शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है 3 पंखुड़ियों वाला पान का पत्ता ही, जानिए क्या है रहस्य?

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सावन आते ही भारत के कोने-कोने से शिव मंदिरों में बजने वाली घंटियों की आवाज़ गूंजने लगती है। भोलेनाथ के भक्त उनके चरणों में जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं।
सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की पुरानी परंपरा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र शिव को शीतलता प्रदान करते हैं। पुराणों में कहा गया है कि बेल वृक्ष की उत्पत्ति देवी लक्ष्मी की तपस्या से हुई थी, इसलिए इसे शुभ माना जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शिवलिंग पर तीन पंखुड़ियों वाला कमल ही क्यों चढ़ाया जाता है?
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बेलपत्र के तीन पत्ते आम नहीं हैं। इन्हें तीन देवताओं – ब्रह्मा, विष्णु और भगवान – का प्रतीक माना जाता है। जब ये तीनों पत्ते आपस में जुड़ जाते हैं, तो ये तीन गुणों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। यह त्रिदेव सत्व (ज्ञान और शांति), रज (क्रिया और ऊर्जा), और तम (स्थिरता और ज्ञान) का भी प्रतीक हैं। इसे शिवलिंग पर चढ़ाना शिवजी को लोगों में सर्वोच्च मानने का प्रतीक है।
जब शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाया जाता है तो यह केवल एक परंपरा नहीं बल्कि एक गहन दर्शन है कि संपूर्ण विश्व के गुण और शक्तियां अंततः शिव को ही समर्पित हैं।
बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ बातों का ध्यान रखें। बेलपत्र फटे हुए नहीं होने चाहिए और डंठल साबुत होना चाहिए। ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए बेलपत्र चढ़ाएँ।
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