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मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 2025 : नर्मदा की लहरों से महाकाल की ज्योति तक: मध्यप्रदेश का महायात्रा गान

श्रम से स्वर्ण, संस्कृति से शक्ति – आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 2025

भारत की विशाल छाती में बसा मध्यप्रदेश वह जीवंत हृदय है, जहाँ प्राचीनता की गहराई और आधुनिकता की उड़ान एक साथ साँस लेती हैं, जहाँ हर कण में इतिहास की गरिमा और हर क्षण में भविष्य की उमंग समाहित है। यह भूमि केवल भूगोल की रेखाएँ नहीं, बल्कि भावनाओं की अनंत धारा है, जो राष्ट्र की आत्मा को पोषित करती है।

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस उस अमर यात्रा का उत्सव है, जिसमें संघर्ष की लौ से प्रगति की ज्योति जली, और परंपरा की जड़ों से विकास के पंख फूटे। यह वह पर्व है जो हमें याद दिलाता है कि यह प्रदेश भारत का केंद्र बिंदु नहीं, बल्कि उसकी धड़कन है -जीवंत, अटल और प्रेरणादायक।

इस पवित्र धरती की महिमा उसके प्राचीन अवशेषों में छिपी है, जहाँ भीमबेटका की गुफाएँ मानवता के प्रथम कलाकारों की उँगलियों से उकेरे गए चित्रों से सजी हैं, जो सहस्राब्दियों पुरानी सभ्यता की गवाही देती हैं। साँची का स्तूप बुद्ध की करुणा की शाश्वत भाषा बोलता है, खजुराहो के मंदिर प्रेम की उत्कृष्ट शिल्पकला से जीवन की उत्कटता को अमर बनाते हैं, जबकि उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर समय की सीमाओं को लाँघकर सनातन सत्य की झंकार पैदा करता है।

यहाँ की नर्मदा नदी माँ की तरह बहती है, चंबल की घाटियाँ रहस्यों से भरी हैं, सतपुड़ा की हरियाली जीवन की सततता का प्रतीक है, और बुंदेलखंड की मिट्टी वीरता की कहानियाँ सुनाती है। मध्यप्रदेश की यह विविधता उसे एक जीवंत कैनवास बनाती है, जहाँ प्रकृति और संस्कृति का रंग इतनी सहजता से मिलते हैं कि पत्थर भी काव्य बन जाते हैं, और वन भी संगीत की लय में झूमते हैं।

यह प्रदेश अपनी मिट्टी की सुगंध से नहीं, बल्कि उसके निवासियों की संकल्प शक्ति से पहचाना जाता है। यहाँ का किसान खेतों में पसीने की बूँदों से अन्न की सोने जैसी फसल उगाता है, युवा उद्यमी स्टार्टअप की चिंगारियों से नवाचार की आग जलाते हैं, महिलाएँ लाड़ली लक्ष्मी और बेटी बचाओ जैसी योजनाओं से सशक्त होकर समाज की धुरी बनती हैं।

हर नागरिक राष्ट्रप्रेम की उस अग्नि से प्रज्वलित है जो स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज की आत्मनिर्भरता तक जल रही है। मध्यप्रदेश में श्रम को देवत्व प्राप्त है, जहाँ मेहनत की हर बूँद विकास की नदी में समा जाती है। यह वह भूमि है जहाँ ग्रामीण की सादगी और शहरी की चमक एक साथ चमकती हैं, जहाँ परंपरा आधुनिकता की गोद में खेलती है।

इतिहास की गहराइयों में डूबकर देखें तो मध्यप्रदेश शौर्य और बुद्धि का अनुपम संगम है। राजा भोज की विद्या ने परमार वंश को अमर बनाया, रानी दुर्गावती की तलवार ने गोंडवाना की स्वतंत्रता की रक्षा की, तात्या टोपे की क्रांति ने 1857 की ज्वाला को भड़काया, और चंद्रशेखर आजाद की बलिदानी आत्मा ने स्वाधीनता की मशाल जलाई।

रानी अहिल्याबाई होल्कर की न्यायप्रियता ने मालवा को सुशासन का आदर्श दिया, जबकि पंडित रविशंकर शुक्ल की दूरदृष्टि ने आधुनिक मध्यप्रदेश की नींव रखी। यहाँ की माटी ने कवि कालिदास को जन्म दिया जिनकी रचनाएँ विश्व साहित्य की धरोहर हैं, और तानसेन की रागिनियाँ आज भी ग्वालियर की हवाओं में गूँजती हैं। मध्यप्रदेश केवल घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है जहाँ हर युग की महानता नई पीढ़ी को ऊर्जा देती है।

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आधुनिक युग में मध्यप्रदेश ने परंपरा को प्रगति की तेज रफ्तार रेल पर सवार कर, एक अनूठी मिसाल कायम की है। इंदौर का स्वच्छता अभियान पूरे राष्ट्र को साफ-सफाई का जीवंत पाठ पढ़ा रहा है, जबकि भोपाल की चमकती झीलें और घने वन पर्यावरण संरक्षण की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर हरियाली की गाथा गा रहे हैं।

ग्वालियर का संगीत महोत्सव सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखता है, जबलपुर की रक्षा इकाइयाँ और शैक्षणिक केंद्र राष्ट्रीय सुरक्षा व ज्ञान की अडिग नींव मजबूत कर रहे हैं। उज्जैन का सिंहस्थ मेला अध्यात्म को वैश्विक मंच पर चमकाता है, तो सांची और खजुराहो जैसे धरोहर स्थल पर्यटन की धारा से अर्थव्यवस्था को नई उड़ान दे रहे हैं।

प्रदेश की सड़कें अब चौड़े राजमार्गों में तब्दील हो चुकी हैं, रेल व हवाई संपर्क ने दूरियों को मिटाया है, और डिजिटल इंडिया की लहर गाँव-गाँव तक पहुँचकर हर हाथ को सशक्त बना रही है। यह विकसित मध्यप्रदेश की यात्रा ईंट-पत्थर की नहीं, बल्कि सपनों, संकल्पों और अटूट इच्छाशक्ति की है—जहाँ हर शहर अपनी अनुपम विशिष्टता से जगमगाता है, मगर समग्रता में एकता की सुंदर माला गूंथता है।

विकास की इस प्रखर धारा में मध्यप्रदेश अग्रणी बनकर उभरा है, जहाँ नर्मदा बचाओ आंदोलन से नर्मदा घाटी परियोजनाओं तक जल संरक्षण की अनुपम मिसालें स्थापित हुईं। बुंदेलखंड की प्यासी भूमि को सिंचाई योजनाओं ने हरा-भरा कर दिया, सतपुड़ा की खदानें ऊर्जा के अथाह स्रोत बनकर चमक रही हैं, और मालवा की उर्वर मिट्टी सोयाबीन-गेहूँ की वैश्विक राजधानी के रूप में फल-फूल रही है।

उद्योगों की तेज हवा ने निवेश की बाढ़ ला दी फार्मा हब इंदौर, ऑटोमोबाइल क्लस्टर पिथमपुर, आईटी पार्क भोपाल—ये सब आत्मनिर्भर भारत के मजबूत स्तंभ हैं। किसान सम्मान निधि ने खेतों को मजबूती दी, स्टार्टअप इंडिया से युवा उद्यमी आसमान छू रहे हैं, और पर्यटन नीति ने ओरछा, मांडू, पचमढ़ी जैसे रत्नों को वैश्विक चमक प्रदान की।

शिक्षा के क्षेत्र में आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर, एम्स भोपाल जैसी संस्थाएँ नई पीढ़ी को विश्वस्तरीय क्षमताएँ सौंप रही हैं। यह प्रदेश सिद्ध करता है कि सच्चा विकास जीडीपी की ठंडी संख्याओं से परे, जीवन की गुणवत्ता का उत्थान है जहाँ गरीबी की काली छाया तेजी से हट रही है, और समृद्धि की सुनहरी रोशनी हर कोने को रोशन कर रही है।

मध्यप्रदेश की आत्मा उसकी सांस्कृतिक धरोहर में बसती है, जहाँ त्योहार जीवन की लय हैं। दीपावली की दीपमालाएँ भोपाल की झीलों पर प्रतिबिंबित होती हैं, होली के रंग खजुराहो की मूर्तियों में जीवंत हो उठते हैं, तीज-त्योहार बुंदेली लोकगीतों से गूँजे जाते हैं। मालवा की मांडणा कला, गोंड की आदिवासी चित्रकला, बाघ प्रिंट की साड़ियाँ ये सब विविधता की रंगीन तस्वीर हैं।

यहाँ हिंदी, मालवी, बुंदेली, निमाड़ी जैसी बोलियाँ एकता की ध्वनि बनाती हैं, जहाँ आदिवासी संस्कृति और शहरी परिष्कार सहज रूप से मिलते हैं। मध्यप्रदेश विविधता में एकता का जीता-जागता प्रमाण है, जहाँ हर समुदाय अपनी पहचान बचाते हुए प्रदेश की अस्मिता को मजबूत करता है।

यह प्रदेश भविष्य का वादा है, जहाँ हर सुबह नई उम्मीद लेकर आती है। स्मार्ट सिटी परियोजनाएँ शहरों को भविष्योन्मुखी बना रही हैं, रिन्यूएबल एनर्जी से सौर ऊर्जा की क्रांति हो रही है, और डिजिटल गाँवों से ग्रामीण भारत जुड़ रहा है। मध्यप्रदेश की यह यात्रा बताती है कि संतुलन ही सच्ची प्रगति है जहाँ पर्यावरण का सम्मान हो, संस्कृति का संरक्षण हो, और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। नर्मदा की लहरें जैसे आशीर्वाद बरसाती हैं, महाकाल की ज्योति जैसे मार्गदर्शन देती है, वैसे ही यह प्रदेश भारत को केंद्र की सच्ची समझ देता है भावनात्मक, आध्यात्मिक और प्रगतिशील।

स्थापना दिवस की इस पावन बेला में इस पवित्र धरती को कोटि-कोटि नमन, जो भारत को उसका जीवंत हृदय सौंपती है। यह प्रदेश नक्शे की सीमाओं से परे, करोड़ों दिलों में बसा है, जहाँ हर धड़कन राष्ट्रगौरव की गूँज है, हर साँस स्वाभिमान की सुगंध। मध्यप्रदेश उस आदर्श का प्रतीक है जहाँ अतीत की गौरवमयी गरिमा भविष्य की अडिग नींव बनती है, जहाँ हर नागरिक कर्मयोगी बनकर उत्कर्ष की राह पर चलता है, और हर सपना राष्ट्र की उड़ान से जुड़ा होता है।

इस शुभ अवसर पर दृढ़ संकल्प लें कि मध्यप्रदेश प्रगति की विजय पताका हमेशा फहराए, संस्कृति की ज्योति अखंड जलाए, और भारत के मध्य में रहकर सबको एकता के सूत्र में पिरोए। यह धरती केवल प्रदेश नहीं, बल्कि भारत की अमर आत्मा का दर्पण है—अजर, अविचल और आसमां छूती उड़ान वाली। जय मध्यप्रदेश! जय भारत!

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