Mysterious Cities in the World : दुनिया के 5 शहर जो बने हैं मौत और खाई के बीच
पत्थरों की सबसे ऊँची चोटी पर बसे शहर

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Mysterious Cities in the World
दुनिया के पांच सबसे खूबसूरत और खतरनाक शहर जो सीधे पत्थरों की ऊंची चट्टानों के ऊपर बने हुए हैं। इन जगहों को आप खूबसूरत कहें या खतरनाक, दोनों ही अनुभव यहां एक साथ महसूस होते हैं। ये पांचों शहर ऐसे-ऐसे स्थानों पर खड़े हैं जिन्हें देखकर हर कोई सोच में पड़ जाता है कि इंसान आखिर इतनी खतरनाक जगह पर घर कैसे बना सकता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यहां लोग सदियों से रहते आ रहे हैं। यानी कि सिर्फ पक्षी ही ऊंचाई पर अपना बसेरा नहीं बनाते। इंसान भी किसी से कम नहीं है। हां
मेटियो, ग्रीस
दुनिया में सिर्फ पक्षी ही ऊंची-ऊंची जगहों पर घर नहीं बनाते। इंसान भी उन ऊंचाइयों पर घर बनाने में माहिर है जहां पहुंच पाना ही नामुमकिन लगता है। ऐसी ही एक अद्भुत और रहस्यमई जगह है मेटियो ग्रीस, यह जगह थेसाली क्षेत्र के छोटे से शहर कलंबाका से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है। जहां नीचे फैली हुई हरी-भरी घाटियां और गांव दिखाई देते हैं। वहीं ऊपर आसमान को छूते हुए पत्थरों के गगनचुंबी स्तंभ खड़े हैं। जिनकी ऊंचाई करीब 600 मीटर है।
इन्हीं पत्थरों की चोटियों पर इंसानों ने अपने घर और मठ खड़े किए हैं। कहा जाता है कि मेटियो की यह चट्टानें करीब 60 मिलियन वर्ष पुरानी है। वैज्ञानिकों के अनुसार कभी यह पूरा क्षेत्र समुद्र के नीचे था और लाखों साल पहले हुई भूगर्भीय हलचलों ने इसे ऊपर उठाकर आज की अद्भुत आकृति दी। लेकिन असली चमत्कार तो तब हुआ जब इंसानों ने 14वीं सदी में इन ऊंचाइयों पर रहना शुरू किया, धीरे-धीरे यहां कुल 24 मोनेस्ट्रीज बनाए गए, जिनमें आज भी छह मोनेस्ट्रीज सक्रिय हैं।
इनमें रहने वाले साधु सन्यासी आज भी उसी परंपरा को निभा रहे हैं। इन ऊंचाइयों पर बने हर मठ के भीतर छोटे-छोटे गर्म कक्ष हैं, जहां रहने के कमरे, पूजा स्थल, रसोई और भिक्षुओं की जीवन शैली के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। यानी यहां सिर्फ एक इमारत नहीं बल्कि पूरे छोटे-छोटे संसार बसाए गए हैं। कल्पना कीजिए, कभी यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को रस्सियों और लकड़ी की सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता था।
मेटियो की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है जब सूरज ढलने लगता है। एक ओर नीचे कलमका शहर की रोशनियां जगमगाती हैं और दूसरी ओर ऊपर खड़े यह पत्थर सुनहरी और लालिमा लिए हुए किसी सपनों की दुनिया जैसे चमकते हैं। यही कारण है कि मेटियो को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिला है और यह जगह हर साल लाखों लोगों को अपने रहस्यमय आकर्षण से बांध लेती है।
कास्टेलफोलित दी ला रोका, स्पेन
इंसान ऊंचाई से डरता है। यह तो आप भी जानते हो क्योंकि आप भी डरते हो। लेकिन स्पेन के कास्टेलफोलित दी ला रोका क्षेत्र में इंसानों ने ऐसा कर दिखाया है जिसे देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। यह जगह है कैस्टेल फोलेट डेलारो का, एक गांव जो देखने में मानो किसी दूसरी ही दुनिया का हिस्सा लगे। कल्पना कीजिए करीब 50 मीटर ऊंची और लगभग 1 किलोमीटर लंबी एक खड़ी चट्टान जिसके दोनों ओर गहरी घाटियां, आसपास फैले बड़े-बड़े पहाड़ और बीचोंबीच घने जंगल और इन्हीं सबके बीच इस चट्टान के किनारे टिका हुआ है पूरा का पूरा गांव।
यह जगह इतनी अनोखी लगती है कि पहली नजर में लगता है जैसे यह इंसानी बस्ती धरती पर नहीं बल्कि किसी रहस्यमई स्वप्नलोक में बसी हो। कास्टेलफोलित दी ला रोका की यह चट्टान साधारण पत्थर की नहीं बल्कि बसाल्ट रॉक से बनी है जो लगभग 2 मिलियन वर्ष पुरानी है। यह चट्टान दरअसल ज्वालामुखी विस्फोट से बने लावे के ठोस हो जाने से तैयार हुई थी। यानी जिस पत्थर पर आज इंसान अपने घर बसाकर जी रहा है, वह कभी आग उगलता लावा था। सोचिए जरा, मौत से जन्मी चट्टान पर जीवन की पूरी एक नई दुनिया बस गई।
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इतिहासकार बताते हैं कि इस गांव की शुरुआत लगभग 1000 वर्ष पहले हुई थी। आज यहां करीब 100 घर बने हुए हैं और इन घरों में लगभग 1000 लोग रहते हैं। घरों का निर्माण उसी काले ज्वालामुखी पत्थर से किया गया है जिससे यह पूरे गांव को चट्टान का ही हिस्सा बना देते हैं। दूर से देखने पर लगता है मानो पत्थर के ऊपर नहीं बल्कि पत्थर के भीतर ही जीवन पल रहा हो। यहां केवल छोटे-छोटे घर ही नहीं बल्कि कुछ बड़े और ऐतिहासिक निर्माण भी हैं।
सबसे प्रमुख है सट सेल्वडोर चर्च जिसकी मीनार इस गांव को और भी रहस्यमई रूप देती है। साथ ही यहां के पत्थरों से बने पुराने रास्ते और घड़ीघर क्लॉक टावर इस जगह को मध्ययुगीन किले जैसा बना देते हैं। जब शाम के समय सूरज पहाड़ों और जंगलों के पार ढलता है तो पूरा गांव सुनहरी रोशनी में ऐसा चमकता है जैसे धरती पर कोई परिलोक उतर आया हो।
कस्टेलफुलित दिलारोका सिर्फ एक गांव नहीं है बल्कि यह इंसानी साहस और प्रकृति की सबसे खतरनाक चुनौती के बीच खड़ा हुआ जीवित चमत्कार है। जहां मौत की गहराई बस एक कदम की दूरी पर है, वहीं लोग हजार सालों से बेखौफ अपने जीवन को आगे बढ़ा रहे हैं। यही है वह नजारा जो इंसान को डराता भी है और उसकी खूबसूरती से मदहोश भी कर देता है।
रोंडा, स्पेन
स्पेन, रोंडा शहर स्पेन के अंदुशिया प्रांत में स्थित है और यह पूरी तरह से एक विशाल खड़ी चट्टान के ऊपर बसा हुआ है। यह चट्टान अपने आसपास की भूमि से लगभग 120 मीटर ऊंची है। शहर का निर्माण इस चट्टान के दोनों किनारों पर किया गया है और यह खड़ी चट्टान शहर को डरावना भी बनाती है और देखने में बेहद आकर्षक भी। शहर की कुल चौड़ाई लगभग 1 किलोमीटर है और इसका क्षेत्रफल लगभग 10 लाख वर्ग मीटर में फैला हुआ है।
रोंडा का निर्माण लगभग 2000 वर्ष पहले हुआ था। शुरुआती लोग सुरक्षा और प्राकृतिक किले का लाभ उठाने के लिए इस ऊंचाई पर आए थे। धीरे-धीरे यहां घर और गलियां बनती गईं और शहर विकसित हुआ। शहर में लगभग 5000 घर हैं और यहां करीब 35,000 लोग रहते हैं। विशेष रूप से यहां के घर सफेद रंग के हैं जो सूर्य की रोशनी में और भी चमकदार और शानदार दिखाई देते हैं। रौंदा का सबसे प्रसिद्ध और रोमांचक निर्माण है पोएनएबो।
यह पुल लगभग 100 मीटर ऊंचाई पर खाई के ऊपर बना है और शहर के दो हिस्सों को जोड़ता है। इसके नीचे की खाई इतनी गहरी और खतरनाक है कि देखने मात्र से ही रोमांच और डर दोनों का एहसास होता है। इस शहर में कई पुराने और रहस्यमई निर्माण हैं, जैसे चर्च ऑफ सामरिलायर, पुराने महल और हवेलियां जो सदियों पुराने हैं। कहा जाता है कि पुराने समय में इन गलियों और महलों में रहस्यमई घटनाएं होती थीं: अचानक धुंध छा जाना, रहस्यमई आवाजें और पत्थर पर बने पुराने दरवाजों की खटखट।
रोंडा की सबसे रोमांचक बात यह है कि यह शहर सीधे खड़ी चट्टान पर बसा है। नीचे की खाई इतनी गहरी है कि इसे देखकर पैरों तले जमीन खिसकती हुई महसूस होती है। लेकिन इसके बावजूद लोग यहां सदियों से सुरक्षित और साहसी जीवन जी रहे हैं। शहर के सफेद घर, खाई और पुल मिलकर ऐसा दृश्य बनाते हैं कि हर आगंतुक स्तब्ध रह जाता है।
शहर की खूबसूरती और रहस्य सबसे ज्यादा तब दिखाई देते हैं जब सूर्य ढलता है। सूर्य की लालिमा में सफेद घर और खाई का दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी जादुई दुनिया में कदम रख दिया हो। रोंडा सिर्फ एक शहर नहीं है। यह मानव साहस और प्राकृतिक चुनौती का जीवित उदाहरण है। यहां डर और खतरा दोनों मौजूद हैं, फिर भी इंसान ने अपनी मेहनत और हिम्मत से घर बनाए और अपनी दुनिया बसाई।
मनरोला, इटली
इटली के प्रसिद्ध सिंकटेरे क्षेत्र में स्थित एक छोटा और बेहद खूबसूरत गांव। मनरोला समुद्र और खड़ी चट्टानों के बीचों-बीच बसा हुआ है। यह गांव समुद्र और आसपास की चट्टानों के स्तर से लगभग 70 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। गांव का कुल क्षेत्रफल लगभग 10,000 वर्ग मीटर है। गांव में लगभग 300 घर हैं और यहां स्थाई रूप से लगभग 350 लोग रहते हैं।
गांव के घर मुख्य रूप से रंग बिरंगे और छोटे आकार के हैं: पीले, गुलाबी, नीले और लाल रंग के जो सूर्य की रोशनी में और भी चमकते हैं। घरों के बीच संकरी गलियां, छोटे-छोटे सीढ़ीदार रास्ते और बालकनी गांव को एक जादुई और चित्रपट जैसा दृश्य देती हैं। इतिहासकार बताते हैं कि मनरोला लगभग 700 वर्ष पुराना है। यहां इंसान पहले मछुआरों और उनके परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान के रूप में आया था।
धीरे-धीरे यहां घर और गलियां बनती गईं और गांव विकसित हुआ। मनरोला की सबसे आकर्षक बात यह है कि यह गांव सीधे खड़ी चट्टानों पर बसा है। समुद्र की लहरें और तेज हवा यहां के दृश्य को और भी अद्भुत बनाती हैं। यहां के कुछ घर बड़े और वास्तुकला में देखने लायक हैं, लेकिन अधिकांश छोटे और रंगीन हैं। मनरोला हर साल लगभग 2 लाख पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करता है। लोग यहां आकर समुद्र, खड़ी चट्टानों और रंग बिरंगे घरों के अद्भुत दृश्य का आनंद लेते हैं।
यहां की गलियों में चलना, समुद्र की ओर झुकती चट्टानों पर बैठना और सूर्यास्त का नजारा देखना हर आगंतुक के लिए यादगार अनुभव बन जाता है। मनरोला सिर्फ एक गांव नहीं है। यह प्रकृति, साहस और मानव चतुराई का अद्भुत संगम है। जहां खड़ी चट्टान और समुद्र चुनौती पेश करते हैं, वहीं इंसान ने अपनी मेहनत और हिम्मत से यहां घर बनाए और अपनी दुनिया बसाई। यही कारण है कि मनरोला देखने में पेंटिंग जैसा लगता है। लेकिन यह पूरी तरह सजीव और वास्तविक है। मनरोला हर साल लगभग 2 लाख पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करता है। लोग यहां आकर समुद्र, खड़ी चट्टानों और रंग-बिरंगे घरों के अद्भुत दृश्य का आनंद लेते हैं।
बोनिफैसिओ, फ्रांस
बोनिफैसिओ, फ्रांस के कॉर्सिका द्वीप के सबसे दक्षिणी किनारे पर बसा हुआ एक ऐतिहासिक शहर है। यह सीधा सफेद चूना पत्थर की खड़ी चट्टानों पर टिका हुआ है। समुद्र की लहरें इन चट्टानों से टकराती हैं और ऊपर बसा हुआ यह शहर मानो हवा में तैरता हुआ दिखाई देता है। यहां की चट्टानें समुद्र से लगभग 70 मीटर ऊंची हैं, और बोनिफैसिओ का पुराना इलाका इन्हीं चट्टानों के ऊपर फैला हुआ है।
शहर का कुल क्षेत्र लगभग 15 वर्ग किलोमीटर है। यहां स्थाई रूप से करीब 3000 निवासी रहते हैं, जबकि गर्मियों में पर्यटकों की वजह से यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। शहर में सैकड़ों ऐतिहासिक इमारतें और मकान हैं। जिनमें से ज्यादातर मध्ययुगीन समय में बने थे। यह मकान चट्टानों के किनारे तक बने हुए हैं और उनकी खिड़कियां सीधे गहरी खाई की ओर खुलती हैं। बोनिफेसियो की स्थापना 828 ईसवी में हुई थी, जब टस्कनी के शासक बोनिफेस डू ने यहां एक किले का निर्माण कराया। उसी शासक के नाम पर इस शहर का नाम बोनिफैसिओ पड़ा।
धीरे-धीरे यह जगह सामरिक और समुद्री व्यापार का बड़ा केंद्र बन गई। यहां का किला और दीवारें अब भी इस लंबे इतिहास की गवाही देती हैं। बोनिफैसिओ में संकरीड़ी गलियां, पुरानी पत्थर की सीढ़ियां, चर्च, पुराने किले और समुद्र की ओर खुलने वाले शानदार नजारे मौजूद हैं। यहां हर जरूरी सुविधा उपलब्ध है: बाजार, रेस्टोरेंट, होटल, बंदरगाह और नावों के लिए सुरक्षित खाड़ी। हर साल लगभग 10 लाख से भी ज्यादा पर्यटक यहां घूमने आते हैं। लोग यहां के मध्ययुगीन किले, समुद्र के ऊपर लटके घर और खाई के किनारे बने रास्ते देखने आते हैं।
बोनिफैसिओ से पास का सार्डिनिया द्वीप साफ दिखाई देता है और दोनों जगहों के बीच सिर्फ 12 कि.मी. का समुद्र है। बोनिफैसिओ की खासियत यह है कि यह सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि इतिहास, रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का संगम है, समुद्र, ऊंची चट्टानें और ऊपर बसा हुआ प्राचीन शहर। यह सब मिलकर इसे दुनिया के सबसे अनोखे स्थानों में शामिल करते हैं।
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