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दुनिया की 5 सबसे महंगी लकड़ियां

आज हम बात करने वाले हैं दुनिया की उन पांच लकड़ियों के बारे में जिनकी कीमत सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। दोस्तों, आप सोचते होंगे कि दुनिया की सबसे महंगी लकड़ी लाल चंदन है, लेकिन यह बिल्कुल गलत है। लाल चंदन को लोग सिर्फ इसलिए खास मानते हैं क्योंकि पुष्पा मूवी में दिखाया गया है। वरना असली दुनिया में ऐसी लकड़ियां मौजूद हैं जिनका सिर्फ 1 किलो ही लाल चंदन के पूरे पेड़ के बराबर बिक जाता है।

अगरवुड ट्री

क्या आप सोच सकते हो कि एक पेड़ इतना महंगा हो कि वह सोने से भी कीमती हो? हम बात कर रहे हैं अगर वुड के बारे में। यह वह पेड़ है जो बाहर से साधारण दिखाई देता है। लेकिन इसके भीतर छुपा हुआ खजाना इसे दुनिया का सबसे रहस्यमय और कीमती पेड़ बनाता है। यह पेड़ भारत के असम, मेघालय, त्रिपुरा और दक्षिण पूर्व एशिया के घने जंगलों में पाया जाता है। इसका तना हल्का, भूरा, सीधा और सामान्य होता है।

पत्ते लंबे और हरे रंग के होते हैं। बाहर से साधारण दिखने वाला यह पेड़ अंदर से पूरी तरह अनमोल है। इसकी असली दौलत इसके भीतर बनने वाले काले और सुगंधित रेजिन में छुपी होती है। यह रेजिन तब बनता है जब पेड़ किसी चोट, फफूंद या संक्रमण से प्रभावित होता है। धीरे-धीरे यही रेजिन साधारण लकड़ी को महंगे अगर वुड में बदल देता है। 2025 के अनुसार अगर वुड के इस रेजिन की कीमत 1 किलो में 55 लाख से ₹80 लाख तक पहुंचती है। पूरा पेड़ उतना महंगा नहीं बिकता।

केवल वही पेड़ जिसकी उम्र 20 से 25 साल हो और जिसमें रेजिन की मात्रा अधिक हो करोड़ों में बिकता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आपके घर के मंदिरों में जो भी धूपबत्ती जलती है वही धूपबत्ती इस पेड़ से बनकर आपके घर तक पहुंचती है। इसी पेड़ से इत्र, औषधियां और सुगंधित लकड़ी भी तैयार की जाती है।

इसलिए इसकी कीमत इतनी अधिक है और यही अगरबुड़ को इतना खास और अनमोल बनाता है, इस पेड़ के पूरी तरह बड़े होने में लगभग 20 से 25 साल लगते हैं। इसलिए यदि आप इसकी खेती करना चाहते हैं, तो इसे अपने लिए ही मत लगाएं। आप इसे लगाएं, लेकिन इसके 30 साल बाद यह आपके आने वाले बच्चों के लिए एक सच्चा सोने का पेड़ बन सकता है जो उनके लिए अनमोल साबित होगा।

अफ्रीकन ब्लैक वुड ट्री

अफ्रीकन ब्लैकवुड का पेड़ केवल अफ्रीका के घने और दूरदराज जंगलों में पाया जाता है। यहां की मिट्टी और नमी इसे बढ़ने के लिए आदर्श वातावरण देती है। यह पेड़ पूरी तरह विकसित होकर अपना सही आकार लेने में लगभग 50 से 60 साल का समय लेता है। दिखने में अफ्रीकन ब्लैकवुड का तना काला, घना और बेहद मजबूत होता है। पत्तियां हरी, घनी और चमकदार होती हैं। अंदर से इसकी लकड़ी अत्यंत कठोर और भारी होती है और इसमें प्राकृतिक सुगंधित रेजिन भी होती है।

पूरी तरह विकसित होने के बाद इसका हर टुकड़ा अनमोल और अत्यंत मूल्यवान बन जाता है। इस लकड़ी से बनते हैं उच्च गुणवत्ता वाले वाद्य यंत्र जैसे बांसुरी, शहनाई और महंगी गिटार। इसके अलावा अफ्रीकन ब्लैकवुड से लकड़ी की कलाकृतियां, महंगे फर्नीचर, घर में उपयोग होने वाले चम्मच, कटोरे, चाकू और सजावटी सामान भी बनाए जाते हैं। अफ्रीकन ब्लैकवुड की लकड़ी की कीमत लगभग 8 से ₹1 लाख प्रति किलो होती है। यदि इसकी 1 किलो की कीमत इतनी है, तो पूरा सही आकार और गुणवत्ता वाला पेड़ करोड़ों रुपए में बिक सकता है।

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2025 में इसकी मांग इतनी बढ़ गई है कि इसका दाम आसमान छू रहा है। इसकी इतनी ज्यादा कीमत इसकी दुर्लभता और धीमी ग्रोथ की वजह से होती है। इस लकड़ी का असली मूल्य तब आता है जब यह पेड़ लगभग 80 से 100 साल पुराना होता है। तभी इसे काटकर महंगी कीमत में बेचा जा सकता है, और अफ्रीका में कई लोग इस लकड़ी को अवैध रूप से काटकर छुप कर बेचते हैं और मोटी रकम कमाते हैं।

एबोनी ट्री

एक ऐसा पेड़ जिसे पूरी दुनिया उसकी काली, चमकदार और पत्थर जैसी कठोर लकड़ी के लिए जानी जाती है, वह है एबनी ट्री जो मुख्य रूप से अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया के घने वनों में पाया जाता है। इस पेड़ में एक छोटा हल्का पीला सा फल भी लगता है। लेकिन असली कीमती चीज इसकी लकड़ी है जो इतनी घनी, मजबूत और चमकदार होती है कि इसे देखकर लगता है जैसे यह प्राकृतिक रूप से पॉलिश हो चुकी हो। एबनी ट्री को अपनी पूरी ताकत और आकार लेने में लगभग 60 से 70 साल लगते हैं और यह ऊंचाई में लगभग 10 से 15 मीटर तक बढ़ता है।

एबोनी का पेड़ अपनी पूरी या कटाई लायक उम्र तक पहुंचता है जो आमतौर पर 70 से 200 साल के बीच होती है। यह उसकी प्रजाति और बढ़ने के हालात पर निर्भर करता है। कुछ प्रजातियों की कुल उम्र 500 साल से ज्यादा भी हो सकती है। इस लकड़ी से बनते हैं रोजमर्रा के उपयोग वाले चम्मच, कटोरियां, कंघियां और छोटी सजावटी चीजें; हाथ और गर्दन में पहनने वाले काले गोल गहने; महंगे गिटार और पियानो के केपार्ट्स; लाखों की कीमत वाले लग्जरी सोफे और रॉयल फर्नीचर, कलाकारों द्वारा बनाई जाने वाली काली चमकदार मूर्तियां और सबसे खास रूप से एबनी से बनने वाली शतरंज की गोटियां जो राजा महाराजाओं के समय से ही राजसी शौक मानी जाती हैं।

एबनी ट्री की लकड़ी की कीमत लगभग 7 लाख से ₹15 लाख प्रति किलोग्राम होती है। लेकिन इतना महंगा सिर्फ वही लकड़ी होती है जिसकी उम्र 80 से 100 साल के बीच हो। हालांकि कोई-कोई प्रजाति ऐसी भी होती है जिसे उम्र के हिसाब से अलग-अलग कुछ डॉलर में भी खरीदा जा सकता है। इसकी कीमत इतनी ज्यादा इसलिए होती है क्योंकि जितनी पुरानी लकड़ी होती है उतनी काली, घनी और टिकाऊ होती है और इसे काटना और तराशना बहुत कठिन होता है। यही वजह है कि इबनी ट्री की लकड़ी को लोग काला हीरा भी कहते हैं।

पिंक आइवरी ट्री

एक ऐसा पेड़ है जिसे काटो तो अंदर से बिल्कुल पिंक रंग की चमकती लकड़ी निकलती है, जो दिखने में जितनी खूबसूरत है उतनी ही मजबूत भी है। इसका नाम है पिंक आइवरी ट्री। यह पेड़ दक्षिण अफ्रीका के कुछ ही इलाकों में पाया जाता है और घने जंगलों और साफ हल्की ऊंचाई वाली जगहों में ही इसकी वृद्धि होती है।

इस पेड़ को पूरी तरह परिपक्व होने में 50 से 60 साल लग जाते हैं। बहुत ही पुराना पेड़ 100 साल तक भी पुराना हो सकता है। तभी जाकर इसकी लकड़ी वह अनोखा चमक और गाढ़ा रंग पकड़ती है जिसके लिए इसे लोग हाथों हाथ खरीदते हैं। पेड़ देखने में मजबूत, घना और चमकदार होता है। अंदर से हल्का गुलाबी रंग लिए हुए लकड़ी की बनावट बेहद आकर्षक होती है।

इस लकड़ी से रोजमर्रा के उपयोग की टिकाऊ और सुंदर वस्तुएं बनाई जाती हैं, जैसे मजबूत कंघियां, सुंदर बॉक्स, कलाकारी वाली मूर्तियां, लग्जरी फर्नीचर के हैंडल, सजावटी सामान और संगीत वाद्य जैसे गिटार और पियानो के खास हिस्से। इस लकड़ी से बनी चीजों में कीड़े नहीं लगते, और यह मौसम, गर्मी और नमी के असर को लंबे समय तक झेल सकती है। कोई भी बाहरी रंग इसे और बेहतर नहीं बना सकता क्योंकि यह अपने आप में ही चमकदार, पिंक और आकर्षक है।

इस लकड़ी की कीमत, इसकी उम्र और पेड़ की साइज के हिसाब से तय होती है। अगर लकड़ी छोटे टुकड़ों में बेची जाए तो चारों ओर लगभग 1 फुट वाला एक टुकड़ा ₹7,200 के आसपास बिकता है। लेकिन पूरे पेड़ की लकड़ी, जो कई दशक पुरानी और परिपक्व हो, उसकी कीमत लगभग 10 से ₹14 लाख तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि पिंक आइवरी की लकड़ी को दुनिया में लग्जरी माना जाता है और शौकीन इसे गर्व से खरीदते हैं। इस पेड़ से बनी हर वस्तु टिकाऊ और लंबी उम्र वाली होती है। सही देखभाल करने पर यह कई पीढ़ियों तक चली जाती है।

सैंडलवुड ट्री

आपने पुष्पा मूवी में देखा होगा वह लकड़ी जो इतनी खूबसूरती से दिखाई गई थी वही है सैंडलवुड ट्री यानी चंदन का पेड़। यह पेड़ भारत के दक्षिणी हिस्सों में पाया जाता है और ठंडे वातावरण में उगने के कारण इसका बढ़ना धीमा होता है। सैंडलवुड ट्री को पूरी तरह परिपक्व होने में लगभग 15 से 20 साल लगते हैं। यह पेड़ मजबूत और आकर्षक होता है और इसकी लकड़ी इतनी सघन होती है कि इसे छूने पर पत्थर जैसी मजबूती का एहसास होता है। चंदन दो प्रकार का होता है: सफेद चंदन और लाल चंदन। सफेद चंदन का सबसे खास हिस्सा इसका बीच का गोल हिस्सा होता है।

इसी हिस्से की लकड़ी ही उच्च गुणवत्ता वाली मानी जाती है। सफेद चंदन से मुख्यतः अगरबत्ती, सुगंधित तेल और परफ्यूम और कुछ दवाएं बनाई जाती हैं, जिनकी कीमत हजारों में या लाखों में भी पड़ सकती है। इसके बाहरी हिस्से का उपयोग कम किया जाता है क्योंकि वह लकड़ी के रूप में कम मूल्यवान होती है। लाल चंदन की लकड़ी अपने पूरे लाल रंग और चमक के कारण बहुमूल्य मानी जाती है। इस लकड़ी से सेलग्जरी फर्नीचर, देवताओं और जानवरों की मूर्तियां, सजावटी कलाकृतियां, सोफा और लग्जरी चेयर जैसे बड़े और कीमती सामान बनाए जाते हैं।

लाल चंदन का पूरा लाल हिस्सा ही सबसे अधिक मांग में रहता है। पुष्पा मूवी में लाल चंदन का इस्तेमाल इसलिए किया गया ताकि वह सफेद चंदन से ज्यादा आकर्षक और सुंदर लगे। लेकिन वास्तविक बाजार में सफेद चंदन की मांग ज्यादा होती है। कीमत की बात करें तो छोटे-छोटे लकड़ी के टुकड़े जिन्हें छोटे सामान बनाने के लिए भेजा जाता है। लगभग ₹7200 प्रति किलो में बिकते हैं। पूरा पेड़ जब यह पूरी तरह से विकसित और परिपक्व हो जाता है तो बाजार में लगभग 8 से ₹1 लाख में बिकता है।

लाल चंदन के बड़े और उच्च गुणवत्ता वाले टुकड़े इससे भी महंगे होते हैं। यदि आप इस पेड़ की खेती करना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि इसके आसपास जहरीले सांप आकर्षित हो जाते हैं। फिर भी यदि आप इसकी खेती करना चाहते हैं तो बाजार में इसका पौधा केवल 200 से ₹250 में उपलब्ध है। सही देखभाल और धैर्य रखने पर यह पेड़ आपको 15 से 20 साल के भीतर ही करोड़पति बना सकता है।

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