Vitamin D का सेवन कई ज़रूरी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है

Vitamin D को आमतौर पर ‘धूप का विटामिन’ कहा जाता है क्योंकि यह हमारे शरीर की कई ज़रूरी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। यह न सिर्फ़ हड्डियों को मज़बूत बनाता है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बेहतर बनाता है, जिससे शरीर बीमारियों से लड़ पाता है। हालाँकि, हाल के दिनों में विटामिन डी सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल इतना बढ़ गया है कि अब ओवरडोज़ लेने की समस्या आम हो गई है।
बहुत से लोग मानते हैं कि ज़्यादा विटामिन डी लेने से स्वास्थ्य बेहतर होगा, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। ज़्यादा विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के स्तर को असामान्य रूप से बढ़ा सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
जब कोई व्यक्ति ज़रूरत से ज़्यादा विटामिन डी ले लेता है, तो उसके खून में कैल्शियम का स्तर काफ़ी बढ़ जाता है, जिसे ‘हाइपरकैल्सीमिया’ कहते हैं। इस अतिरिक्त कैल्शियम को छानने के लिए किडनी को काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है। आगे चलकर, यह कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। आपको किडनी में कैल्शियम जमा होना, पथरी, किडनी डैमेज, किडनी फेलियर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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एक केस स्टडी में पाया गया है कि विटामिन डी की अधिक मात्रा न केवल स्व-चिकित्सा के कारण, बल्कि कभी-कभी डॉक्टर की गलती से भी हो सकती है। शुरुआती लक्षण इतने हल्के होते हैं कि लोग उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
विटामिन डी के अत्यधिक सेवन से पेट खराब हो सकता है, जिससे लगातार मतली, उल्टी और पेट दर्द हो सकता है। इसके अलावा, गुर्दे अतिरिक्त कैल्शियम को बाहर निकालने की कोशिश करते हैं, जिससे बार-बार बाथरूम जाना पड़ सकता है और अत्यधिक प्यास लग सकती है। कैल्शियम के असंतुलन से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
अतिरिक्त कैल्शियम मस्तिष्क को प्रभावित करता है, जिससे भ्रम, चिड़चिड़ापन या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है। पीठ के निचले हिस्से या कमर के किनारे दर्द होना, जो गुर्दे की पथरी का संकेत हो सकता है। अगर गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, तो शरीर में पानी जमा हो जाता है, जिससे पैरों में सूजन हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
ज़्यादातर वयस्कों के लिए, प्रतिदिन केवल 400 से 1,000 IU (अंतर्राष्ट्रीय इकाइयाँ) विटामिन डी पर्याप्त है। हालाँकि, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक 4,000 IU से ज़्यादा खुराक लेता है, तो समस्याएँ शुरू हो सकती हैं। 8,000-12,000 IU प्रतिदिन जैसी ज़्यादा खुराक शरीर के लिए विषाक्त हो सकती है। कई लोग गलती से रोज़ाना 60,000 IU कैप्सूल ले लेते हैं, जबकि इसे हफ़्ते में एक बार लेना चाहिए, जो आगे चलकर बहुत खतरनाक हो सकता है।
ओवरडोज़ से बचने के तरीके
कोई भी विटामिन डी सप्लीमेंट लेने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें। एक साथ कई विटामिन डी उत्पाद (जैसे मल्टीविटामिन + हाई डोज़ कैप्सूल) न लें। दवा पर लिखी निर्धारित खुराक का पालन करें। अगर आप लंबे समय से उच्च खुराक ले रहे हैं, तो नियमित रूप से विटामिन डी और कैल्शियम की जाँच करवाएँ।
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