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विक्रमोत्सव 2026 – सम्राट विक्रमादित्‍य की विद्वता, वीरता और दानशीलता आज भी प्रेरणा का स्रोत

avantikatimesnews March 20, 2026 (Last updated: March 27, 2026)
विक्रमोत्सव 2026

Contents

  • विक्रमोत्सव 2026
  • ड्रोन तकनीक उज्जैन में देवी-देवताओं की झलक आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रही है
  • उज्जैन को व्यापार और उद्योग की दृष्टि से भी विकसित किया जा रहा है
  • कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण

विक्रमोत्सव 2026

विक्रमोत्सव 2026 उज्जैन । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धार्मिक नगरी उज्जैन को परमात्मा ने भाग्य विशेष रूप से लिखा है। जो भी व्यक्ति एक बार उज्जैन आता है, उसका जीवन संवर जाता है। मां शिप्रा के पावन तट पर बसी यह नगरी अनादि काल से अस्तित्व में है और हर युग में इसकी महिमा अक्षुण्ण रही है। उज्जैन, जिसे प्राचीन काल में अवंतिका और उज्जयिनी के नाम से जाना जाता था, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का धाम है। वर्षप्रतिपदा के इस विशेष दिन विक्रम संवत 2083 के आगमन का उल्लास पूरे शहर में देखा गया। यह उद्बोधन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रमोत्सव 2026 अंतर्गत राम घाट पर आयोजित सृष्टि आरम्भ उत्सव में दिया।

ड्रोन तकनीक उज्जैन में देवी-देवताओं की झलक आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रही है

विक्रमोत्सव 2026

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज जब दुनिया आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन का उपयोग युद्ध में कर रही है। । वहीं ड्रोन तकनीक उज्जैन में देवी-देवताओं की झलक आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रही है। यह सनातन संस्कृति की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है। करीब दो हजार वर्ष पूर्व उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांताओं को परास्त कर राष्ट्र की रक्षा की और सुशासन की मिसाल कायम की।

उनका 32 पुतलियों वाला सिंहासन, नवरत्नों की विद्वता, वीरता और दानशीलता आज भी प्रेरणा का स्रोत है। आज विक्रमादित्य की इसी गौरवगाथा को पुनर्जीवित करते हुए पूरे प्रदेश में विक्रम उत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह उत्सव न केवल संस्कृति का उत्सव है, बल्कि सुशासन और प्रशासनिक आदर्शों की पुनर्स्थापना का प्रतीक भी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियां भी जोर-शोर से उज्जैन में चल रही हैं। इस बार का सिंहस्थ अभूतपूर्व और ऐतिहासिक होने वाला है। उज्जैन को जोड़ने वाले सभी मार्गों को फोरलेन और सिक्सलेन बनाया जा रहा है, वहीं मां शिप्रा के तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे नवीन घाट विकसित किए जा रहे हैं।

उज्जैन को व्यापार और उद्योग की दृष्टि से भी विकसित किया जा रहा है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन को व्यापार और उद्योग की दृष्टि से भी विकसित किया जा रहा है। विक्रम उद्योगपुरी, मेडिकल डिवाइस पार्क जैसे प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 12,500 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र पूर्ण रूप से विकसित हो चुका है और अतिरिक्त 5,000 एकड़ क्षेत्र में नया पार्क तैयार किया जा रहा है। साथ ही नए एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं की योजना धार्मिक तीर्थाटन को नई ऊंचाई देने का प्रयास है। आने वाले समय में उज्जैन न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक, औद्योगिक और वैश्विक पहचान का केंद्र बनेगा। जब 2028 में सिंहस्थ का विराट स्वरूप दुनिया के सामने आएगा, तब पूरी दुनिया देखेंगी सनातन संस्‍कृति का वैभव ।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत 19 मार्च को गुड़ी पड़वा, सृष्टि आरम्भ उत्सव के पावन अवसर पर धर्मनगरी उज्जैन में भव्य और आकर्षक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिप्रा तट स्थित रामघाट,दत्त अखाड़ा घाट पर आयोजित इस महोत्सव में आस्था, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसके बाद प्रसिद्ध पार्श्वगायक श्री विशाल मिश्रा ने अपनी मधुर आवाज से श्रद्धालुओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने संगीत का आनंद लिया और नववर्ष का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। गुड़ी पड़वा, जिसे हिंदू नववर्ष एवं चैत्र नवरात्रि के प्रारंभ का प्रतीक माना जाता है, के कारण पूरे शहर में धार्मिक उल्लास का वातावरण रहा।
भव्य ड्रोन शो,लेजर शो और आकर्षक आतिशबाजी ने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण

विक्रमोत्सव 2026

विक्रमोत्सव 2026

भव्य ड्रोन शो, लेजर शो और आकर्षक आतिशबाजी रही, जिसने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया। ड्रोन शो के माध्यम से धार्मिक एवं सांस्कृतिक संदेशों का मनोहारी प्रदर्शन किया गया, जिससे उपस्थित जनसमूह अभिभूत हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कार्यक्रम में महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ का विक्रम पंचांग 2083,संस्कृति संचालनालय का कला पंचांग, बिमल कृष्ण दास की 84 महादेव,रामस्वरूप दास की ओरछाधीश,वीर भारत न्यास के महर्षि अत्रि ,महर्षि अंगिरा,धनवंतरी,महर्षि अगस्त्य, भरत मुनि के भारत निधि मोनोग्राफ,महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ की अष्टावक्र गीता,नारद गीता, ब्राह्मण गीता,गर्भ गीता,उत्तर गीता का विमोचन किया गया।

विक्रमोत्सव अंतर्गत आयोजित सृष्टि आरम्भ उत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ संगीत, संस्कृति और तकनीक के संगम के रूप में उज्जैन को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान प्रदान की। सृष्टि आरम्भ उत्सव ने उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आस्था और आधुनिक आयोजन क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज,विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा,महापौर श्री मुकेश टटवाल ,नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव,विक्रमादित्य शोधपीठ निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी,श्री संजय अग्रवाल,श्री राजेश धाकड़,श्री राजेश कुशवाह,श्री नरेश शर्मा,श्री राजेंद्र भारती और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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