दुनिया के 5 सबसे खतरनाक सीढ़ियाँ

5 Most Dangerous Stairs in the World

5 Most Dangerous Stairs in the World

आज हम बात करने वाले हैं दुनिया की पांच सबसे खतरनाक और डरावनी सीढ़ियों के बारे में। यह कोई आम सीढ़ियां नहीं हैं। इन्हें देखकर ही दिल की धड़कन तेज हो जाती है और चढ़ने से पहले इंसान 100 बार सोचने पर मजबूर हो जाता है। एक गलत कदम और आप सीधे मौत के करीब पहुंच सकते हैं।

कमिनिटोस रेड ओल्ड स्टेयर्स, स्पेन

एक ऐसी सीढ़ी जहां चलते समय एक मिस और गेम फिनिश हो जाए, तो क्या आप उस पर चलने की हिम्मत कर पाओगे? स्पेन के मलागा प्रांत में पहाड़ों के बीच मौजूद कमिनिटोस आज भी दुनिया की सबसे खतरनाक सीढ़ियों में गिनी जाती है। इस सीढ़ी की लंबाई लगभग 7.5 कि.मी   है और इसका सबसे डरावना हिस्सा करीब 3 km. का है, जहां यह सीढ़ियां जमीन से लगभग 100 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ों से चिपकी हुई दिखाई देती हैं।

नीचे झांकते ही गहरी खाई और नुकीले पत्थर साफ दिखाई देते हैं, और जरा सी चूक इंसान को सीधा मौत के मुंह में पहुंचा सकती है। इस सीढ़ी का निर्माण 1901 से 1905 के बीच इंजीनियर राफेल बेनहूमिया ने करवाया था, और उस समय नीचे की सीढ़ी साधारण कंक्रीट और लोहे की छड़ों से बनाई गई थी। समय के साथ यही कंक्रीट वाली सीढ़ी टूटती चली गई और अलग-अलग वर्षों में यहां फिसलकर कम से कम पांच लोगों की मौत दर्ज की गई, जिसके बाद इसे मौत की सीढ़ी  कहा जाने लगा।

ऊपर की ओर जो सीढ़ी आज मौजूद है, वह भले ही हाल के समय में बनाई गई हो, लेकिन यह भी किसी भी तरह से आसान या सुरक्षित नहीं है। मजबूत स्टील और नए कंक्रीट से बनी होने के बावजूद इसकी चौड़ाई बेहद कम है। नीचे जालीदार फर्श से सीधा 100 मीटर नीचे की खाई दिखाई देती है और तेज हवा के झोंके चलते समय पैरों को हिला देते हैं। कई लोग यहां कदम रखते ही घबरा जाते हैं और सही तरीके से चल भी नहीं पाते।

ऊपर की यह सीढ़ी एल चोरों के इलाके से जुड़ी है, जबकि नीचे की पुरानी कंक्रीट वाली सीढ़ी 48 के पुराने क्षेत्र की याद दिलाती है। 2015 में इसे फिर से खोला गया, लेकिन आज भी यह सीढ़ी बहादुरी की असली परीक्षा लेती है। शायद इसी वजह से कमीनी तो दिलरे सिर्फ एक सीढ़ी नहीं, बल्कि आज भी जिंदगी और मौत के बीच झूलता हुआ वह खौफनाक अनुभव है, जहां हर कदम इंसान को अपनी हिम्मत पर शक करने पर मजबूर कर देता है।

स्टेयर्स ऑफ डेथ, पेरू

स्टेयर्स एक ऐसी सीढ़ी जहां पर चढ़ना मौत को तक से छूकर वापस आना जैसा है। क्या आप उसमें चढ़ पाएंगे? यह खौफनाक सीढ़ी पेरू देश के एंडीज पर्वतों में स्थित है और इसे पूरी दुनिया स्टेयर्स ऑफ डेथ, यानी मौत की सीढ़ियों के  के नाम से जानती है। माना जाता है कि यह सीढ़ी लगभग 500 वर्ष पुरानी है जिसे प्राचीन इंका सभ्यता के लोगों ने बनाया था। उस समय इसका उपयोग पहाड़ों के बीच आने-जाने और दुश्मनों से बचाव के लिए किया जाता था।

यह सीढ़ी लगभग 183 मीटर, अर्थात् 600 फीट, की ऊंचाई पर बनी हुई है। इसके कुल स्टेप्स 750 हैं और इसकी चौड़ाई इतनी कम है कि कई जगहों पर एक व्यक्ति का पूरा पैर भी ठीक से टिक नहीं पाता।  यहां तक कि कहीं-कहीं एक साथ दो लोग भी नहीं चल सकते। यदि चल पाए तो एक को दीवार से चिपक कर रहना पड़ता है। नीचे झांकते ही रूह कांप उठती है। इस सीढ़ी में अधिकांश स्टेप्स असमान टूटा फूटा और फिसलन भरा हुआ है। कहीं-कहीं यह दीवार से निकाले हुए पत्थर जैसे हैं।

जिन पर चढ़ते समय यदि टूट गया तो मौत तय है। यह सीढ़ी लगभग 60 से 70 डिग्री के कोण में सीधी खड़ी है। सबसे भयावह तथ्य यह है कि यहां कोई रेलिंग नहीं है। कोई सुरक्षा नहीं है और नीचे केवल असीमित गहरी खाई आपका इंतजार कर रही है। हल्की सी वर्षा या तेज हवा भी इस मार्ग को और अधिक खतरनाक बना देती है क्योंकि पत्थर तुरंत फिसलन भरे हो जाते हैं।

स्थानीय लोग मानते हैं कि इस सीढ़ी पर चलते समय अजीब सी आवाजें सुनाई देती हैं जैसे कोई पीछे से कदम रख रहा हो, और कहा जाता है कि यहां उन लोगों की आत्माएं भटकती हैं जो कभी इस सीढ़ी से फिसल कर नीचे गिर गए थे, और जो भी इस सीढ़ी से चढ़कर ऊपर पहुंच जाता है और फिर नीचे इस भयानक मार्ग को देखता है, उसे यकीन नहीं होता कि उसने अभी इसी रास्ते से यहां तक का सफर पूरा किया है। स्टेयर्स ऑफ डेथ कोई सामान्य मार्ग नहीं है। यह साहस, डर और मृत्यु के बीच की सबसे पतली रेखा है, जहां प्रत्येक कदम जीवन और मृत्यु का फैसला कर सकता है।

माउंट वाश आयरन चेन स्टेयर्स, चाइना

यह है चांगोंग झंडाओ, लंबे आसमान की लकड़ी की पटरी जिसे दुनिया की सबसे खतरनाक सीढ़ी, जिसे वे ‘माउंट हुआ शान के साउथ पीक की पूर्वी सीढ़ी’ कहते हैं, माउंट हुआ शान के साउथ पीक के पूर्वी किनारे पर बनी है। शंगसी प्रांत में शियान शहर से सिर्फ 120 कि.मी. दूर यह मौत की सीढ़ियां सिर्फ 700 साल से ज्यादा पुरानी हैं। युवान राजवंश (1271 से 1368 ईसवी) के समय ताऊस्ट पुजारी हेजन ने इसे बनवाया था।

वह अमर होने की साधना कर रहे थे और दुनिया से दूर रहकर ध्यान लगाना चाहते थे। इसलिए चट्टान में पत्थर के कील ठोक कर लकड़ी की पतली पट्टियां जड़ी और लोहे की जंजीरें लटका दी ताकि वह और उनके जैसे साधु ऊपर की गुफाओं और मंदिरों तक पहुंच सके। यह कोई साधारण सीढ़ियां नहीं। यह ताव धर्म की पवित्र चोटी पर पहुंचने का सीढ़ियां था। जहां इंसान अपनी आत्मा को आजमाता था।

अब सुनो खतरे की वो बातें जो दिल को चीर देंगी। पूरा सीढ़ियां सिर्फ 100 से 130 मीटर लंबा है। लेकिन तीन हिस्सों में बटा है और हर हिस्सा मौत का नया रूप है। पहला हिस्सा 40 मीटर की पत्थर की सीढ़ियां चट्टान में काटी गई। इतनी खड़ी और संकरी कि लगता है सीधे आसमान से लटकी हैं। यह सीढ़ियां चट्टान के साथ-साथ बनी है। जहां पैर रखते ही नीचे अनंत खाई नजर आती है। लोहे की जंजीरें सहारा देती हैं। लेकिन हर कदम पर लगता है कि शरीर का बैलेंस खो जाएगा और तुम सैकड़ों मीटर नीचे गिर जाओगे।

यह हिस्सा शुरुआत में ही दिल की धड़कन तेज कर देता है क्योंकि यहीं से असली डर शुरू होता है और सबसे भयानक हिस्सा 50 मीटर की लकड़ी की पटरी, सिर्फ 30 सेंटीमीटर चौड़ी दो लकड़ी की पट्टियां चट्टान पर जड़ी हुई, कोई रेलिंग नहीं, सिर्फ लोहे की जंजीरें दीवार में ठोंकी हुई जिन्हें मौत की तरह पकड़ना पड़ता है।

नीचे अनंत अंधेरा 300 मीटर से ज्यादा गहरा खड, हवा का एक झोंका, एक फिसलन या एक गलत कदम और तुम्हारी चीखें भी पहुंचने से पहले खत्म हो जाती हैं। कई जगहों पर हारनेस लगाते हैं अब। लेकिन पहले सिर्फ जंजीरें थीं। एक गलती मतलब मौत। अफवाह है कि हर साल 100 लोग इस सीढ़ियों पर गिरकर मर जाते हैं।

हालांकि अब सुरक्षा बढ़ गई है, लेकिन खतरा अभी भी वैसा ही है। भीड़ में लोग एक दूसरे को पार करने के लिए जंजीर से अलग होते हैं, और तभी हादसे होते हैं। यह सीढ़ियां सिर्फ चढ़ाई नहीं, यह इंसान की हिम्मत, डर और मौत का इम्तिहान है, जहां हर कदम पर लगता है कि अगला कदम आखिरी हो सकता है। यह है माउंट हुआ शान की आयरन चेन स्टेयर्स, जहां स्वर्ग की सीढ़ियां नर्क से गुजरती हैं।

हाफ डोम केबल रूट, यूएसए

तुम योसिमिटी नेशनल पार्क, कैलिफोर्निया , यूएसए में खड़े हो। सामने है हाफ डोम, एक विशाल ग्रेनाइट का पहाड़ जिसकी चोटी लगभग 8800 फीट (2680 मीटर) ऊंचाई पर है। यह जगह योसिमिटी वैली से लगभग 16 कि.मी. की दूरी पर है , और यहां पहुंचने के लिए तुम्हें पूरा साहस और धैर्य चाहिए। यह चढ़ाई सिर्फ आम रास्ता नहीं है, बल्कि हाफ डोम केबल रूट है, एक ऐसा लेजेंड्री मार्ग जिसे देखकर ही रोमांच बढ़ जाता है।

यह चढ़ाई लगभग 400 फीट (120 मीटर) लंबी है और इसकी चौड़ाई सिर्फ 2 से 3 फीट है। इसलिए हर कदम पर तुम्हें अपनी संतुलन क्षमता का पूरा उपयोग करना पड़ता है। चढ़ाई का सीधा कोण लगभग 45 से 50° तक है। कुछ हिस्सों में लगभग पूरी तरह सीधी वर्टिकल भी लग सकती है। यहां लगी दो मजबूत लोहे की जंजीरें ही तुम्हारा सहारा है। हर कदम पर हाथ और पैर दोनों का परफेक्ट कोऑर्डिनेशन चाहिए। कभी-कभी लगभग 20 से 30 लोग एक साथ ऊपर चढ़ते हैं। लेकिन भीड़ ज्यादा होने पर प्रतीक्षा करना पड़ता है।

यह मार्ग लगभग 100 साल पुराना है। क्योंकि योसेमिटी नेशनल पार्क ने इसे अर्ली 1900 में ऑफिशियल बनाया। पहले तो यहां केवल नेचुरल फुट होल्ड्स और छोटे स्टेप्स थे। लेकिन अब सेफ्टी के लिए केबल्स और कुछ ट्रेल इंप्रूवमेंट्स किए गए हैं। खतरनाक किस्सा। कुछ वर्षों पहले अनुभवी चढ़ाई करने वाले लोग भी स्लिप्स की वजह से चोटें ले चुके हैं, लेकिन नियमित निगरानी और सेफ्टी मेजर्स के कारण घातक दुर्घटनाएं बहुत कम होती हैं।

यहां हर साल लगभग 8000 से 10,000 लोग आते हैं जो इस साहसिक चढ़ाई का अनुभव लेने आते हैं। हाफ टोम केबल रूट सिर्फ चढ़ाई नहीं है; यह मानव की हिम्मत, धैर्य और साहस का अल्टीमेट टेस्ट है। नीचे खाई और ऊपर आकाश के बीच हर कदम पर एड्रिनलिन, थ्रिल और प्रकृति का अद्भुत संगम महसूस होता है।

कलावंटिन दुर्ग स्टेप्स, महाराष्ट्र

ये खौफनाक सीढ़ियां महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में पनवेल के पास पश्चिमी घाटों की गोद में स्थित हैं। मुंबई से लगभग 50 कि.मी. दूर ठाकुरवाड़ी गांव से इसका ट्रैक शुरू होता है। ये सीढ़ियां प्रबलगढ़ किले के पास एक अलग-थलग खड़ी चट्टानी चोटी पर बनी हुई हैं जो दूर से ही डर का एहसास करा देती हैं। माना जाता है कि ये सीढ़ियां लगभग 500 से 600 साल पुरानी हैं और इन्हें 15वीं शताब्दी में बनाया गया था। इनकी कुल ऊंचाई करीब 686 मीटर, यानी लगभग 2250 फीट है जो आसमान को छूती हुई प्रतीत होती है।

अंतिम चढ़ाई में लगभग 500 से 700 सीढ़ियां हैं। लेकिन हर सीढ़ी करीब 2 फीट ऊंची और बेहद खड़ी है। चौड़ाई इतनी कम है कि कई जगह सिर्फ एक से 2 फीट की पतली पट्टी बचती है, जहां एक समय में केवल एक ही व्यक्ति चल सकता है। दूसरी तरफ खुली हुई मौत की गहरी खाई। यह सीढ़ियां सबसे खतरनाक इसलिए मानी जाती हैं क्योंकि इन्हें लगभग 80 डिग्री की सीधी खड़ी चट्टान पर काटा गया है। यहां ना कोई रेलिंग है ना पकड़ने का सहारा।

बस नंगी चट्टान और नीचे हजारों फीट की गहराई। एक भी गलत कदम और गिरावट तय, जिसमें बचने की कोई संभावना नहीं रहती। मानसून के मौसम में यह सीढ़ियां और भी जानलेवा हो जाती हैं। जब पत्थर गीले होकर फिसलन भरे हो जाते हैं और तेज हवाएं संतुलन बिगाड़ देती हैं। कई लोग यहां सेल्फी लेते समय या लापरवाही में अपनी जान गमवा चुके हैं। ऊपर चढ़ते वक्त नीचे का नजारा ऐसा है कि सिर घूम जाए और दिल बैठने लगे जबकि उतरना इससे भी ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि पीछे मुड़कर देखने भर से चक्कर आ सकता है।

इतिहास में कई दर्दनाक हादसे दर्ज हैं। साल 2016 में हैदराबाद की 27 वर्षीय रचिता गुप्ता इस चोटी से गिर कर मारी गई जिनका शव लगभग 10 दिन बाद मिला। 2018 में पुणे के चेतन धांडे भी संतुलन खोकर जान गमवा बैठे। ऐसे कई लोग हैं जो इस रास्ते पर चढ़े लेकिन कभी वापस नहीं लौट सके। इन सीढ़ियों का नाम रानी कलावंतीन के सम्मान में रखा गया था। माना जाता है कि 15वीं शताब्दी में स्थानीय शासकों ने इन्हें निगरानी और सुरक्षा के उद्देश्य से बनवाया था ताकि पास के प्रबलगढ़ किले पर नजर रखी जा सके।

यह कोई पूरा किला नहीं है बल्कि एक प्राकृतिक चोटी है जिस पर बनी यह सीढ़ियां आज भी बीते समय की क्रूर सच्चाई बयान करती हैं। यह साधारण सीढ़ियां नहीं बल्कि मौत का एक खुला जाल है। यहां चढ़ने से पहले 100 बार सोचना पड़ता है क्योंकि एक बार रास्ता पकड़ लिया तो हर कदम जिंदगी और मौत के बीच का फैसला बन जाता है। जो इस रास्ते से ऊपर पहुंच जाते हैं और फिर नीचे देखते हैं उन्हें यकीन ही नहीं होता कि वे अभी-अभी इसी खतरनाक रास्ते से होकर यहां तक आए हैं।

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