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Egypt से शिव तक: आखिर क्या है शिव की तीसरी आँख का रहस्य

-: Shiva Third Eye :-

क्या भगवान शिव की तीसरी आंख सिर्फ विनाश का प्रतीक है या ज्ञान का भंडार? आखिर किस तरह से गौतम बुद्ध के मस्तक के केंद्र बिंदु से लेकर इजिप्ट की आई ऑफ होरस तक भगवान शिव के त्रिनेत्र से जुड़े हैं? और क्या आप भी भगवान शिव जैसा त्रिनेत्र हासिल कर सकते हैं?

आदि अनंत महादेव भगवान शिव एक ऐसे देव जिनके रहस्य आज तक वेस्टर्न साइंटिस्ट को सोच में डाले हुए हैं कि आखिर भगवान शिव किस तरह से मनुष्य सभी जीव जंतुओं और पृथ्वी संग संपूर्ण ब्रह्मांड को नियंत्रित करते हैं। अब इसी पहल में वैज्ञानिक भगवान शिव के तीसरे नेत्र के रहस्य को सुलझाने में लगे हैं। उन्होंने कई ऐसे रहस्य ढूंढ निकाले हैं जो आपके भी होश उड़ा देंगे।

2013 यूरोप में स्टोन एज पेंटिंग्स का एक ऐसा समूह मिला जिसमें तीसरी आंख को साफ-साफ देखा जा सकता है। लेकिन सवाल यह है कि उस समय के लोगों ने आखिर किसको देखकर ऐसी चित्रकला बनाई होगी? क्या वह सब भगवान शिव को पहले से ही पहचानते थे? खैर यह आज भी एक रहस्य है। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। इजिप्शियन माइथोलॉजी में थर्ड आई से जुड़े ऐसे रहस्य छुपे हैं जो यकीनन आपके होश उड़ा देंगे।

द थर्ड आई कनेक्शन बिटवीन इजिपशियंस एंड हिंदूज़्म

इजिप्ट में थर्ड आई को द आई ऑफ होरस कहा जाता है, और यह प्राचीन मिस्र के आकाश देवता थे, जिन्हें आमतौर पर एक बाज के रूप में देखा गया है और बताया गया है। जैसे भगवान शिव की दोनों आंखें सूर्य और चंद्रमा का प्रतीक हैं, ठीक उसी तरह होरस की आंखें भी सूर्य और चंद्रमा का प्रतीक मानी गई हैं।

होरस की आंख सुरक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्स्थापना का केंद्र मानी जाती है। यह होरस देवता की उस कहानी से भी जुड़ी है जिसमें उन्होंने अपने पिता ओसिरस को पुनर्जीवित करने के लिए अपनी आंख का इस्तेमाल किया था। वहीं बौद्ध धर्म में भी इस तीसरी आंख की सहायता से गौतम बुद्ध ने मोक्ष और ज्ञान की प्राप्ति की थी। आप उनकी हर तस्वीर में बिंदी की तरह दिखने वाली तीसरी आंख को साफ तौर पर देख सकते हैं।

थर्ड आई ऑफ लॉर्ड शिवा

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वहीं अगर सनातन धर्म की दृष्टि से देखा जाए तो शिव की तीसरी आंख उनके माथे के बिल्कुल केंद्र में है जो खुलने पर आंख की ऐसी लपट छोड़ती है जिसकी चपेट में आते ही दुनिया भी नष्ट हो सकती है। हमारे पुराणों में भी वर्णित है कि भगवान शिव की तीसरी आंख खुलने पर कामदेव तक भस्म हो गए थे। कहते हैं उनकी तीसरी आंख से रचना होती है और इसी से विनाश। इसीलिए उन्हें संघार का देवता भी कहा जाता है।

उन्हें अक्सर त्र्यंबक देव के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘तीन आंखों वाला भगवान’। उनकी दाहिनी आंख को सूर्य और बाईं आंख को चंद्रमा कहा जाता है, जबकि अग्नि उनकी तीसरी आंख है। सनातन धर्म के नजरिए से उनकी दोनों आंखें भौतिक दुनिया में उनकी गतिविधि को संचालित करती हैं, वहीं उनकी तीसरी आंख संसार के परे भी देख सकती है।

पावर्स ऑफ थर्ड आई

हमारे वेदों के अनुसार यह नेत्र उस जगह पर मौजूद है जहां मानव शरीर में आज्ञा चक्र नामक एक महत्वपूर्ण चक्र होता है। आज्ञा चक्र का अर्थ है हमारे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा की शक्ति, और इस चक्र को जागृत करने का अर्थ है मानव शरीर में संपूर्ण आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा फ्लो उत्पन्न करना जिससे एक साधारण मनुष्य को देवताओं जैसी शक्तियां प्राप्त हो जाती हैं।

कहते हैं इसी आज्ञा चक्र के स्थान पर आत्मा का ज्ञान केंद्रित होता है। जो व्यक्ति इस ऊर्जा को, इस शक्ति को जागृत कर लेता है उसे सभी प्रकार की शक्तियां प्राप्त हो जाती हैं। इस ऊर्जा के जरिए व्यक्ति ब्रह्मांड में सभी कुछ आसानी से देख सकता है।

साइंटिफिक पावर्स ऑफ थर्ड आई

अगर इसे मेडिकल साइंस की दृष्टि से समझे तो आप पाएंगे कि मस्तिष्क के दो भागों के बीच में एक पीनियल ग्लैंड होता है। यह सोने और जागने का ऐसा चक्र है जो लगभग हर 24 घंटे ऑन मोड पर रहता है। इसका काम है एक हार्मोन को छोड़ना जिसे मेलाटोनिन हार्मोन कहते हैं जो आपकी नींद को नियंत्रित करने में मदद करता है।

वहीं जर्मन साइंटिस्ट का ऐसा मानना है कि इस पीनियल ग्लैंड के द्वारा दिशा ज्ञान भी प्राप्त होता है। अगर आपका पीनियल ग्लैंड आपके वश में आ गया तो आप बिना सोए कई हजार वर्षों तक जीवित रह सकते हैं। साथ ही इससे आप किसी को भी आसानी से सम्मोखित कर सकते हैं। इसमें पाया जाने वाला मेलाटोनिन हार्मोन मनुष्य को ज्यादा समय तक ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

अब यह ग्लैंड बहुत ही लाइट सेंसिटिव होता है। आप भले ही अंधे हो जाओ लेकिन आपको लाइट का चमकना जरूर दिखाई देगा जो इसी पीनियल ग्लैंड के कारण होता है।यदि आप लाइट का चमकना देख सकते हैं तो आप फिर सब कुछ देखने की क्षमता रखते हैं। यही वो पीनियल ग्लैंड है जो ब्रह्मांड में कहीं भी किसी भी समय को देखने का माध्यम है। यानी आप त्रिकालदर्शी बन जाते हो।

इसके जागृत होने पर कहा जाता है कि व्यक्ति के ज्ञान चक्षु खुल गए। फेमस हॉलीवुड मूवी लूसी को आप सभी ने देखा ही होगा जिसमें बताया गया है कि अगर दिमाग 100% तक काम करने लग जाए तो मनुष्य इंसान क्या-क्या कर सकता है। तो अब आप समझ ही गए होंगे कि यह तीसरा नेत्र सिर्फ भगवान शिव के पास ही क्यों मौजूद है?

भगवान शिव मानव का शुद्धतम स्वरूप है। वह ब्रह्मांड में सब कुछ देख सकते हैं। वह अतीत में भी झांक सकते हैं। वर्तमान पर काबू रख सकते हैं और भविष्य को भी आसानी से देख सकते हैं। वो त्रिकालदर्शी हैं। वही हमारे पुराणों के अनुसार भगवान के तीनों नेत्रों को त्रिकाल का प्रतीक माना गया है। जिसमें भूत, वर्तमान और भविष्य का वास होता है। स्वर्ग लोक, मृत्यु लोक और पाताल लोक भी इन्हीं तीनों नेत्रों के प्रतीक है। भगवान शिव एक ऐसे देव हैं जिन्हें तीनों लोकों का स्वामी कहा जाता है। इसीलिए अब आप भी ध्यान मुद्रा में बैठे और त्रिनेत्र को जागृत करने की कोशिश करें।

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