इसरो का नया कदम: स्वदेशी तकनीक से पहली मानवयुक्त उड़ान

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-: ISRO Human Space Mission :-
भारत ने अंतरिक्ष अनुसंधान में तेज़ी से प्रगति की है। चंद्र मिशन की सफलता के बाद, भारत ‘गगनयान’ मिशन के ज़रिए लोगों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयार है। भारत ने अंतरिक्ष अनुसंधान में तेज़ी से प्रगति की है । इसरो पहले ही इस बात पर परीक्षण कर चुका है कि लोगों को अंतरिक्ष में कैसे भेजा जाए और उन्हें सुरक्षित वापस कैसे लाया जाए।
इसरो 400 किलोमीटर लंबी कक्षा में लोगों को भेजने की तैयारी कर रहा है। इसरो ने यह भी तय कर लिया है कि अंतरिक्ष में किसे भेजा जाएगा। इसरो ने इस मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया है, जिनके नाम हैं बालकृष्णन नायर, अंगद प्रताप, अजीत कृष्णन और शुभांशु शुक्ला।
इसरो अंतरिक्ष यान के लिए तैयार
इसरो प्रमुख वी. नारायण ने कहा कि अंतरिक्ष यान की प्रारंभिक परीक्षण उड़ान इसी साल दिसंबर में शुरू होगी। अंतरिक्ष यात्री सुभांशु शुक्ला ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा, “भारत मानव सहित अंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार है।” अब बस कुछ दिन इंतज़ार की बात है।
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उन्होंने कहा, “यह हर भारतीय के लिए एक बड़ी जीत है। इसरो और पूरा भारत इस सपने को साकार करने के लिए तैयार है।” एक अन्य अंतरिक्ष यात्री पी. बालकृष्णन ने कहा, “यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। इस बार हमारा समय आ गया है। भारत अंतरिक्ष में मानवयुक्त अंतरिक्ष यान भेजने के लिए तैयार है।”
एक्सिओम-4 से प्राप्त अनुभव
एक्सिओम-4 मिशन के सदस्यों में से एक शुभांशु शुक्ला 16 अगस्त को स्वदेश पहुंचे। उन्होंने अंतरिक्ष में 18 दिन बिताए।
अपने देश पहुँचने के बाद, अब वह अंतरिक्ष में अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह अंतरिक्ष में जा पाएँगे। इसलिए, अगर वह अंतरिक्ष में जा सकते हैं, तो भारत के बाकी बच्चे भी अंतरिक्ष में जा सकते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इसरो के पास भारतीय अंतरिक्ष केंद्र और अंतरिक्ष यान सहित कई नई परियोजनाएँ हैं। शुभांशु शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष स्टेशन पर रहते हुए प्राप्त अनुभव अंतरिक्ष मिशन के दौरान काम आएगा। अगर सब कुछ ठीक रहा और मिशन सफल रहा, तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत अपनी तकनीक का इस्तेमाल करके लोगों को अंतरिक्ष में भेजने वाला दूसरा देश बन जाएगा।
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