रीवास्तव, अतुल सक्सेना, संजय श्रीवास्तव, चेतन श्रीवास्तव, आशीष अष्ठाना, नेहा श्रीवास्तव, शशि श्रीवास्तव, रजनी कुलश्रेष्ठ, पिंकी श्रीवास्तव, अंगद श्रीवास्तव, महत्व श्रीवास्तव और विशेष श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
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