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प्राचीन सभ्यताओं के अनसुलझे राज़

आज आप जानने वाले हो इतिहास के 20 ऐसे रहस्यमय और चौंका देने वाले फैक्ट जिन्हें सुनकर आप हैरान रह जाओगे और सोचने पर मजबूर हो जाओगे कि भला ऐसा भी कभी हुआ होगा। इन तस्वीरों को जरा ध्यान से देखिए। प्राचीन समय में लोग एक साथ बैठकर बातें करते हुए अपना पेट हल्का करते थे, और वहीं एक दौर ऐसा भी था जब सिर दर्द का इलाज बेहद अजीब तरीकों से किया जाता था।

  • आज से लगभग 2000 वर्ष पहले जब रोमन साम्राज्य दुनिया की सबसे ताकतवर सभ्यताओं में गिना जाता था। उस समय लोगों के पास आज जैसा टूथपेस्ट या ब्रश नहीं हुआ करता था। लेकिन इसके बावजूद रोमन लोग सफाई को लेकर बेहद गंभीर थे। खासकर दांतों की सफेदी को लेकर। उस समय लोगों ने यह अनुभव किया कि कुछ समय तक रखा हुआ पेशाब बहुत तेज गंध देने लगता है और कपड़ों व धातुओं को साफ करने में मदद करता है। असल में ऐसा इसलिए होता था क्योंकि पेशाब में अमोनिया नाम का तत्व बन जाता है जो गंदगी हटाने में सक्षम होता है। इसी कारण रोमन लोग दांत साफ करने के लिए पेशाब का उपयोग करने लगे। यह तरीका इतना आम हो गया कि रोम के सम्राट वेसपासियन ने सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब इकट्ठा करने पर कर यानी टैक्स तक लगा दिया। आज हमें यह बात घिनौनी लग सकती है लेकिन उस समय इसे समझदारी और उपयोगी माना जाता था।
  • प्राचीन मिस्र में बिल्लियां सिर्फ एक जानवर नहीं थीं, बल्कि उन्हें देवी का रूप माना जाता था। मिस्र के लोग मानते थे कि बिल्ली देवी बैस्टेट का अवतार होती है जो घर-परिवार और बच्चों की रक्षा करती है। बिल्ली को शुभ और पवित्र माना जाता था। इसलिए उसे नुकसान पहुंचाना बहुत बड़ा अपराध था। अगर कोई व्यक्ति गलती से भी किसी बिल्ली को मार देता था, तो उसे सीधे मृत्युदंड दिया जाता था, चाहे वह आम आदमी हो या कोई ऊंचे पद का अधिकारी। इतिहास में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं जहां गुस्साई भीड़ ने कानून का इंतजार किए बिना खुद ही उस व्यक्ति को मार दिया जिसने बिल्ली को नुकसान पहुंचाया था। इससे यह साफ समझ में आता है कि उस समय धर्म और आस्था लोगों की जिंदगी पर कितनी गहरी पकड़ रखते थे।
  • तीन, आज भी जब नेपोलियन बोनापार्ट का नाम लिया जाता है, तो ज्यादातर लोग उसे छोटे कद वाला व्यक्ति मानते हैं। लेकिन यह एक ऐतिहासिक भ्रम है। सच्चाई यह है कि नेपोलियन की लंबाई लगभग 5 फुट 6 इंच थी, जो उस समय के यूरोप के औसत पुरुषों के बराबर मानी जाती थी। यह गलत धारणा इसलिए फैली क्योंकि फ्रांस और इंग्लैंड में लंबाई नापने की इकाइयां अलग-अलग थीं। अंग्रेजों ने जानबूझकर इस भ्रम को फैलाया ताकि नेपोलियन को कमजोर और हास्यास्पद दिखाया जा सके। धीरे-धीरे यह झूठ इतिहास का हिस्सा बन गया और आज भी लोग बिना जाने इसे सच मान लेते हैं।
  • फिल्मों और कार्टून में वाइकिंग योद्धाओं को अक्सर सिर पर बड़े-बड़े सींग वाले हेलमेट पहने दिखाया जाता है। लेकिन असल इतिहास में ऐसा कभी नहीं था। वाइकिंग योद्धा बेहद चालाक और व्यावहारिक थे। अगर वे सींग वाले हेलमेट पहनते तो युद्ध के दौरान दुश्मन आसानी से उन सींगों को पकड़ सकता था जिससे उनकी जान खतरे में पड़ जाती। इतिहासकारों के अनुसार सींग वाले हेलमेट की कल्पना 19वीं सदी में नाटकों और ओपेरा शो के लिए की गई थी ताकि किरदार ज्यादा डरावने और नाटकीय लगें। बाद में यही झूठ फिल्मों के जरिए पूरी दुनिया में फैल गया।
  • प्राचीन रोम में सार्वजनिक स्नान घर हुआ करते थे, जहां लोग रोज नहाने जाते थे और सामाजिक जीवन का आनंद लेते थे। लेकिन वहां भी अमीरी और गरीबी का साफ अंतर दिखाई देता था। गर्म पानी बनाना उस समय बहुत महंगा था क्योंकि लकड़ी और ईंधन सीमित मात्रा में उपलब्ध थे। इसलिए गर्म पानी केवल अमीर लोगों के लिए रखा जाता था। गरीब लोगों को या तो ठंडे पानी से नहाना पड़ता था या फिर गुनगुने पानी से ही संतोष करना पड़ता था। इससे यह साफ पता चलता है कि सुविधाओं की असमानता कोई नई बात नहीं है बल्कि यह समस्या हजारों साल पुरानी है।

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इतिहास के 5 सबसे महंगे सिक्के

  • आज हम मोबाइल या घड़ी देखकर तारीख और समय जान लेते हैं। लेकिन प्राचीन काल में यह काम इतना आसान नहीं था। उस समय लोगों ने प्रकृति को ही अपना कैलेंडर बना लिया था। सूरज की दिशा, उसकी परछाई और पत्थरों की स्थिति देखकर लोग दिन, महीने और मौसम का अंदाजा लगाते थे। इंग्लैंड का स्टोनहेंज इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां साल के खास दिनों में सूरज की किरणें बिल्कुल तय पत्थरों के बीच से होकर निकलती हैं। इससे लोगों को यह पता चल जाता था कि खेती का समय कब आएगा या मौसम कब बदलेगा। बिना आधुनिक विज्ञान के भी इंसान ने अपनी समझ और अनुभव से समय को मापने का तरीका खोज लिया था।
  • आज के समय में ऑपरेशन का नाम सुनते ही हम यह सोचकर निश्चिंत हो जाते हैं कि डॉक्टर पहले मरीज को बेहोश कर देंगे। लेकिन कुछ 100 साल पहले ऐसा कोई इलाज मौजूद नहीं था। जब किसी व्यक्ति का ऑपरेशन करना होता था तो उसे पूरी तरह होश में ही पकड़ कर सर्जरी की जाती थी। दर्द सहने के लिए कभी शराब पिला दी जाती थी तो कभी मरीज के मुंह में लकड़ी या कपड़ा दबा दिया जाता था। कई बार दर्द इतना ज्यादा होता था कि मरीज ऑपरेशन के दौरान ही दम तोड़ देता था। उस दौर के डॉक्टरों के लिए सर्जरी करना भी एक जोखिम भरा काम था, लेकिन उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था।
  • आज हम शौचालय को एक निजी जगह मानते हैं, लेकिन प्राचीन रोम में ऐसा बिल्कुल नहीं था। वहां सार्वजनिक शौचालयों में लोग एक सीधी पंक्ति में बिना किसी दीवार या पर्दे के बैठते थे और आपस में बातचीत करते हुए अपना काम करते थे। उस समय टॉयलेट पेपर जैसी कोई चीज नहीं थी, बल्कि एक स्पंज लगी लकड़ी होती थी जिसे सभी लोग बारी-बारी से इस्तेमाल करते थे। आज यह बात हमें बेहद अजीब और गंदी लग सकती है, लेकिन उस समय इसे सामाजिक जीवन का एक सामान्य हिस्सा माना जाता था।
  • प्राचीन मिस्र में जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती थी तो उसके शरीर को साधारण तरीके से नहीं छोड़ा जाता था बल्कि उसे मम्मी बनाकर सुरक्षित रखने की कोशिश की जाती थी। मम्मी बनाने की प्रक्रिया बहुत लंबी और जटिल होती थी। सबसे पहले शरीर के अंदर के अंग निकाल दिए जाते थे क्योंकि वही सबसे पहले सड़ते थे। इसके बाद शरीर के भीतर और बाहर तरह-तरह के सुगंधित तेल, राल और मसाले भरे जाते थे। इसका उद्देश्य सिर्फ बदबू रोकना नहीं था बल्कि मिस्र के लोग मानते थे कि मरने के बाद आत्मा फिर से शरीर में लौटती है। इसलिए शरीर का सुरक्षित और शुद्ध रहना बहुत जरूरी है। इन खुशबूदार पदार्थों की वजह से ममीयाँ हजारों साल तक सुरक्षित रह पाईं और आज भी हमें उस सभ्यता की झलक दिखाती हैं।
  • आज हम जिस शब्द सैलरी का इस्तेमाल करते हैं, उसकी जड़े प्राचीन रोम से जुड़ी हुई हैं। उस समय नमक बहुत कीमती चीज हुआ करता था क्योंकि उससे खाना सुरक्षित रखा जाता था और शरीर के लिए भी यह जरूरी था। रोमन सैनिकों को कई बार पैसे की जगह नमक दिया जाता था जिसे वे अपने परिवार के लिए इस्तेमाल करते थे या बेच सकते थे। लैटिन भाषा में नमक को साल्ट कहा जाता था, और यहीं से सैलरी शब्द निकला। इसका मतलब यह हुआ कि आज की नौकरी और वेतन की व्यवस्था की शुरुआत भी हजारों साल पुराने रोम से जुड़ी है।
  • मध्यकालीन यूरोप में सफाई को लेकर लोगों की सोच आज से बिल्कुल उलटी थी। उस समय यह माना जाता था कि ज्यादा नहाने से शरीर कमजोर हो जाता है और बीमारियां फैलती हैं। कई लोग सालों तक नहीं नहाते थे और सिर्फ कपड़े बदलने को ही सफाई समझते थे। अमीर लोग इत्र और खुशबू का ज्यादा इस्तेमाल करते थे ताकि बदबू छुपाई जा सके। इसी गलत सोच की वजह से यूरोप में कई भयानक बीमारियां फैलीं जिनमें लाखों लोग मारे गए। बाद में जब विज्ञान आगे बढ़ा तब लोगों को समझ आया कि सफाई बीमारी नहीं बल्कि सुरक्षा देती है।
  • प्राचीन यूनान में होने वाले ओलंपिक खेल आज के ओलंपिक से बिल्कुल अलग होते थे। उस समय खिलाड़ी कपड़े पहनकर नहीं बल्कि पूरी तरह नग्न होकर प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे। यूनानियों का मानना था कि मानव शरीर स्वयं में सुंदर और पवित्र है और उसे छुपाने की कोई आवश्यकता नहीं है। वे शरीर को देवताओं का वरदान समझते थे और उसका प्रदर्शन गर्व की बात मानते थे। यही कारण था कि दौड़, कुश्ती और अन्य खेल बिना कपड़ों के कराए जाते थे। महिलाओं को इन खेलों में भाग लेने की अनुमति नहीं थी और कई बार उन्हें दर्शक के रूप में भी आने की इजाजत नहीं मिलती थी। आज यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन उस समय यह सम्मान और परंपरा का प्रतीक थी।
  • प्राचीन कालमें राजा बनना जितना सम्मान की बात थी उतना ही खतरनाक भी था। सत्ता की लालसा में लोग राजा को जहर देकर मारने की कोशिश करते थे। इसी डर से राजाओं के पास एक खास आदमी होता था जिसे भोजन छकने वाला कहा जाता था। राजा के खाने से पहले वही व्यक्ति सारा खाना खाता था। अगर कुछ समय तक उसे कुछ नहीं होता तभी राजा भोजन करता था। कई बार इन भोजन छखने वालों की जान चली जाती थी। लेकिन फिर भी यह पद बहुत अहम माना जाता था। इससे पता चलता है कि उस दौर में सत्ता के साथ डर और अविश्वास भी जुड़ा हुआ था।
  • आज हमें यह बात सामान्य लगती है कि धरती गोल है। लेकिन प्राचीन समय में बहुत से लोग मानते थे कि धरती चपटी है। उनका विश्वास था कि धरती एक समतल सतह है और उसके किनारों से नीचे गिरा जा सकता है। समुद्री यात्राएं बहुत खतरनाक मानी जाती थीं क्योंकि नाविकों को डर लगता था कि कहीं वे धरती के आखिरी छोर से नीचे ना गिर जाएं। बाद में जब खगोल विज्ञान और समुद्री यात्राओं का विकास हुआ तब धीरे-धीरे लोगों को समझ आया कि धरती गोल है। लेकिन यह सच स्वीकार करने में इंसान को सैकड़ों साल लग गए।
  • आज बिना फ्रिज के जिंदगी की कल्पना करना मुश्किल है। लेकिन प्राचीन रोम में लोग पहाड़ों से बर्फ लाकर अपने पेय पदार्थ ठंडे किया करते थे। अमीर लोग अपने नौकरों को दूर पहाड़ी इलाकों में भेजते थे, जहाँ से बर्फ काट कर लाई जाती थी। इस बर्फ को जमीन के नीचे गड्ढों में रखा जाता था ताकि वह जल्दी ना पिघले। फिर इसका इस्तेमाल शराब और शरबत ठंडा करने में किया जाता था। यह सुविधा सिर्फ अमीरों को ही मिलती थी जिससे उनकी हैसियत और शान दिखाई जाती थी।
  • आज मानसिक बीमारी का इलाज दवाइयों और डॉक्टरों से होता है, लेकिन प्राचीन समय में इसे भूत-प्रेत का असर माना जाता था। उस समय एक भयानक इलाज किया जाता था जिसे ट्रेपनेशन कहा जाता है। इसमें मरीज के सिर की हड्डी में छेद किया जाता था ताकि दिमाग के अंदर से बुरी आत्मा बाहर निकल जाए। यह प्रक्रिया बिना बेहोशी के होती थी और कई लोग दर्द या संक्रमण से मर जाते थे। आश्चर्य की बात यह है कि पुरानी खोपड़ियों में ऐसे छेद आज भी मिले हैं जिससे साबित होता है कि यह सच में किया जाता था।
  • कई 100 साल पहले डॉक्टर लगभग हर बीमारी का इलाज एक ही तरीके से करते थे। शरीर से खून निकालकर जोंक को शरीर पर चिपकाया जाता था ताकि वह खून चूस ले। लोगों को लगता था कि बुरा खून निकल जाने से बीमारी ठीक हो जाएगी। बुखार, दर्द, पागलपन, यहां तक कि सिर दर्द में भी यही इलाज किया जाता था। कई बार मरीज ज्यादा खून निकलने से मर भी जाते थे।
  • मध्यकालीन यूरोप में आज जैसे होटल, रेस्टोरेंट या पार्टी सिस्टम नहीं थे। जब लोग किसी दावत या समारोह में जाते थे तो उन्हें अपना चम्मच खुद साथ लेकर जाना पड़ता था। अगर किसी के पास चम्मच नहीं होता तो उसे खाना नहीं मिलता था। चम्मच एक  निजी वस्तु मानी जाती थी और इसे बेल्ट या जेब में रखा जाता था। अमीर लोगों के चम्मच सोने-चांदी के होते थे जिससे उनकी हैसियत पहचानी जाती थी। यह नियम उस समय बिल्कुल सामान्य माना जाता था।
  • 1890 के आसपास यूरोप के कुछ मेडिकल विश्वविद्यालयों में सिर दर्द के इलाज के लिए एक अजीब तरीका अपनाया जाता था। इस इलाज में मरीज के सिर पर लोहे का बर्तन या हेलमेट पहनाया जाता था और उसके ऊपर से जोरदार थपथपाहट या हल्की हथौड़े जैसी चोट दी जाती थी। डॉक्टरों का मानना था कि इससे दिमाग की नसों में जमी खराब ऊर्जा निकल जाएगी और सिर दर्द ठीक हो जाएगा। लेकिन वास्तव में इससे मरीज को चक्कर, तेज दर्द और कई बार दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचता था। आज के समय में इस इलाज को पूरी तरह खतरनाक और अवैज्ञानिक माना जाता है।
  • प्राचीन रोम में अगर कोई व्यक्ति अपने ही करीबी रिश्तेदार, खासकर माता-पिता की हत्या करता था, तो उसके लिए एक बहुत ही भयानक सजा तय थी जिसे पोयना खुलाई कहा जाता था। इस सजा में अपराधी को एक बड़े चमड़े के बोरे के अंदर कुत्ता, बंदर, मुर्गी और सांप के साथ बंद कर दिया जाता था। इसके बाद उस बोरे को नदी या समुद्र में फेंक दिया जाता था। रोमनों का मानना था कि ये जानवर अलग-अलग बुराइयों का प्रतीक हैं और अपराधी को समाज से पूरी तरह मिटा देना ही न्याय है। यह सजा डर फैलाने और रिश्तों की पवित्रता बनाए रखने के लिए दी जाती थी।

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