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विंध्य और बुंदेलखंड के लिए अमृतधारा बनेगी ‘स्लीमनाबाद टनल’, 5 जिलों के ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पहुंचेगा नर्मदा का पानी

Sleemanabad Tunnel Project

मध्य प्रदेश के विंध्य, बुंदेलखंड और बघेलखंड अंचल के विकास और किसानों की समृद्धि के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित होने जा रहा है. कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही महत्वाकांक्षी ‘स्लीमनाबाद टनल परियोजना’ का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जमीनी स्तर पर बारीकी से अवलोकन किया. निरीक्षण के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विंध्य क्षेत्र हर प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन कुछ इलाकों में पानी की कमी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है. अब यह स्लीमनाबाद टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के खेतों के लिए किसी अमृतधारा से कम साबित नहीं होगी.

भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट क्षेत्र और विंध्य की वैली के इन पांचों जिलों में इस टनल के माध्यम से लगभग ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का दायरा बढ़ जाएगा. इसके साथ ही लाखों लोगों के लिए पेयजल (पीने के पानी) के संकट का भी हमेशा के लिए समाधान हो जाएगा.

1. 12 किमी लंबी सुरंग और 120 फीट की गहराई: इंजीनियरिंग की अद्भुत मिसाल

स्लीमनाबाद टनल परियोजना आधुनिक विज्ञान और बेहतरीन इंजीनियरिंग का एक ऐसा बेजोड़ नमूना है, जो आने वाले समय में दुनिया भर के तकनीकी संस्थानों के लिए एक ‘केस स्टडी’ साबित होगी. इस टनल की मुख्य तकनीकी विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • लागत और निर्माण: इस पूरी परियोजना को तैयार करने में 1600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई है, जिसमें केंद्र सरकार ने भी लगभग 275 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण सहयोग दिया है.

  • लंबाई और गहराई: जमीन के नीचे बनाई गई यह टनल लगभग 12 किलोमीटर लंबी है. कई दुर्गम और आबादी वाले स्थानों पर तो इसकी गहराई जमीन से नीचे 120 फीट तक है.

  • 100 साल की सुरक्षा: टनल का निर्माण इतनी उच्च स्तरीय तकनीक से किया गया है कि यदि क्षेत्र में कोई भीषण भूकंप भी आता है, तब भी यह टनल अगले 100 वर्षों तक पूरी तरह से सुरक्षित और क्रियाशील रहेगी.

2. नर्मदा का पानी लाएगा गंगा बेसिन में हरियाली: विज्ञान का चमत्कार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टनल के महत्व को रेखांकित करते हुए एक बेहद दिलचस्प बात कही. उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से नर्मदा नदी मध्य प्रदेश से बहकर गुजरात की खंभात की खाड़ी (पश्चिम) में जाकर मिलती है. लेकिन इस टनल के माध्यम से अब मां नर्मदा का जल विपरीत दिशा में गंगा बेसिन की ओर बढ़ेगा और सोन नदी के आसपास के सूखे अंचलों को हरा-भरा बनाएगा.

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एक समय ऐसा भी आया था जब कठिन चट्टानों और भौगोलिक बाधाओं के कारण ऐसा लग रहा था कि इस टनल को बनाना बिल्कुल असंभव है. लेकिन साल 2016 से जर्मनी से बुलाई गई अत्याधुनिक मशीनों के जरिए और इंजीनियर्स, टेक्नीशियन्स व हजारों मजदूरों के कड़े संघर्ष के बाद साल 2026 में आखिरकार इस टनल को पूरा करने में बड़ी सफलता हासिल हुई है.

3. जिला-वार सिंचाई का गणित: किस अंचल को कितना मिलेगा पानी?

इस टनल के मुख्य कछार (सोन कछार) से निकलने वाले 152 क्यूबिक डिस्चार्ज पानी के माध्यम से बुंदेलखंड और बघेलखंड के कुल 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर कमांड एरिया में सीधे सिंचाई की सुविधा मिलेगी. इसका जिला-वार विवरण इस प्रकार है:

प्रभावित जिला सिंचित होने वाला संभावित क्षेत्र (हेक्टेयर में)
सतना (Satna) 1,04,970 हेक्टेयर
मैहर (Maihar) 54,227 हेक्टेयर
कटनी (Katni) 21,823 हेक्टेयर
रीवा (Rewa) 3,532 हेक्टेयर
पन्ना (Panna) 448 हेक्टेयर

इसके अलावा, अप-स्ट्रीम और डाउन-स्ट्रीम दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल सिंचाई का कुल रकबा ढाई लाख हेक्टेयर तक बढ़ जाएगा. मुख्यमंत्री ने किसानों को बड़ी खुशखबरी देते हुए बताया कि आगामी तीन महीनों के भीतर ही रबी की फसल के लिए लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का पानी उपलब्ध करा दिया जाएगा.

4. ‘जमीन न बेचें किसान, यह क्षेत्र पंजाब-हरियाणा को भी पीछे छोड़ेगा’

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वहां काम कर रहे श्रमिकों और इंजीनियरों से आत्मीय बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया. उन्होंने क्षेत्र के किसानों से एक विशेष और भावुक अपील करते हुए कहा:

सीएम की किसानों से अपील: “इस पानी के आने के बाद बुंदेलखंड और बघेलखंड की पूरी तकदीर बदलने वाली है। मेरी सभी किसान भाइयों से गुजारिश है कि वे अपनी जमीनों को किसी भी कीमत पर न बेचें। आने वाले समय में पानी की प्रचुरता के कारण हमारा यह अंचल कृषि उत्पादन के मामले में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ देगा। यहाँ से होने वाला पलायन हमेशा के लिए रुक जाएगा और हर घर में आर्थिक समृद्धि आएगी।”

5. शून्य पर्यावरणीय नुकसान और सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर

इस पूरी परियोजना की एक और बड़ी खूबी यह है कि 12 किलोमीटर लंबी इस टनल को राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway), चालू रेलवे लाइनों, अंडरग्राउंड क्रॉसिंग और घने आबादी वाले रिहायशी इलाकों के ठीक नीचे से बेहद सुरक्षित तरीके से गुजारा गया है.

  • कोई नुकसान नहीं: टनल के कारण ऊपर मौजूद किसी भी मकान, सड़क या रेल पटरी को कोई संरचनात्मक नुकसान नहीं पहुंचा है.

  • पर्यावरण हितैषी: टनल के निर्माण से क्षेत्र में किसी भी तरह की पर्यावरणीय क्षति (पेड़ों की कटाई या प्रदूषण) नहीं हुई है.

  • पारदर्शी पुनर्वास: इस प्रोजेक्ट से प्रभावित हुए चुनिंदा परिवारों को पूरी संवेदनशीलता के साथ उचित मुआवजा और बेहतर स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है.

FAQs

Q1. स्लीमनाबाद टनल परियोजना से मध्य प्रदेश के किन जिलों को लाभ मिलेगा?

उत्तर: इस टनल परियोजना से मुख्य रूप से पांच जिलों—कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना को प्रचुर मात्रा में सिंचाई और पीने का पानी मिलेगा।

Q2. इस टनल की कुल लंबाई और गहराई कितनी है?

उत्तर: स्लीमनाबाद टनल की कुल लंबाई लगभग 12 किलोमीटर है और जमीन के नीचे कई स्थानों पर इसकी गहराई 120 फीट तक चली गई है।

Q3. इस टनल के माध्यम से नर्मदा का पानी किस बेसिन में भेजा जा रहा है?

उत्तर: यह टनल एक भौगोलिक चमत्कार की तरह काम करेगी, जो नर्मदा नदी के पानी को गंगा बेसिन के सोन नदी अंचल की ओर मोड़कर पूरे क्षेत्र में हरियाली लाएगी।

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