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Haunted Places in India
भारत एक ऐसी भूमि है जहाँ हर गाँव और हर शहर अपने अंदर कोई न कोई अनसुलझा रहस्य छुपाए बैठा है। लेकिन इन जगहों की असली कहानी हर किसी को नहीं पता, और अगर इन रहस्यों को सच में जान लिया जाए तो यकीन मानिए आपके रोंगटे खड़े हो जाएँगे। जैसे कि मालूटी टेंपल एरिया, एक ऐसा गाँव जहाँ 108 मंदिर एक साथ खड़े हैं, मानो मंदिरों की पूरी दुनिया यहीं बस गई हो।
दूसरी जगह शेट्टी हल्ली रोसरी चर्च, एक ऐसा चर्च जो ज़मीन पर नहीं, बल्कि पानी के बीच खड़ा दिखाई देता है, जैसे कोई तैरती हुई रहस्यमई इमारत, और तीसरी जगह हवाह हौदी विक्टिम पॉइंट, जिसे आपने इंटरनेट पर जरूर देखा होगा। कहा जाता है कि यह जगह आज भी आत्माओं और रहस्यमई घटनाओं से जुड़ी हुई है।
मराठी टेंपल एरिया झारखंड
कल्पना करो एक छोटा सा गांव जहां हर तरफ बस मंदिर ही मंदिर दिखाई दें। दूर से देखने पर ऐसा लगे जैसे मंदिरों की पूरी दुनिया यहीं बस गई हो। इस रहस्यमयी जगह का नाम है मालूटी टेंपल एरिया, जिसे मंदिरों का गांव कहा जाता है। यह जगह झारखंड के दुमका जिले में शिकारीपाड़ा क्षेत्र के पास पश्चिम बंगाल बॉर्डर के नजदीक मौजूद है। बाहर से शांत दिखने वाला यह गांव अपने अंदर सदियों पुराना इतिहास छुपाए बैठा है।
इतिहास के अनुसार, यहां के ज्यादातर मंदिर 1600 ईसवी से 1800 ईसवी के बीच बनाए गए थे। यानी आज के समय में, ये मंदिर लगभग 200 से 400 साल पुराने माने जाते हैं। कहा जाता है कि यहां कभी कुल 108 मंदिर मौजूद थे, और 108 संख्या हिंदू परंपरा में बेहद शुभ मानी जाती है। समय के साथ कई मंदिर नष्ट हो गए, और आज लगभग 70 से ज्यादा प्राचीन मंदिर यहां देखने को मिलते हैं।
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मालूटी के मंदिर लाल ईंटों और टेराकोटा कला से बने हैं, जिनकी दीवारों पर रामायण, महाभारत, देवी-देवताओं और प्राचीन जीवन के दृश्य बेहद बारीकी से उकेरे गए हैं। इन मंदिरों की ऊंचाई लगभग 15 फीट से लेकर 60 फीट तक मानी जाती है, जिससे पूरा क्षेत्र देखने में एक अलग ही प्राचीन दुनिया जैसा लगता है। इतिहास में बताया जाता है कि राजा बज बसंत और उनके वंशजों ने अपनी कुलदेवी मौलिक की भक्ति में यहां मंदिरों का निर्माण कराया।
कहा जाता है कि राज परिवार की रानियां भी भक्ति में आगे बढ़ने के लिए अलग-अलग मंदिर बनवाती थी, जिससे यहां मंदिरों की संख्या बढ़ती चली गई। सबसे बड़ा रहस्य यह है कि इतने छोटे से गांव में इतने अधिक मंदिर क्यों बनाए गए और यहां महलों की जगह मंदिरों का इतना बड़ा समूह क्यों दिखाई देता है। कुछ लोग इसे आध्यात्मिक साधना का केंद्र मानते हैं, जबकि कुछ इसे इतिहास का अनोखा रहस्य कहते हैं।
शेट्टीहल्ली रोज़री चर्च
एक पुरानी गौथिक चर्च जहां कभी प्रार्थनाओं की आवाज गूंजती थी। घंटियों की धुन सुनाई देती थी। लेकिन आज वही चर्च बिना छत के खंडहर बनकर खड़ी है और हर मानसून में पानी के बीच डूबकर ऐसे दिखाई देती है जैसे कोई भूतिया जहाज नदी में तैर रहा हो। इस रहस्यमई जगह का नाम है शेट्टी हल्ली रोसरी चर्च, जिसे कर्नाटक की फ्लोटिंग चर्च या सबमर्ज चर्च भी कहा जाता है।
यह चर्च कर्नाटक के हासन जिले में शेट्टी हल्ली गांव के पास हेमावती नदी के किनारे मौजूद है। हासन शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर और बेंगलुरु से करीब 200 कि.मी. की दूरी पर स्थित यह जगह चारों तरफ हरियाली से घिरी हुई है। लेकिन चर्च का माहौल अलग ही रहस्यमयी एहसास देता है। इस चर्च का निर्माण 1860 के दशक में फ्रेंच मिशनरियों द्वारा कराया गया था। यानी आज के समय में यह चर्च लगभग 160 से 170 साल पुरानी मानी जाती है।
फ्रेंच गौथिक शैली में बनी इस संरचना में ऊंचे आर्च, मजबूत ईंटों की दीवारें और अनोखी वास्तुकला दिखाई देती है, जिसने समय और मौसम की मार के बावजूद इसे आज तक खड़ा रखा है। कहानी में बड़ा मोड़ तब आया जब 1960 के दशक में गोरूर हेमावती बांध बनाया गया। बांध बनने के बाद पूरा इलाका जलाशय में बदल गया और आसपास का गांव पानी में डूब गया।
चर्च को हटाया नहीं गया और तभी से हर साल मानसून में यह चर्च आधी पानी में डूब जाती है। जून से अक्टूबर तक इसका केवल ऊपरी हिस्सा दिखाई देता है, जबकि सूखे मौसम में पूरी संरचना बाहर आ जाती है, जैसे कोई छिपा हुआ इतिहास फिर से सामने आ गया हो। इस जगह का रहस्य और भी गहरा तब लगता है जब लोग बताते हैं कि रात के समय यहां अजीब सा सन्नाटा और अलग माहौल महसूस होता है। छत 1980 के दशक में गिर चुकी है, लेकिन बाकी संरचना आज भी मजबूती से खड़ी है, जो इसे और भी रहस्यमयी बना देती है।
मकरही हवेली, उत्तर प्रदेश
कल्पना करो एक पुरानी शाही हवेली जहां कभी रानियों की रौनक थी, आंगनों में लोगों की आवाजें गूंजती थी और राजसी जिंदगी अपने पूरे शान में नजर आती थी। लेकिन आज वही हवेली खामोश खंडहर बनकर खड़ी है। इस रहस्यमयी जगह का नाम है मकराही हवेली। यह हवेली उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में अकबरपुर के पास हंसवर क्षेत्र के मकराही गांव में स्थित है। चारों तरफ खेत और गांव का साधारण माहौल है, लेकिन हवेली के पास पहुंचते ही वातावरण बदल जाता है। टूटी दीवारें, खाली गलियारे और अजीब सा सन्नाटा।
यह हवेली लगभग 90 से 100 साल पुरानी है और इसका निर्माण 1930 के दशक में स्थानीय जमींदार या राज परिवार द्वारा शाही निवास के रूप में कराया गया था। बड़े आंगन, ऊंची दीवारें, जालीदार खिड़कियां और कई दर्जन कमरे मिलकर इसे विशाल बनाते हैं। शुरुआत में यह रानियों और राज परिवार से जुड़ी हवेली थी। कुछ समय बाद यहां स्कूल भी चलाया गया और एक समय पर यह जगह अनाथ आश्रम के रूप में इस्तेमाल हुई।
समय के साथ लोग यहां से चले गए और हवेली वीरान होती चली गई। डरावनी बात यह है कि शाम ढलते ही इस हवेली के आसपास सन्नाटा छा जाता है और गांव के लोग यहां आना पसंद नहीं करते। स्थानीय लोगों का मानना है कि रात होते ही हवेली की छत और खाली कमरों में किसी की परछाई या आत्मा दिखाई देती है। कुछ लोगों ने दूर से कदमों की आहट और किसी के पुकारने जैसी आवाज सुनने का दावा भी किया है, जिससे इस जगह का रहस्य और गहरा हो जाता है।
इस हवेली की रहस्यमई पहचान की वजह से कई YouTube एक्सप्लोरर्स और पैरानॉर्मल ब्लॉगर्स यहां आकर एक्सप्लोरेशन कर चुके हैं। रात के समय वीडियो शूट करते हुए उन्होंने अजीब अनुभव, अनदेखी हलचल और अदृश्य शक्तियों की मौजूदगी महसूस करने की बात कही है। यही कारण है कि इंटरनेट और YouTube पर इस हवेली की कहानियां तेजी से फैल चुकी हैं और इसे पूर्वांचल की भूतियां हवेलियों में गिना जाने लगा है।
दिन के समय यहां कई लोग घूमने, एक्सप्लोर करने और फोटो लेने के लिए आते हैं। लेकिन अकेले अंदर जाने से अब भी लोग बचते हैं। गांव में यह भी चर्चा है कि इस हवेली के नीचे पुराने राजाओं का कोई छिपा हुआ खजाना हो सकता है जो इस जगह को और भी रहस्यमई बना देता है। मकराही हवेली आज इतिहास, डर और अनकही कहानियों का ऐसा संगम बन चुकी है जहां हर खाली कमरा जैसे अतीत की कोई अधूरी कहानी छुपाए बैठा है।
फिरोज शाह कोटला वाइट रूइंस एरिया दिल्ली
कल्पना करो एक ऐसी जगह जहां लोग इतिहास देखने नहीं बल्कि जिन्न से मिलने और अपनी मनोकामनाएं पूरी करवाने आते हैं। सालों पहले एक बुजुर्ग फकीर ने लोगों से कहा था कि इस किले में अदृश्य जिन्न रहते हैं और लोगों की इच्छाएं सुनते हैं। तभी से यह जगह रहस्य और आस्था का केंद्र बन गई, जहां हर गुरुवार भारी भीड़ लगती है और लोग अपनी चिट्ठियां लेकर पहुंचते हैं। इस रहस्यमई स्थान का नाम है फिरोज शाह कोटला। यह ऐतिहासिक किला दिल्ली में आईटीओ के पास यमुना नदी के किनारे स्थित है।
बाहर से यह सिर्फ एक पुराना किला दिखाई देता है, लेकिन अंदर कदम रखते ही माहौल बदल जाता है: सफेद पत्थरों के खंडहर, शांत गलियारे और एक अलग ही रहस्यमयी एहसास। इस किले का निर्माण सन 1354 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने करवाया था, यानी आज यह किला लगभग 670 साल पुराना है। यह तुगलक वंश की राजधानी फिरोजाबाद का मुख्य केंद्र हुआ करता था, जहां महल, जामी मस्जिद और बावली मौजूद थी।
यहां का सबसे खास आकर्षण है लगभग 13 मीटर ऊंचा अशोक स्तंभ। जिसे दूर से लाकर यहां स्थापित किया गया। समय के साथ यह किला खंडहर बन गया, लेकिन जिन्हों की कहानियों ने इसे नई पहचान दे दी। हर गुरुवार यहां भारी भीड़ लगती है। लोग दीवारों पर चिट्ठियां चिपकाते हैं, पासपोर्ट-साइज़ फोटो लगाते हैं और अपनी मनोकामनाएं लिखते हैं। कोई नौकरी पाने की इच्छा लेकर आता है। कोई शादी और प्यार के लिए प्रार्थना करता है, तो कोई बीमारी से छुटकारा, कोर्ट केस में जीत या जीवन की समस्याओं से राहत मांगता है।
लोग यहां मिठाई, फल, दूध और खाने की चीजें भी चढ़ाते हैं। कई लोगों ने यहां अजीब अनुभव होने की बात भी है। कुछ लोगों को अचानक पीछे से धक्का लगने का एहसास हुआ, तो कुछ ने अकेले में किसी अदृश्य शक्ति की मौजूदगी महसूस की। रात के समय अंधेरा, गलियारे और गहरा सन्नाटा इस जगह को और भी रहस्यमयी बना देते हैं। फिरोजशाह कोटला सिर्फ एक ऐतिहासिक किला नहीं, बल्कि वह जगह है जहां इतिहास और अलौकिक विश्वास एक साथ मिलते हैं, जहां सुल्तानों की विरासत और जिन्न की कहानियां आज भी लोगों को अपनी ओर खींचती हैं।
हवा हौदी विक्टिम पॉइंट
आप लोगों ने यह जगह इंटरनेट पर कहीं ना कहीं जरूर देखी होगी। तो चलिए अब इस रहस्यमई और जानते हैं कि यह एक डरावनी जगह है। जंगल के बीच खड़ी एक पुरानी चार-मंजिला टावर जहां कभी राजा शिकार किया करते थे। लेकिन आज वहां सिर्फ सन्नाटा, हवा की आवाज और डरावनी कहानियां गूंजती हैं। इस जगह का नाम है हवाह हौदी विक्टिम पॉइंट। यह जगह राजस्थान के जयपुर के पास जमवा रामगढ़ तहसील में निबी गांव के आसपास जंगल के बीच स्थित है।
एक तरफ दूर-दूर तक फैला खुला जंगल है और इसके ठीक पीछे एक पहाड़ खड़ा है जो इस जगह के माहौल को और भी ज्यादा डरावना बना देता है। चारों तरफ सुनसान और वीरानी का एहसास होता है जिससे यहां खड़े होकर लगता है जैसे आप दुनिया से बिल्कुल अलग हो गए हो। इतिहास के अनुसार, यह टावर लगभग 1628 ईसवी के आसपास महाराजा माधव सिंह प्रथम के समय बनवाया गया था, यानी यह संरचना करीब 400 साल पुरानी मानी जाती है।
इसे हंटिंग वॉच टावर के रूप में बनाया गया था, जहां से राजा और उनके साथी शिकार पर नजर रखते थे। इस टावर की बनावट बेहद अनोखी है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम चारों दिशाओं में खिड़कियां बनाई गई हैं। हर खिड़की इस तरह डिजाइन की गई थी कि शिकारी घुटनों तक झुककर आराम से निशाना लगा सके और शिकार को सटीक तरीके से मार सके। अंदर मजबूत पत्थरों की संरचना और ऊपर तक जाने वाली सीढ़ियां इसे और रहस्यमयी बना देती हैं।
सबसे ऊपर पहुंचने पर जो नज़ारा दिखाई देता है, वह बेहद अजीब और डरावना लगता है। दूर-दूर तक सिर्फ सुनसान जंगल, कहीं भी कोई बड़ी इमारत या शहर का निशान नहीं दिखाई देता। ऐसा लगता है जैसे आप किसी खोई हुई दुनिया में खड़े हो। स्थानीय लोगों के अनुसार इस जगह पर आत्माओं और अजीब घटनाओं की कहानियां भी जुड़ी हुई हैं। कुछ लोगों का मानना है कि रात के समय यहां गोलियों जैसी आवाजें सुनाई देती हैं, जैसे कोई अब भी शिकार कर रहा हो, और कई लोग इसे पुराने महाराज की आत्मा से जोड़ते हैं।
कई YouTube एक्सप्लोरर्स और पैरानॉर्मल ब्लॉगर्स यहां आ चुके हैं, लेकिन ज्यादातर लोग दिन के समय ही आते हैं। रात में अकेले यहां आना लगभग नामुमकिन माना जाता है, क्योंकि यह जगह इतनी सुनसान है कि अगर किसी अदृश्य शक्ति या आत्मा से सामना हो जाए तो यहां से भागकर सुरक्षित जगह तक पहुंचने में घंटों लग सकते हैं। इस टावर से कुछ दूरी नीचे पुराने कुएं भी मौजूद हैं जो इस जगह को और रहस्यमई बना देते हैं।
यहां आने वाले लोगों को पहले बंदरों का सामना भी करना पड़ता है जो इस इलाके में काफी संख्या में रहते हैं. दिन के समय यह जगह एडवेंचर और एक्सप्लोरेशन के लिए शानदार लगती है। लेकिन शाम ढलते ही हवाहौदी विक्टिम पॉइंट का माहौल पूरी तरह बदल जाता है, और यही इसे इतिहास, डर और रहस्य का अनोखा संगम बनाता है।
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